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खदान का रास्ता रोकने में ग्रामीणों पर रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो , बांदा
Updated Mon, 29 Jan 2018 10:41 PM IST
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सादीमदनपुर खदान के पास खेत में खड़ी पोकलैंड।
- फोटो : अमर उजाला
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केन नदी खदान के रास्ते पर दो दिन से जाम लगाकर ट्रकों का आवागमन ठप किए 50 से ज्यादा ग्रामीणों और सात नामजद लोगों के विरुद्ध खदान के कर्मचारी ने मारपीट और 50 हजार रुपये मांगने की रिपोर्ट दर्ज कराई है। उधर, खदान संचालकों से सुलह समझौते के बाद विरोध कर रहे ग्रामीणों ने आंदोलन खत्म कर दिया।
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चिल्ला थाना क्षेत्र के सादीमदनपुर गांव के पास स्थित बालू खदान को झांसी निवासी रंजीत सिंह और गुरुग्राम निवासी तदवीर सिंह ने 15 करोड़ 21 लाख 84 हजार रुपये में ई-टेंडर से पट्टे पर ली है। 1020 रुपये प्रति घन मीटर की सबसे महंगी बोली लगाई। पिछले गुरुवार को ठेकेदारों ने खदान चालू कर दिया, लेकिन खदान के रास्ते में पड़ने वाले लोमर गांव के लोगों ने सड़क पर धरना देकर ट्रकों का रास्ता जाम कर दिया।
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ग्रामीणों का कहना था कि गांव के अंदर से ट्रक गुजरेंगे तो दुर्घटनाएं होंगी। सड़क भी ध्वस्त हो जाएगी। रविवार को प्रभारी डीएम समेत भारी संख्या में पुलिस और पीएसी मौके पर मौजूद रही। ग्रामीण अपनी जिद पर अड़े रहे।
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सोमवार को खदान कर्मचारी एमपी के टीकमगढ़ निवासी शिसपाल उर्फ निक्की पाल ने चिल्ला थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी। इसमें कहा है कि वह ठेकेदार रंजीत सिंह यादव की खदान में कैश लाने और ले जाने का काम करता है। रविवार की रात करीब 11:15 बजे वह चिल्ला से खाना खाकर ठेका कंपनी की बोलेरो से लौट रहा था।
उसके साथ झांसी निवासी करन सिंह और राघवेंद्र यादव भी थे। रास्ते में लोमर गांव रोड से गौसीपुर मोड़ पर जाम लगाए बैठे 50-60 अज्ञात महिला-पुरुषों और छतरपुर जिले के खजुराहो निवासी श्याम सुंदर सिंह पुत्र रणधीर, रमाशंकर सिंह पुत्र वेदराज सिंह, नौशाद पुत्र मकबूल, राजा सिंह पुत्र रामशरण सिंह, आरके सोनकर पुत्र शिवदास, अनिल सिंह पुत्र बाबू सिंह और सुधीर शर्मा पुत्र मथुरा प्रसाद शर्मा ने बोलेरो रोक ली और अभद्रता कर जान से मारने की धमकी देकर 50 हजार रुपये मांगे।
बोलेरो सवार तीनों लोगों को मारा-पीटा। इसी बीच उसके 50 हजार रुपये गायब हो गए। यूपी-100 में फोन करने पर पुलिस आई तो हमलावर भाग गए। चिल्ला थाना पुलिस ने सात नामजद समेत लोमर गांव के 50-60 अज्ञात लोगों के विरुद्ध धारा 145, 153, 283, 341 और 387 आईपीसी की रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
उधर, सोमवार को खदान संचालकों और लोमर गांव के आंदोलनकारियों के बीच सुलह-समझौता हो गया। खदान ठेकेदारों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि ट्रकों के आवागमन से उन्हें कोई खतरा या असुविधा नहीं होगी। वे हर सुविधा उपलब्ध कराएंगे। उधर, खदान में पोकलैंड और जेसीबी मशीनों के जरिये खनन कराया जा रहा है।