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गुरु बलखड़िया की राह पर बबुली
ब्यूरो, अमर उजाला, बांदा
Updated Fri, 07 Oct 2016 11:36 PM IST
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बलखड़िया के शव और अपने साथियों के साथ नीली शर्ट में बबुली कोल (फाइल फोटो)।
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा। दस्यु बबुली कोल गुरु बलखड़िया के नक्शे कदम पर चल पड़ा है। गुरु के बराबर आने में चेले को मात्र ‘दो कदम’ यानी दो लाख रुपये का अंतर है। पाठा के बीहड़ों में इन दिनों बबुली कोल गिरोह फायर और मैन पावर में सबसे ताकतवर है।
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दस्यु बबुली कोल मूल रूप से डोंड़ामाफी (मानिकपुर) का रहने वाला है। पाठा के बीहड़ों में लगभग ढाई साल से सक्रिय है। पुलिस मुठभेड़ में मारे गए बलखड़िया गैंग के साथ आपराधिक जीवन शुरू करने वाले बबुली कोल की शोहरत खतरनाक डकैतों मेें है। वह बलखड़िया का दाहिना हाथ रहा है।
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बलखड़िया के मारे जाने के बाद गैंग के सदस्यों ने उसे लीडर मान लिया था। बलखड़िया पर यूपी और एमपी की ओर से साढ़े सात लाख रुपये का ईनाम था। पहले बबुली कोल पर यूपी पुलिस ने दो लाख रुपये और एमपी ने 50 हजार का ईनाम घोषित किया था।
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अब यूपी सरकार ने अपनी ईनामी रकम बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दी है, यानी बबुली के सिर पर साढ़े पांच लाख रुपये का ईनामी ताज बंध गया है। ईनाम की इस ‘ताजपोशी’ के साथ बबुली अपने गुरु बलखड़िया के करीब पहुंच रहा है।