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छह डकैतों के बदले आपने 15 जवान गंवाए

Wed, 17 May 2017 11:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बांदा
अमर उजाला ब्यूरो/बांदा Updated Wed, 17 May 2017 11:56 PM IST
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बांदा। बुंदेलखंड का पाठा क्षेत्र पिछले पांच दशकों से लगातार दस्युओं का दंश झेल रहा है। दस्यु उन्मूलन के नाम पर अरबों रुपये खर्च हो गए। एंटी डकैती सेल गठन से लेकर पुलिस को आधुनिक असलहों से लैस करके जंगलों में उतारा गया। लेकिन नतीजों पर नजर डालें तो डकैतों से ज्यादा पुलिस को नुकसान हुआ है।  डकैतों से दोगुना ज्यादा पुलिस कर्मियों को जान गंवानी पड़ी है। पुलिस यहां के मात्र 6 प्रमुख दस्यु सरगनाओं को मार पाई। जबकि डकैतों ने पुलिस के 15 से ज्यादा जवानों को शहीद कर दिया। पुलिस को जज्बे के साथ डाकुओं का सफाया करने की जरूरत है। पाठा क्षेत्र में दस्युओं की दहशत की शुरूआत 1970 के दशक से हुई। कुख्यात दस्यु सरगना शिव कुमार पटेल उर्फ ददुआ ने पाठा में साढ़े तीन दशक तक अपनी दहशत का सिक्का चलाया। ददुआ के नाम से यह क्षेत्र देश के बाहर विदेशों तक जाना जाने लगा। बमुश्किल जुलाई 2007 में ददुआ को उसके कई साथियों सहित मारा जा सका। इसके बाद पाठा को दस्युओं का अड्डा बनाए रखने की ठोकिया ने ठान ली। अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया ने कई साल कहर बरपाया। पुलिस का वह सबसे बड़ा जानी दुश्मन साबित हुआ। बमुश्किल 5 अगस्त 2008 में उसे मारा जा सका। दस्यु सुंदर पटेल उर्फ रागिया ने भी अपने आतंकी राग से पाठा को गुंजाए रखा। अगस्त 2012 को उसका खात्मा हुआ। एक अन्य दस्यु सरगना घनश्याम केवट आखिरी दम तक पुलिस के लिए जानी दुश्मन साबित हुआ। जून 2009 में तीन दिन चली मुठभेड़ के दौरान उसने पीएसी कंपनी कमांडर समेत चार पुलिस जवानों को शहीद कर दिया। आईजी और डीआईजी को गोली मारकर घायल कर दिया गया। अंतत: इसी मुठभेड़ में वह भी मारा गया। आतंक के एक अन्य पर्याय स्वदेश पटेल उर्फ बलखड़िया को जुलाई 2016 में मारा जा सका। एक अन्य दस्यु सरगना शंकर केवट को जून 2006 में ही मार दिया गया था।

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शहीदों का बदला नहीं ले पाई है पुलिस
6 कुख्यात सरगनाओं की मौत के बदले पुलिस को  अपने एक दर्जन से ज्यादा जवान गंवाना पड़े। इनमें 6 एसटीएफ के युवा कमांडो भी शामिल हैं। 23 जुलाई 2007 की रात जंगल से मुठभेड़ करके लौटते समय बांदा जनपद के बघोलन तिराहे में ठोकिया गिरोह ने घात लगाकर उन पर गोलियां बरसाते हुए सभी को मौत के घाट उतार दिया। एक मुखबिर भी मारा गया। इसके पूर्व घनश्याम केवट ने मुठभेड़ में पीएसी कंपनी कमांडर और डीआईजी के गनर तथा दो कांस्टेबिलों को शहीद कर दिया था। चित्रकूट में ड्यूटी में बाइक पर जाते समय दो कांस्टेबिलों रामसजीवन पाल व रामलाल पाल को दिन दहाड़े डकैतों ने गोली मारकर शहीद कर दिया। उनकी रायफलें भी लूट लीं। कालिंजर में तैनात सिपाही रमाकांत मिश्र भी ड्यूटी के दौरान बदमाशों की गोली का शिकार हुए। इसी तरह एक तफ्तीश मे आए दिल्ली पुलिस के सब इंस्पेक्टर भगवान शर्मा को चित्रकूट जनपद के बिलहरी गांव में बदमाशों ने शहीद कर दिया। दस्युओं के मरने और पुलिस कर्मियों की शहादत के यह मोटे -माटे आंकड़े हैं। खंगालने पर यह तादाद और बढ़ सकती है। लेकिन यूपी-एमपी पुलिस डकैतों से शहीदों का बदला नहीं ले सकी है।
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4 सरगनाओं से अभी भी सहमा है पाठा
बांदा। यूपी-एमपी में फैले दस्यु प्रभावित पाठा क्षेत्र में अभी भी करीब आधा दर्जन गैंगों का आतंक है। इनमें दस्यु सरगना बबुली कोल (इनाम 7 लाख),  गौरी यादव (इनाम 1.10 लाख), दस्यु गोप्पा यादव (इनाम एक लाख) और दस्यु सरगना खरदूषण (इनाम 50 हजार) मुख्य रूप से सरे फेहरिस्त हैं।  
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