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हत्या के जुर्म में दो भाइयों को उम्रकैद
Updated Thu, 26 Jul 2018 10:40 PM IST
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बांदा। जमीन के विवाद में दिनदहाड़े हत्या के जुर्म में दो भाइयों को अदालत ने आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी है। हत्या की यह घटना 11 साल पूर्व की है।
गिरवां थाना क्षेत्र के मुरवां गांव निवासी गीता देवी निगम पत्नी सुधीर निगम ने 7 मार्च 2007 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके गांव के गंगा सहाय श्रीवास्तव पुत्र रमाशंकर व उसके दो बेटे ललित मोहन और श्याम मोहन के अलावा एक नाबालिग ने 6 मार्च 2007 को उसके पति सुधीर निगम की घर के सामने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
इसके पूर्व 29 जनवरी 2007 को आरोपियों ने रायफल व बंदूकें लेकर उसके घर में घुसकर गाली-गलौज और जान से मारने का प्रयास किया था। घटना के पीछे जमीन की रंजिश बताई। जांच के बाद पुलिस ने इस मामले में दो बार फाइनल रिपोर्ट लगा दी।
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इससे क्षुब्ध पीड़ित ने अदालत में अर्जी देकर आपत्ति जताई थी। अदालत ने आपत्ति अर्जी स्वीकार हुए पुलिस की फाइनल रिपोर्ट खारिज कर सभी आरोपियों को तलब कर लिया। मुकदमे के दौरान आरोपी गंगा सहाय की मृत्यु हो चुकी है। नाबालिग आरोपी का मामला किशोर न्यायालय के सुपुर्द कर दिया गया।
जनपद न्यायाधीश चंद्रभान तृतीय की अदालत में सुनवाई के दौरान प्रभारी जिला शासकीय अधिवक्ता कैलाश चौबे ने अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाह पेश किए। लगभग 11 वर्षों के बाद गुरुवार को अदालत ने आरोपी दोनों भाइयों ललित मोहन व श्याम मोहन पुत्रगण गंगा सहाय को धारा 302 में आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपया जुर्माने की सजा सुनाई।
जुर्माना अदा न करने पर एक वर्ष की अतिरिक्त जेल होगी। आरोपी जमानत पर थे। उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
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गिरवां थाना क्षेत्र के मुरवां गांव निवासी गीता देवी निगम पत्नी सुधीर निगम ने 7 मार्च 2007 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके गांव के गंगा सहाय श्रीवास्तव पुत्र रमाशंकर व उसके दो बेटे ललित मोहन और श्याम मोहन के अलावा एक नाबालिग ने 6 मार्च 2007 को उसके पति सुधीर निगम की घर के सामने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
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इसके पूर्व 29 जनवरी 2007 को आरोपियों ने रायफल व बंदूकें लेकर उसके घर में घुसकर गाली-गलौज और जान से मारने का प्रयास किया था। घटना के पीछे जमीन की रंजिश बताई। जांच के बाद पुलिस ने इस मामले में दो बार फाइनल रिपोर्ट लगा दी।
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इससे क्षुब्ध पीड़ित ने अदालत में अर्जी देकर आपत्ति जताई थी। अदालत ने आपत्ति अर्जी स्वीकार हुए पुलिस की फाइनल रिपोर्ट खारिज कर सभी आरोपियों को तलब कर लिया। मुकदमे के दौरान आरोपी गंगा सहाय की मृत्यु हो चुकी है। नाबालिग आरोपी का मामला किशोर न्यायालय के सुपुर्द कर दिया गया।
जनपद न्यायाधीश चंद्रभान तृतीय की अदालत में सुनवाई के दौरान प्रभारी जिला शासकीय अधिवक्ता कैलाश चौबे ने अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाह पेश किए। लगभग 11 वर्षों के बाद गुरुवार को अदालत ने आरोपी दोनों भाइयों ललित मोहन व श्याम मोहन पुत्रगण गंगा सहाय को धारा 302 में आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपया जुर्माने की सजा सुनाई।
जुर्माना अदा न करने पर एक वर्ष की अतिरिक्त जेल होगी। आरोपी जमानत पर थे। उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।