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Banda News: एमबीबीएस छात्रा की खुदकुशी की गुत्थी उलझी
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बांदा। एमबीबीएस छात्रा की खुदकुशी की वजह की गुत्थी सुलझ नहीं पा रही है। मोबाइल कॉल डिटेल और व्हाट्सएप चैटिंग से भी पुलिस को कोई खास क्लू नहीं मिल सका है। उधर, लगातार तीसरे दिन भी एमबीबीएस छात्र-छात्राओं ने थ्योरी और प्रैक्टिकल की कक्षाएं अटेंड नहीं की। एडीएम अमिताभ ने भी अपनी जांच रिपोर्ट कॉलेज के प्रधानाचार्य को सौंप दी है। सूत्रों के मुताबिक जांच रिपोर्ट में कॉलेज प्रशासन की ओर से किसी तरह का प्रेशर या तनाव की बात नहीं साबित हो पाई है।
राजस्थान के चुरू जनपद की रहने वाली एमबीबीएस छात्रा ऊषा भार्गव की खुदकुशी की वजह रहस्य बनकर रह गई है। परिजनों द्वारा किसी तरह का कोई आरोप-प्रत्यारोप न लगाए जाने से यह गुत्थी और उलझ गई है। रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में सहपाठी छात्र-छात्राओं ने लगातार तीसरे दिन भी कक्षाएं अटेंड नहीं की है। वह अपनी साथी की मौत का गम नहीं भुला पा रहे हैं। मृतका छात्रा ऊषा भार्गव का रूम भी फिलहाल बंद है। उसके अगल-बगल रूमों में रहने वाली छात्राएं फिलहाल नार्मल हैं। प्रधानाचार्य डॉ. सुनील कुमार कौशल की ओर से उन्हें सदमें से उबारने के लिए उनकी काउंसिलिंग भी कराई गई है।
मोबाइल कॉल डिटेल और व्हाटसएप चैटिंग की जांच में एक सीनियर छात्र जो कि छात्रा के परिवार का ही बताया गया है से नार्मल चैटिंग होना पाया गया है। अंतिम चैटिंग में क्लास न जाने का उल्लेख है। ऐसा कोई क्लू नहीं मिला है जिससे छात्रा की मौत की वजह सामने आ सके। छात्रा के स्वभाव के पहलू पर भी जांच की जा रही है। -मनोज शुक्ल, शहर कोतवाल, बांदा।
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एमबीबीएस छात्राओं से छात्रावास में जाकर कलमबंद बयान लिए थे। अपनी जांच रिपोर्ट को प्रधानाचार्य को सौंप दी है। प्रधानाचार्य ने ही डॉ. रजनी के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई थी। उन्होंने छात्राओं से कॉलेज प्रशासन द्वारा किसी तरह के तनाव व प्रेशर संबंधी जांच की थी। लेकिन ऐसा कुछ निकलकर नहीं आया है, जिससे खुदकुशी की वजह कॉलेज प्रशासन की ओर से प्रेशर या उत्पीड़न आदि होना हो। -अमिताभ यादव, एडीएम, न्यायिक, बांदा।
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राजस्थान के चुरू जनपद की रहने वाली एमबीबीएस छात्रा ऊषा भार्गव की खुदकुशी की वजह रहस्य बनकर रह गई है। परिजनों द्वारा किसी तरह का कोई आरोप-प्रत्यारोप न लगाए जाने से यह गुत्थी और उलझ गई है। रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में सहपाठी छात्र-छात्राओं ने लगातार तीसरे दिन भी कक्षाएं अटेंड नहीं की है। वह अपनी साथी की मौत का गम नहीं भुला पा रहे हैं। मृतका छात्रा ऊषा भार्गव का रूम भी फिलहाल बंद है। उसके अगल-बगल रूमों में रहने वाली छात्राएं फिलहाल नार्मल हैं। प्रधानाचार्य डॉ. सुनील कुमार कौशल की ओर से उन्हें सदमें से उबारने के लिए उनकी काउंसिलिंग भी कराई गई है।
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मोबाइल कॉल डिटेल और व्हाटसएप चैटिंग की जांच में एक सीनियर छात्र जो कि छात्रा के परिवार का ही बताया गया है से नार्मल चैटिंग होना पाया गया है। अंतिम चैटिंग में क्लास न जाने का उल्लेख है। ऐसा कोई क्लू नहीं मिला है जिससे छात्रा की मौत की वजह सामने आ सके। छात्रा के स्वभाव के पहलू पर भी जांच की जा रही है। -मनोज शुक्ल, शहर कोतवाल, बांदा।
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एमबीबीएस छात्राओं से छात्रावास में जाकर कलमबंद बयान लिए थे। अपनी जांच रिपोर्ट को प्रधानाचार्य को सौंप दी है। प्रधानाचार्य ने ही डॉ. रजनी के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई थी। उन्होंने छात्राओं से कॉलेज प्रशासन द्वारा किसी तरह के तनाव व प्रेशर संबंधी जांच की थी। लेकिन ऐसा कुछ निकलकर नहीं आया है, जिससे खुदकुशी की वजह कॉलेज प्रशासन की ओर से प्रेशर या उत्पीड़न आदि होना हो। -अमिताभ यादव, एडीएम, न्यायिक, बांदा।