केंद्र सरकार पर बिफरे ग्रामीण बैंक अफसर
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बांदा। नोटबंदी के बाद बैंकों में आएदिन हो रहे हंगामे और बैंककर्मियों के साथ बदसलूकी के लिए यूपी ग्रामीण बैंक आफीसर्स आर्गनाइजेशन ने सख्त विरोध जताते हुए आरबीआई और स्टेट बैंक तथा केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय पर भेदभाव का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कैश केंद्र सरकार नहीं दे रही और खाताधारकों को अपमान उन्हें झेलना पड़ रहा है। मंगलवार को यहां आर्गनाइजेशन के प्रांतीय अध्यक्ष आरएन सिंह के आवास में हुई बैठक में प्रांतीय अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा बड़े नोटों की बंदी का संकट ग्रामीण बैंककर्मी झेल रहे हैं। इसके पहले भी प्रधानमंत्री योजनाओं जनधन खाता, जनधन बीमा, फसल बीमा आदि में ग्रामीण बैंक कर्मियों ने जीजान से योगदान किया। नोटबंदी में भी अरबों रुपये खातों में जमा कराए। सुबह से रात तक काम किया लेकिन जब ग्राहकों को कैश देने का समय आया तो आरबीआई प्रबंध तंत्र, स्टेट बैंक और लीड बैंक करेंसी चेस्ट नहीं जुटा पा रहे। नतीजे में ग्रामीण बैंक कर्मियों को ग्राहकों की मारपीट तक सहनी पड़ रही है।
अध्यक्ष ने कहा कि हफ्ते में सिर्फ दो दिन कैश आपूर्ति होती है। इससे दूरदराज से आए तमाम किसान और महिलाएं दिन भर बैंक में बैठने के बाद खाली हाथ मायूस लौट जाते हैं। उन्होंने कहा कि 10 नवंबर से आज तक किसी भी ब्रांच में 10, 20, 50, 100 के नोट जमा नहीं हुए हैं। इससे ब्रांच में आई कैश रिक्तता की पूर्ति नहीं हो पा रही। कहा कि केंद्र सरकार या रिजर्व बैंक मीडिया के जरिये तमाम घोषणाएं कर देती है लेकिन बैंकों में पर्याप्त कैश नहीं दिया जाता। श्री सिंह ने कहा कि ग्रामीण बैंक कर्मचारियों के मृतक आश्रित को नौकरी, समान पेंशन का लाभ अभी तक नहीं मिल रहा। ग्रामीण बैंक कर्मियों की दशा बहुत दैनीय है। मांग की कि प्रधानमंत्री तत्काल पेंशन योजना, आश्रित योजना और अनुकंपा नियुक्ति योजना तुरंत लागू करें। बैठक में आर्गनाइजेशन महामंत्री गुरु प्रसाद गुप्ता, विजय सिंह चौहान, चंद्रराज त्रिपाठी, भरतबाबू पांडेय, आरके शिवहरे, सुशील मिश्रा, धर्मेंद्र सचान, राज कुमार सिंह, शिव गोपाल यादव, विजय पाल यादव, मनोज कुमार इत्यादि शामिल रहे।