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बुंदेलखंड को तड़पा रहे सूखा, गर्मी, रोग
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
Updated Mon, 23 May 2016 12:13 AM IST
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किसान हलकान
- फोटो : अमर उजाला
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सूखे से बुंदेलखंड की खेती को पहुंचे जबर्दस्त नुकसान के बाद अब प्रचंड गर्मी, पेयजल संकट और संक्रामक बीमारियों ने बुंदेलखंड में जीना दूभर कर दिया है।
प्यास से मवेशी मर रहे हैं। लू और संक्रामक बीमारियों से इंसानों की मौतें हो रही हैं। प्रदेश सरकार ने बुंदेलखंड को अब औपचारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित किया है। लेकिन फिलहाल इस घोषणा से यहां कोई अतिरिक्त राहत नजर नहीं आ रही। कई महीने पूर्व शुरू हुईं राहत योजनाएं ही अपने ढर्रे पर चल रही हैं।
पारा 48 डिग्री पर आ गया है। कुएं, तालाब सूख गए हैं। भूजल स्तर 12 से 15 मीटर तक नीचे चला गया है। हैंडपंप फ्लाप हो गए हैं। चारा-भूसा और पानी न मिलने से मवेशियों की मौतों का सिलसिला जारी है।
सरकारी राहत का आलम यह है कि पिछले वर्ष मार्च माह में हुई ओला और अतिवृष्टि से पहुंचे फसलों के नुकसान का मुआवजा या राहत राशि तमाम किसानों को अब तक नहीं मिली है। सूखा राहत से भी बड़ी तादाद में वंचित हैं।
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प्यास से मवेशी मर रहे हैं। लू और संक्रामक बीमारियों से इंसानों की मौतें हो रही हैं। प्रदेश सरकार ने बुंदेलखंड को अब औपचारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित किया है। लेकिन फिलहाल इस घोषणा से यहां कोई अतिरिक्त राहत नजर नहीं आ रही। कई महीने पूर्व शुरू हुईं राहत योजनाएं ही अपने ढर्रे पर चल रही हैं।
पारा 48 डिग्री पर आ गया है। कुएं, तालाब सूख गए हैं। भूजल स्तर 12 से 15 मीटर तक नीचे चला गया है। हैंडपंप फ्लाप हो गए हैं। चारा-भूसा और पानी न मिलने से मवेशियों की मौतों का सिलसिला जारी है।
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सरकारी राहत का आलम यह है कि पिछले वर्ष मार्च माह में हुई ओला और अतिवृष्टि से पहुंचे फसलों के नुकसान का मुआवजा या राहत राशि तमाम किसानों को अब तक नहीं मिली है। सूखा राहत से भी बड़ी तादाद में वंचित हैं।
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