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सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश पहले भी दे चुके हैं बुंदेली

Sat, 09 Nov 2019 11:12 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 09 Nov 2019 11:12 PM IST
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Bundeli has already given the message of communal harmony
बांदा : खाईंपार मोहल्ले में फोर्स के साथ निगरानी करते एडीएम संतोष बहादुर सिंह और एएसपी लालभरत कुम - फोटो : BANDA
बांदा। ये बुंदेलखंड है। ऋषियों, मुनियों और सूफी-संतों की सरजमीं। हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए पूरे देश में अपनी अलग पहचान है। अब सुप्रीमकोर्ट के फैसले के पहले वर्ष 2010 में हाईकोर्ट के फैसले के दौरान बुंदेली बाशिंदे भाईचारे का संदेश दे चुके हैं। चित्रकूटधाम मंडल में सांप्रदायिक सौहार्द की यह वरासत और मजबूत है।
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चित्रकूट धर्मनगरी पूरी दुनिया के लिए आस्था का केंद्र है। यहां मुस्लिम बादशाह औरंगजेब ने संत बालकदास महाराज की प्रेरणा से चित्रकूट में रामघाट के किनारे मंदिर बनवाया था। यह आज भी हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश दे रहा है। इससे बढ़कर बात यह है कि औरंगजेब ने 13 गांवों का सरकारी लगान इस मंदिर के रखरखाव के लिए आरक्षित कर दिया था बादशाह ने अपना यह फरमान ताम्रपत्र में जारी किया था। आज भी ये गांव बरकरार हैं। इन गांवों के नाम के आगे ‘माफी’ शब्द जुड़ा हुआ है। उदाहरण के लिए जारौमाफी, तेरहीमाफी इत्यादि। अलग जिला बनने के लगान माफी वाले ये 8 गांव चित्रकूट में शामिल हो गए हैं।
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इसी तरह बांदा है। ऋषि बामदेव और नवाब अली बहादुर के नाम की नगरी। बुंदेलखंड की मशहूर शक्तिपीठ बांदा की महेश्वरी देवी मंदिर का निर्माण बांदा नवाब ने अपने कारीगर और मैटेरियल से कराया था। यहां के मशहूर जमींदार बैरिस्टर खानदान के शेख यूसुफ जमां ने महेश्वरी देवी मंदिर सहित शहर की मुख्य रामलीला के लिए जमीन दान की थी। यहां मोहर्रम में बड़ी संख्या में हिंदू धर्मावलंबी मुस्लिमों के साथ पर्व मनाते हैं और पूरा सहयोग देते हैं। महोबा मजारों और सरोवरों का शहर है। वीर आल्हा-ऊदल की भूमि है। यहां भी हिंदू-मुस्लिम एकता बेमिसाल है। रोशन शहीद और पीर मुबारक शाह इत्यादि मजारों में आज भी मुस्लिमों के अलावा अन्य धर्मों के लोग हाजिरी देते हैं। मुस्लिम महिलाएं हिंदू भाइयों को राखी बांधती हैं।
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मंदिर भी बनेगा। मस्जिद भी तामीर होगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपना सुपर फैसला देने में भले ही 40 दिन लगा दिए, लेकिन यहां के बाशिंदों ने पहले ही फैसला कर लिया था कि सदियों से चली आ रही भाईचारे की पहचान को आंच नहीं आने देंगे। फैसले की हलचल आम लोगों से ज्यादा प्रशासन और पुलिस में रही। यहां के बाशिंदे रोजमर्रा की तरह एक-दूसरे से मिलते-जुलते और अपने कामधंधों में लगे रहे। बल्कि कई बार उन्हें पुलिस के हूटर और अफसरों की चलहकदमी से याद आया कि आज अयोध्या का फैसला हुआ है।
शुक्रवार को शाम सुप्रीम कोर्ट द्वारा अचानक यह फैसला लिए जाने की अयोध्या का फैसला शनिवार को सुनाया जाएगा, की खबर मिलते ही कयासबाजियों का सिलसिला शुरू हो गया। मुस्लिम और हिंदू बाहुल्य इलाकों के अलावा मिली-जुली बस्तियों में भी दोनों वर्ग के लोग एक साथ बैठकर फैसले को लेकर चर्चाओं में मशगूल रहे। उधर, आम लोगों से कई गुना ज्यादा परेशान प्रशासन नजर आया। रातभर पुलिस के हूटरों ने लोगों की नींद उड़ा दी। सुबह से फिर यही सिलसिला चल पड़ा। पुलिस और प्रशासन के कुछ ज्यादा ही एहतियाती उपायों ने सुबह शुरू के कुछ घंटों में लोगों ने घर से निकलने में परहेज किया।
हालांकि बाजार रोजमर्रा की तरह पूरी तरह खुले। फैसला आने के बाद ज्यों-ज्यों वक्त बीता, त्यों-त्यों दिनचर्या रोजमर्रा के ढर्रे पर आ गई। शहर के मर्दननाका, छिपटहरी, अलीगंज, खुटला, गूलरनाका, छावनी, निम्नीपार आदि मुस्लिम इलाकों में सबकुछ रोज जैसा था। उधर, कटरा, छोटी बाजार, बलखंडी नाका, कालवनगंज, स्टेशन रोड, बन्योटा इत्यादि मिले-जुले आबादी के इलाकों में हिंदू-मुस्लिम पड़ोसियों ने रोज की तरह साथ बैठकर होटल में चाय की चुस्की का ढर्रा बरकरार रखा।
स्कूलों की छुट्टी ने सूनी कर दी सुबह
बांदा। स्कूल-कालेजों की छुट्टी तीन दिन के लिए कर दी गई। इससे सुबह स्कूली बसों और वाहनों की धमाचौकड़ी थमी रही। उधर, स्कूलों के बच्चों के जत्थे भी सड़कों पर नजर नहीं आए। उधर, कुछ लोग पुलिस और प्रशासन के तामझाम से यह अंदाज लगा बैठे कि मामला गड़बड़ है। तमाम लोगों ने कई दिनों का राशन, सब्जी आदि खरीदकर रख ली। सुरक्षा इतनी चौकस रही कि दोपहिया वाहनों पर सड़कों से गुजरना दूभर रहा। हर वाहन को पुलिस रोकती-टोकती रही।

सड़कों पर रहा पुलिस और नागरिक प्रशासन
बांदा। प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के चलते शनिवार को पूरा पुलिस व नागरिक प्रशासन सड़कों पर रहा। डीएम हीरालाल और पुलिस अधीक्षक गणेश साहा ने शहर का भ्रमण किया और अलीगंज पुलिस चौकी में बैठकर जायजा लेते रहे। उधर, अपर एसपी एलबीके पाल और एडीएम संतोष बहादुर सिंह की जोड़ी पुलिस फोर्स के साथ शहर सहित अतर्रा, नरैनी, बबेरू आदि कस्बों में भ्रमण करती रही। सिटी मजिस्ट्रेट प्रदीप कुमार और नगर पुलिस उपाधीक्षक आलोक मिश्रा फोर्स के साथ शहर में गश्त करते रहे। कोतवाली प्रभारी दिनेश सिंह सहित शहर की सभी चौकियों के इंचार्ज अपने इलाकों में नजर रखकर लोगों को रोकते-टोंकते रहे। कस्बों के क्षेत्राधिकारी और एसडीएम भी दिनभर भ्रमण पर रहे।
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