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आईएफएस मॉडल की खेती से बुंदेली किसान बदलें तकदीर

Sun, 27 Jun 2021 11:10 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 27 Jun 2021 11:10 PM IST
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Bundeli farmers change the fate of IFS model farming
बांदा। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) बुंदेलखंड के किसानों की आमदनी को बढ़ाने के लिए आगे आया है। कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बांदा द्वारा विकसित एकीकृत कृषि प्रणाली (आईएफएस) मॉडल के माध्यम बुंदेली किसानों की दशा और दिशा बदली जाएगी।
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इसके लिए नाबार्ड ने बुंदेलखंड क्षेत्र में सतत आजीविका के लिए एकीकृत कृषि प्रणाली के माध्यम से बहुस्तरीय रोजगार सृजन परियोजना स्वीकृत की है। यह परियोजना पहली जुलाई 2021 से शुरू की जाएगी। परियोजना लागत 30,98,000 रुपये है। पहले चरण में नाबार्ड ने 24,68,000 रुपये अनुदान दिया है। रविवार को अध्यक्ष, नाबार्ड डॉ. जीआर चिंतला और मुख्य महाप्रबंधक डॉ. दुष्यंत चौहान ने कृषि विश्वविद्यालय में आईएफएस मॉडल का अवलोकन किया।
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दो एकड़ भूमि में बने इस मॉडल पर कृषि के कई आयामों को देखा और इसे विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने चार बिंदुओं पर भी जोर दिया। यहां दूध से जुड़े रोजगार, हरे चारे का उत्पादन, महिलाओं और युवाओं के लिए कृषि आधारित परियोजनाओं के सृजन पर बल दिया।
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कहा कि रोजगार के लिए खेती एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इसको अपनाने की जरूरत है। विशेषज्ञों से राय लेकर बुंदेली किसान खेती में अपना मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। कहा कि कोरोना काल में भी नाबार्ड मजबूती के साथ उभरा है। बुंदेलखंड में उन्होंने कृषि सर्वे किया है। इसके पूर्व उन्होंने विवि के विशेषज्ञों के साथ बैठक की। इस मौके पर कुलपति डॉ. यूएस गौतम, कुल सचिव डॉ. एसके सिंह, जनसंपर्क अधिकारी डॉ. वीके गुप्ता आदि भी मौजूद रहे।
युवा पलायन छोड़ कृषि को रोजगार बनाएं
नाबार्ड के अध्यक्ष डॉ. जीआर चिंतला ने कहा कि बुंदेलखंड के युवा पलायन का रास्ता छोड़कर बुंदेलखंड में ही रहकर कृषि में अपना भाग्य आजमाएं। महानगरों की चकाचौंध में युवा गुम हो रहे हैं, जबकि बुंदेलखंड में कृषि की अपार संभावनाएं हैं। यहां की सबसे बड़ी समस्या पलायन की है।

आईएफएस मॉडल से समस्या पर ब्रेक लग सकता है। मुख्य महाप्रबंधक डॉ. दुष्यंत चौहान ने कहा कि महिलाएं स्वयं सहायता समूह के माध्यम से कृषि में अपना रोजगार तलाशें, इससे वह आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ सकतीं हैं।
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