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कैंसर से जूझ रहे किसान ने गोली मारकर दी जान : सीओ
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बांदा। कैंसर से पीड़ित किसान ने माथे पर तमंचे से गोली मार ली। गोली की आवाज सुनकर छोटा भाई पहुंचा तो किसान घर के बाहर गिरा मिला। भाई की सूचना पर पहुंची पुलिस व फील्ड यूनिट ने घटनास्थल की जांच की। किसान की शर्ट की जेब से सुसाइड नोट बरामद हुआ है। उसने लिखा है कि वह असहनीय पीड़ा की वजह से खुद यह कदम उठा रहा है।
शहर कोतवाली के मवई बुजुर्ग गांव निवासी मनप्यारे लाल प्रजापति (44) ने बृहस्पतिवार को तड़के करीब सवा तीन बजे तमंचे से माथे पर गोली मारकर खुदकुशी कर ली। घटना के समय गांव में बिजली नहीं थी। गोली की आवाज सुनकर उसका छोटा भाई महेंद्र उठकर घर के बाहर आया तो मनप्यारे जमीन पर गिरे मिले। भाई ने मोबाइल के टार्च की रोशनी में देखा तो मृत पड़े थे। भाई ने परिजनों को जगाया और पुलिस को सूचना दी।
सुबह कृषि विश्वविद्यालय चौकी इंचार्ज देवेंद्र कुमार और फील्ड यूनिट टीम पहुंची। फील्ड यूनिट ने घटनास्थल की जांच की। मृतक की शर्ट की जेब से सुसाइड नोट भी बरामद किया गया है। चौकी इंचार्ज के मुताबिक सुसाइड नोट में लिखा है कि वह असहनीय दर्द से परेशान है, अब दर्द नहीं सह सकता। वह खुद यह कदम उठा रहा है। मेरे मरने के बाद भाई मेरे बच्चों का ख्याल रखें।
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छोटे भाई महेंद्र ने बताया कि तीन साल से वह गाल के कैंसर से पीड़ित थे। उनका ग्वालियर कैंसर हास्पिटल व अपोलो हास्पिटल लखनऊ से इलाज चल रहा था। एक साल सैफई इटावा में आयुर्वेद का भी इलाज चला था। सीओ सिटी राजीव प्रताप सिंह ने बताया कि कैंसर पीड़ित होने की वजह से गोली मारकर खुदकुशी की है। तमंचा व खोखा कारतूस बरामद किया गया है। तमंचे की जांच की जा रही है। शव का पोस्टमार्टम कराया गया है।
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शहर कोतवाली के मवई बुजुर्ग गांव निवासी मनप्यारे लाल प्रजापति (44) ने बृहस्पतिवार को तड़के करीब सवा तीन बजे तमंचे से माथे पर गोली मारकर खुदकुशी कर ली। घटना के समय गांव में बिजली नहीं थी। गोली की आवाज सुनकर उसका छोटा भाई महेंद्र उठकर घर के बाहर आया तो मनप्यारे जमीन पर गिरे मिले। भाई ने मोबाइल के टार्च की रोशनी में देखा तो मृत पड़े थे। भाई ने परिजनों को जगाया और पुलिस को सूचना दी।
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सुबह कृषि विश्वविद्यालय चौकी इंचार्ज देवेंद्र कुमार और फील्ड यूनिट टीम पहुंची। फील्ड यूनिट ने घटनास्थल की जांच की। मृतक की शर्ट की जेब से सुसाइड नोट भी बरामद किया गया है। चौकी इंचार्ज के मुताबिक सुसाइड नोट में लिखा है कि वह असहनीय दर्द से परेशान है, अब दर्द नहीं सह सकता। वह खुद यह कदम उठा रहा है। मेरे मरने के बाद भाई मेरे बच्चों का ख्याल रखें।
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छोटे भाई महेंद्र ने बताया कि तीन साल से वह गाल के कैंसर से पीड़ित थे। उनका ग्वालियर कैंसर हास्पिटल व अपोलो हास्पिटल लखनऊ से इलाज चल रहा था। एक साल सैफई इटावा में आयुर्वेद का भी इलाज चला था। सीओ सिटी राजीव प्रताप सिंह ने बताया कि कैंसर पीड़ित होने की वजह से गोली मारकर खुदकुशी की है। तमंचा व खोखा कारतूस बरामद किया गया है। तमंचे की जांच की जा रही है। शव का पोस्टमार्टम कराया गया है।