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बाढ़ लाई अरबों की बालू
ब्यूरो, अमर उजाला, बांदा
Updated Fri, 26 Aug 2016 11:39 PM IST
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केनकिनारे पड़ी बालू।
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा। बाढ़ ने सरकारी और सार्वजनिक संपत्तियों को अरबों रुपये का नुकसान पहुंचाया लेकिन दूसरी तरफ कमाई का रास्ता भी साफ कर दिया। केन और यमुना नदियों में आई जबर्दस्त बाढ़ के साथ भारी मात्रा में बालू भी बहकर आई है। इससे बालू माफिया और बालू कारोबारियों के चेहरों पर रंगत आ गई है। अगले माह के बाद जोरशोर से खनन शुरू हो जाएगा।
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केन नदी की लाल बालू की मांग पूरे प्रदेश में है। पूरे साल केन और यमुना नदियों की बालू वैध और अवैध खनन से प्रदेश के विभिन्न शहरों में आपूर्ति की जाती है। खनिज विभाग हर साल नीलामी पर खदानों के पट्टे देता है। बुंदेलखंड के बांदा, हमीरपुर और चित्रकूट जिले लाल बालू के मुख्य अड्डे हैं। खदानों से प्रतिदिन एक हजार से भी ज्यादा ट्रक बालू प्रदेश के विभिन्न जिले को जाती है।
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खनिज विभाग रायल्टी के रूप में इन जिलों से लगभग 20 करोड़ रुपये से ज्यादा राजस्व हासिल करता है। पट्टा लेकर वैध और अवैध खनन कराने वाले बालू कारोबारी 10 गुना ज्यादा कमाई करते हैं। जेसीबी और पोकलैंड मशीनों से खनन के चलते नदी की तलहटी और खदानों में बालू नहीं रह गई थी।
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कई साल बाद अबकी केन और यमुना में आई जोरदार बाढ़ बालू की सौगात भी लाई है। बांदा, हमीरपुर, फतेहपुर, चित्रकूट आदि जिलों की सीमा में हजारों एकड़ में बालू का भंडार आ गया है। खदानें और तलहटी बालू से लबालब हो गई हैं।
फिलहाल 30 सितंबर तक बालू खनन पर रोक है। इसके बाद युद्धस्तर पर जोरशोर से खनन शुरू हो जाएगा। बाढ़ में बहकर आई बेशुमार बालू के भंडार देखकर बालू कारोबारियों के चेहरों पर मुस्कान आ गई है। अगले माह से नदी की खदानों तक पहुंचने के लिए ट्रकों के रास्ते बनवाना शुरू कर देंगे।