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पिछले वर्ष लगे टॉइल्स को तोड़कर लगा रहे नए
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एक वर्ष पूर्व ही लगाए गए 50 लाख रुपये की लागत के टॉइल्स को रेलवे प्रशासन तोड़कर फेंक रहा है। उनकी जगह दूसरे टॉइल्स लगाने पर लगभग 60 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। जबकि पिछले वर्ष के टॉइल्स अच्छी हालत में थे। पैसे की यह फिजूलखर्ची रेलवे के अधिकारी 20 जनवरी को यहां निरीक्षण पर आ रहे महाप्रबंधक (प्रयागराज) की अगुवानी में कर रहे हैं।
यहां रेलवे स्टेशन के सुंदरीकरण में डेढ़ करोड़ रुपये पिछले वर्ष खर्च किए गए हैं। इसमें 50 लाख रुपये में प्लेटफार्म, शौचालय, हैंडपोस्ट (नल) के प्लेटफार्म पर खर्च हुए थे। अभी यह सब बेहतर हालत में थे। फिर भी अब रेलवे प्रशासन प्लेटफार्म नंबर-एक व दो पर टॉइल्सों को तुड़वाकर नए लगवा रहा है। यह काम इन दिनों तेजी से चल रहा है।
इसी तरह सर्कुलेटिंग एरिया में शौचालय व दिव्यांगों के लिए बनाई गई दीवार को भी तोड़ा जा रहा है। साइकिल स्टैंड में सही सलामत खड़ंजे को हटाकर नए खड़ंजे बिछाए जा रहे हैं। पिछले जून में डीआरएम के निर्देश पर प्लेटफार्म-एक के सर्कुलेटिंग एरिया में आरसीसी फर्श बना था। अब इसे भी तोड़कर बनाया जा रहा है।
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उधर, इस बाबत डीआरएम के जन संपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह का कहना है कि अगर दुरुपयोग हो रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। रेलवे का पैसा जनता का है। इसके दुरुपयोग की इजाजत किसी को नहीं है।
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यहां रेलवे स्टेशन के सुंदरीकरण में डेढ़ करोड़ रुपये पिछले वर्ष खर्च किए गए हैं। इसमें 50 लाख रुपये में प्लेटफार्म, शौचालय, हैंडपोस्ट (नल) के प्लेटफार्म पर खर्च हुए थे। अभी यह सब बेहतर हालत में थे। फिर भी अब रेलवे प्रशासन प्लेटफार्म नंबर-एक व दो पर टॉइल्सों को तुड़वाकर नए लगवा रहा है। यह काम इन दिनों तेजी से चल रहा है।
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इसी तरह सर्कुलेटिंग एरिया में शौचालय व दिव्यांगों के लिए बनाई गई दीवार को भी तोड़ा जा रहा है। साइकिल स्टैंड में सही सलामत खड़ंजे को हटाकर नए खड़ंजे बिछाए जा रहे हैं। पिछले जून में डीआरएम के निर्देश पर प्लेटफार्म-एक के सर्कुलेटिंग एरिया में आरसीसी फर्श बना था। अब इसे भी तोड़कर बनाया जा रहा है।
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उधर, इस बाबत डीआरएम के जन संपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह का कहना है कि अगर दुरुपयोग हो रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। रेलवे का पैसा जनता का है। इसके दुरुपयोग की इजाजत किसी को नहीं है।