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सूखे के लिए आईं टंकियां बनीं कबाड़

Mon, 11 Jul 2016 11:17 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा Updated Mon, 11 Jul 2016 11:17 PM IST
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Became junk tanks were dry
पानी की टंकियां जल निगम कार्यालय परिसर में कबाड़ बनी। - फोटो : अमर उजाला

बांदा। भीषण सूखे में पेयजल संकट से निपटने के लिए ग्राम पंचायतों में सोलर ड्यूल पंप लगाने की योजना चित्रकूटधाम मंडल में परवान नहीं चढ़ सकी। लाखों रुपये की सैकड़ों टंकियां जल निगम के स्टोर परिसर में कबाड़ बनीं पड़ी हैं। मंडल में 120 ड्यूल पंप लगाने के लिए शासन ने जल निगम को मई माह में बजट दिया था। अभी तक 50 फीसदी भी ड्यूल पंप चालू नहीं हो सके। करीब 7.20 करोड़ रुपये जल निगम में दो माह से डंप हैं।

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शासन ने मई में सोलर ड्यूल पंपों के लिए चारों जिलों को सात करोड़ 20 लाख रुपये बजट जारी किया था। बांदा जिले में 65 ड्यूल पंपों के लिए 3.90 करोड़, हमीरपुर में 20 सोलर ड्यूल पंपों के लिए 1.20 करोड़, महोबा में 25 ड्यूल पंपों के लिए डेढ़ करोड़ रुपये और चित्रकूट जिलों में 10 ड्यूलपंपों के लिए 60 लाख रुपये जल निगम को मिले। बांदा में 58 ग्राम पंचायतों में 65 ड्यूल पंप लगाने का लक्ष्य था लेकिन अभी तक सिर्फ 43 ही लगाए गए हैं।
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हमीरपुर में आठ, महोबा में 11 और चित्रकूट में पांच ड्यूल पंप लगाए गए हैं। इन ड्यूल पंपों में सोलर पैनल लगाकर 5-5 हजार लीटर की दो टंकियां भरने की योजना थी। टंकियों को ऊंचाई पर स्टैंड पोस्ट में रखकर पानी की आपूर्ति की जानी थी। जल निगम की यांत्रिक शाखा को ड्यूल पंप लगाने का जिम्मा सौंपा गया है। योजना के लिए धनराशि उपलब्ध होने के बावजूद दो माह में 50 फीसदी ड्यूल पंप नहीं लग सके। सूखा राहत के तहत ड्यूल पंपों के लिए खरीदी गईं सैकड़ों टंकियां जल निगम के स्टोर में खुले में पड़े सड़ रही हैं। कई टंकियां क्षतिग्रस्त हो गई हैं। एक टंकी स्टोर के बाथरूम में ही लगा दी गई है।
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सोलर ड्यूल पंप का अभी पूरा बजट नहीं आया है। मंडल में 120 ड्यूलपंपों में करीब 43 बनकर तैयार हैं और उनसें पेयजल सप्लाई भी शुरू है। करीब 10 में काम चल रहा है। बारिश ज्यादा होने से बोरिंग आदि में दिक्कतें आ रही हैं। इन्हें जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। महीने भर में अन्य ड्यूल पंपों में भी पेयजल आपूर्ति शुरू हो जाएगी।
-ओपी पांडेय, अधीक्षण अभियंता, जल निगम (निर्माण मंडल), चित्रकूटधाम मंडल, बांदा।

हैंडओवर नहीं हुईं करोड़ों की परियोजनाएं
बांदा। बुंदेलखंड पैकेज से ग्रामीण पाइप्ड जल योजना के तहत करीब 3-3 करोड़ रुपये लागत से बनी पेयजल परियोजनाएं टेस्टिंग के बावजूद जल संस्थान और ग्राम पंचायतों को हैंडओवर नहीं हो सकीं। वर्ष 2012-13 में चटगन, हरदौली, बीरा, बबेरू, अतर्रा ग्रामीण के लिए पेयजल परियोजना स्वीकृत हुई थीं।


तीन साल में जैसे-तैसे ये परियोजनाएं पूरी तो हो गईं, पर जल निगम ने अभी तक इन्हें ग्राम पंचायतों को हैंडओवर नहीं किया। अधिकारियों का कहना है कि हैंडओवर की प्रक्रिया चल रही है। इसी प्रक्रिया में पूरी गर्मी निकल गई और अब बारिश का समय आ गया। सूत्रों के मुताबिक तैयार हुई इन पेयजल परियोजनाओं में कुछ खामियां रह गई हैं। जबकि बजट पूरा खर्च हो गया है। ऐसे में ग्राम पंचायतें व जल संस्थान इन्हें हैंडओवर नहीं ले रहा है।

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