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बांदा में गोल मारने को तरस गए थे मेजर ध्यानचंद्र
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
Updated Sun, 28 Aug 2016 11:38 PM IST
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मेजर ध्यानचंद्र से बांदा में हाथ मिलाकर उनका अभिवादन करते पूर्व खिलाड़ी सैय्यद मोहम्मद इलियास मगरबी (फाइल फोटो)।
- फोटो : अमर उजाला
बांदा। हाकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद्र भी बांदा के हाकी खिलाड़ियों के कायल हो गए थे। यहां के हाकी खिलाड़ियों ने उनकी ऐसी घेराबंदी की कि पूरे 70 मिनट के खेल में वह गोल मारने को तरस गए। मेजर के साथ मैच खेल चुके यहां के बुजुर्ग हाकी खिलाड़ी सैय्यद मोहम्मद इलियास मगरबी बताते हैं कि वर्ष 1956 में मेजर नवाब मेमोरियल हाकी टूर्नामेंट में झांसी टीम में खिलाड़ी के रूप में पहली बार बांदा आए। यहां राइफल क्लब ग्राउंड में उनकी टीम का मुकाबला बांदा की हाकी टीम से हुआ। श्री मगरबी बताते हैं कि उन दिनों बांदा की टीम भी लोहा मनवाए थी।
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बांदा के खिलाड़ी मन्नान, याकूब और कतील बांदवी ने फील्ड में ऐसी घेराबंदी की थी कि मेजर ध्यानचंद्र एक अदद गोल मारना तो दूर गेंद के साथ ‘डी’ के पास पहुंचने को तरस गए। खेल बिना हार-जीत के खत्म (ड्रा) हो गया। मेजर ने बांदा के खिलाड़ियों की पीठ थपथपाई थी। श्री मगरबी ने बताया कि मेजर ध्यानचंद्र 1967 में दूसरी बार नवाब मेमोरियल हाकी टूर्नामेंट में आए लेकिन मैच के मुख्य अतिथि बनकर। उनके साथ पूर्व ओलंपिक खिलाड़ी और छोटे भाई रूप सिंह भी साथ आए थे। बांदा और यहां के लोगों के प्रति ध्यानचंद्र का विशेष लगाव था। बांदा खिलाड़ी जफर, कमतू पांडेय और राही बाबू उनके खास मित्रों में थे। श्री मगरबी बताते हैं कि पूर्व ओलंपियन और उनके पुत्र अशोक कुमार की शादी का निमंत्रण पत्र भेज कर उन्होंने उपरोक्त खास मित्रों को शादी में विशेष रूप से आमंत्रित किया था।
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