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कथक नृत्य में बांदा की बेटी ने पीटा शोहरत का डंका
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कथक नृत्य मुद्रा में सनोवर निगम।
- फोटो : BANDA
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बांदा। बुंदेलखंड की बेटी ने कथक नृत्य में विदेशों में भी धाक जमाई। प्रतियोगिता में शामिल कई देशों की प्रतिभागियों को पछाड़कर सीनियर ग्रुप में उसने पहला स्थान हासिल किया। इससे परिवार में जश्न जैसा माहौल है।
बांदा शहर की सनोवर निगम ने 4 नवंबर को इंडियन आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी द्वारा बैंकाक (थाइलैंड) में आयोजित इंटरनेशनल कल्चरल कॉन्क्लेव में सीनियर ग्रुप सेमीक्लासिकल में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इस कंप्टीशन में थाईलैंड, मलेशिया और ताइवान समेत कई देशों की प्रतिभागी शामिल थीं। कथक के सुप्रसिद्ध गुरु बिरजू महराज की नातिन सुश्री शिरंजनी कुलकर्णी ने सनोवर को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया।
इसके पूर्व इसी वर्ष 29 अप्रैल को सनोवर ने पणजी (गोवा) में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। सनोवर को कथक नृत्य में इस मुकाम तक पहुंचाने में उसकी मां श्रद्धा निगम का खास योगदान है। सनोवर इस समय गलगोटिया कालेज आफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रानिक में बीटेक कर रही है।
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सनोवर ने हाईस्कूल बांदा के सेंट मेरी स्कूल से पास किया। मां श्रद्धा बताती हैं कि वे अपने घर में कथक नृत्य की कक्षाएं चलातीं थीं। सनोवर को बचपन से ही नृत्य का शौक था। 6 वर्ष की उम्र में ही उसने कालिंजर महोत्सव, लखनऊ, जबलपुर, चित्रकूट, झांसी आदि में आकर्षक प्रदर्शन किया। मौजूदा समय में भी वह बीटेक के साथ कथक में प्रवीण एवं वेस्टर्न नृत्य की शिक्षा ग्रहण कर रही है।
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बांदा शहर की सनोवर निगम ने 4 नवंबर को इंडियन आर्ट एंड कल्चर सोसाइटी द्वारा बैंकाक (थाइलैंड) में आयोजित इंटरनेशनल कल्चरल कॉन्क्लेव में सीनियर ग्रुप सेमीक्लासिकल में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इस कंप्टीशन में थाईलैंड, मलेशिया और ताइवान समेत कई देशों की प्रतिभागी शामिल थीं। कथक के सुप्रसिद्ध गुरु बिरजू महराज की नातिन सुश्री शिरंजनी कुलकर्णी ने सनोवर को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया।
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इसके पूर्व इसी वर्ष 29 अप्रैल को सनोवर ने पणजी (गोवा) में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। सनोवर को कथक नृत्य में इस मुकाम तक पहुंचाने में उसकी मां श्रद्धा निगम का खास योगदान है। सनोवर इस समय गलगोटिया कालेज आफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रानिक में बीटेक कर रही है।
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सनोवर ने हाईस्कूल बांदा के सेंट मेरी स्कूल से पास किया। मां श्रद्धा बताती हैं कि वे अपने घर में कथक नृत्य की कक्षाएं चलातीं थीं। सनोवर को बचपन से ही नृत्य का शौक था। 6 वर्ष की उम्र में ही उसने कालिंजर महोत्सव, लखनऊ, जबलपुर, चित्रकूट, झांसी आदि में आकर्षक प्रदर्शन किया। मौजूदा समय में भी वह बीटेक के साथ कथक में प्रवीण एवं वेस्टर्न नृत्य की शिक्षा ग्रहण कर रही है।