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बांदा: सरकारी अस्पतालों ने अग्निशमन विभाग से नहीं लिया एनओसी, जिला महिला और पुरुष अस्पतालों को मुख्य शमन अधिकारी ने दोबारा जारी किया नोटिस
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जिला अस्पताल का मुख्य द्वार।
- फोटो : BANDA
बांदा। जिला पुरुष और महिला अस्पताल के साथ ही अन्य आठ सीएचसी में आग से निपटने के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। हैरत की बात यह है कि दोनों अस्पतालों और आठ सीएचसी के पास अग्निशमन विभाग की एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) नहीं है। जबलपुर जैसी घटना न हो, वरना खामियाजा निर्दोष बच्चों, मरीजों को भुगतना पड़ेगा।
अस्पताल प्रशासन आग से निपटने के लिए सीज फायर सिलिंडर का दम भर रहा है। लेकिन यह भी भरोसा नहीं है कि मौका पड़ने पर ये चल पाएं या इन्हें स्वास्थ्य कर्मी चला पाएं। ट्रेनिंग भी नहीं दी गई। उधर, सीएमओ के यहां जिले में लगभग 33 नर्सिंग होम एवं क्लीनिक पंजीकृत हैं। अग्निशमन विभाग के मुताबिक प्राइवेट नर्सिंग होम के पास एनओसी है।
जिला अस्पताल : क्षमता 100 बेड की है। महिला व पुरुष वार्ड में 24-24 बेड हैं। इसी तरह इमरजेंसी में 16, बर्न में 11, स्वाइन फ्लू व चिल्ड्रेन वार्ड में 6-6 बेड हैं। प्राइवेट वार्ड अलग हैं। महिला, पुरुष, इमरजेंसी व बर्न वार्ड में मात्र एक सीज फायर सिलिंडर है। इनकी एक्सपायरी जून 2023 दर्ज है। चिल्ड्रेन व स्वाइन फ्लू वार्ड में कोई सिलिंडर नहीं लगा। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक पूरे परिसर में लगभग 12 सीज फायर सिलिंडर लगे हैं। इसी वर्ष इनकी रिफिलिंग हुई है।
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जिला महिला अस्पताल : क्षमता 50 बेड की है। यहां एक प्रवेश द्वार है। यहीं पर संचालित एसएनसीयू (सिक न्यू बार्न केयर यूनिट) में 12 वार्मर बेड और तीन फोटो थेरेपी मशीन है। सभी में नवजात भर्ती हैं। यहां आवागमन का एक ही संकरा द्वार है। मात्र एक सीज फायर सिलिंडर लगा है।
एनओसी के लिए सीएमएस को भेजा नोटिस
फायर ब्रिगेड विभाग के मुख्य अग्निशमन अधिकारी अनूप कुमार सिंह ने बताया कि जिला पुरुष और महिला अस्पताल सीएमएस को एनओसी के लिए नोटिस भेजा गया है। दो माह पूर्व भी एनओसी हासिल करने के लिए नोटिस दिया गया था। लेकिन दोनों अस्पतालों के सीएमएस ने अभी तक कोई आवेदन नहीं किया।
भूतल में अस्पताल, जनहानि का खतरा कम
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसएन मिश्र ने बताया कि अस्पताल भूतल में स्थित है। पांच द्वार हैं। हर वार्ड में 2 से 3 दरवाजे हैं। ऐसे में यहां आग से जनहानि का खतरा कम है। एनओसी के सवाल पर कहा कि व्यवस्थाओं के लिए बजट नहीं है। अधिकारियों को जानकारी दी गई है। महिला अस्पताल सीएमएस डॉ. सुनीता सिंह ने बताया कि एनओसी के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। उनके अस्पताल में तीन द्वार हैं। फिलहाल आग से निपटने के पर्याप्त इंतजाम हैं।
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अस्पताल प्रशासन आग से निपटने के लिए सीज फायर सिलिंडर का दम भर रहा है। लेकिन यह भी भरोसा नहीं है कि मौका पड़ने पर ये चल पाएं या इन्हें स्वास्थ्य कर्मी चला पाएं। ट्रेनिंग भी नहीं दी गई। उधर, सीएमओ के यहां जिले में लगभग 33 नर्सिंग होम एवं क्लीनिक पंजीकृत हैं। अग्निशमन विभाग के मुताबिक प्राइवेट नर्सिंग होम के पास एनओसी है।
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जिला अस्पताल : क्षमता 100 बेड की है। महिला व पुरुष वार्ड में 24-24 बेड हैं। इसी तरह इमरजेंसी में 16, बर्न में 11, स्वाइन फ्लू व चिल्ड्रेन वार्ड में 6-6 बेड हैं। प्राइवेट वार्ड अलग हैं। महिला, पुरुष, इमरजेंसी व बर्न वार्ड में मात्र एक सीज फायर सिलिंडर है। इनकी एक्सपायरी जून 2023 दर्ज है। चिल्ड्रेन व स्वाइन फ्लू वार्ड में कोई सिलिंडर नहीं लगा। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक पूरे परिसर में लगभग 12 सीज फायर सिलिंडर लगे हैं। इसी वर्ष इनकी रिफिलिंग हुई है।
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जिला महिला अस्पताल : क्षमता 50 बेड की है। यहां एक प्रवेश द्वार है। यहीं पर संचालित एसएनसीयू (सिक न्यू बार्न केयर यूनिट) में 12 वार्मर बेड और तीन फोटो थेरेपी मशीन है। सभी में नवजात भर्ती हैं। यहां आवागमन का एक ही संकरा द्वार है। मात्र एक सीज फायर सिलिंडर लगा है।
एनओसी के लिए सीएमएस को भेजा नोटिस
फायर ब्रिगेड विभाग के मुख्य अग्निशमन अधिकारी अनूप कुमार सिंह ने बताया कि जिला पुरुष और महिला अस्पताल सीएमएस को एनओसी के लिए नोटिस भेजा गया है। दो माह पूर्व भी एनओसी हासिल करने के लिए नोटिस दिया गया था। लेकिन दोनों अस्पतालों के सीएमएस ने अभी तक कोई आवेदन नहीं किया।
भूतल में अस्पताल, जनहानि का खतरा कम
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसएन मिश्र ने बताया कि अस्पताल भूतल में स्थित है। पांच द्वार हैं। हर वार्ड में 2 से 3 दरवाजे हैं। ऐसे में यहां आग से जनहानि का खतरा कम है। एनओसी के सवाल पर कहा कि व्यवस्थाओं के लिए बजट नहीं है। अधिकारियों को जानकारी दी गई है। महिला अस्पताल सीएमएस डॉ. सुनीता सिंह ने बताया कि एनओसी के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। उनके अस्पताल में तीन द्वार हैं। फिलहाल आग से निपटने के पर्याप्त इंतजाम हैं।