{"_id":"637a69e4ba57d4262f60498a","slug":"banda-central-government-objected-to-the-construction-on-the-land-of-forest-department-banda-news-knp7293539182","type":"story","status":"publish","title_hn":"वन विभाग की जमीन पर निर्माण से केंद्र सरकार को आपत्ति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वन विभाग की जमीन पर निर्माण से केंद्र सरकार को आपत्ति
विज्ञापन
खटान पेयजल परियोजना।
- फोटो : BANDA
बांदा। खटान पेयजल परियोजना में वन विभाग की लगभग 10 हेक्टेयर भूमि लेने पर केंद्र सरकार ने आपत्ति दर्ज कराई है। वन विभाग ने जल निगम को आपत्ति नोटिस भेजा है। साथ ही जल्द निस्तारण करने के लिए कहा है। हालांकि प्रदेश और केंद्र में भाजपा की सरकार होने से इसके निपटारे में लेटलतीफी नहीं हो सकेगी।
जल जीवन मिशन के तहत खटान पेयजल परियोजना का काम चल रहा है। लगभग 95 फीसदी काम पूरा हो गया है। परियोजना में करीब 9.95 हेक्टेयर वन विभाग की जमीन भी शामिल कर निर्माण करा दिया गया है। अब इस पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। वन विभाग द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि वन भूमि का गलत प्रस्ताव भेजने के कारण केंद्र सरकार ने नाराजगी जताई है। गड़बड़ियों का शीघ्र निराकरण करने के लिए जलनिगम अधिशासी अभियंता को वन विभाग ने पत्र भेजा है।
प्रभागीय वनाधिकारी संजय अग्रवाल ने बताया कि वन विभाग की अनुमति के बगैर जमीन पर परियोजना संबंधी काम कराने पर केंद्र सरकार ने आपत्ति दर्ज कराई है। निराकरण के संबंध में कई बार पत्र भेजा गया है, लेकिन रुचि न लेने से मसला हल नहीं हो रहा है। पुन: कार्यदाई संस्था को जल्द निराकरण के लिए लिखा गया है। वह और जल निगम अधिकारियों की बैठक के बाद जल्द जमीन का समाधान किया जाएगा।
विज्ञापन
खटान पेयजल परियोजना की कुल लागत 12 अरब 84 करोड़ रुपये है। कार्यदाई संस्था जल निगम अभियंता का दावा है कि इसी माह नवंबर के अंत तक परियोजना पूरी हो जाएगी। इसके तहत 374 गांवों की करीब 10 लाख आबादी को नल के जरिये पानी मिलेगा। अधिशासी अभियंता वकार हुसैन ने बताया कि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूडीपी) का लगभग 95 काम पूरा हो गया है। इसी तरह इंटेकवेल का निर्माण 98 फीसदी पूरा हो गया है।
खटान पेयजल बड़ी परियोजना है। कुछ न कुछ आपत्तियां आती रहती हैं और उनका निराकरण होता रहता है। जो भी आपत्ति दर्ज कराई गई है, उसका भी शीघ्र संबंधित विभाग से समन्वय स्थापित कर समाधान कर लिया जाएगा।
- वकार हुसैन, अधिशासी अभियंता, जल निगम, बांदा।
वन विभाग की कुछ जमीन परियोजना में शामिल कर ली गई। इस पर केंद्र सरकार ने आपत्ति दर्ज कराते हुए नाराजगी जताई है। कार्यदाई संस्था के अधिकारियों को अवगत कराया गया है। परियोजना सीधे आम नागरिक से जुड़ी है, इसलिए जल्द दोनों विभाग मिलकर निराकरण करेंगे। -संजय अग्रवाल, प्रभागीय वनाधिकारी, बांदा।
पंकज शर्मा
विज्ञापन
जल जीवन मिशन के तहत खटान पेयजल परियोजना का काम चल रहा है। लगभग 95 फीसदी काम पूरा हो गया है। परियोजना में करीब 9.95 हेक्टेयर वन विभाग की जमीन भी शामिल कर निर्माण करा दिया गया है। अब इस पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। वन विभाग द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि वन भूमि का गलत प्रस्ताव भेजने के कारण केंद्र सरकार ने नाराजगी जताई है। गड़बड़ियों का शीघ्र निराकरण करने के लिए जलनिगम अधिशासी अभियंता को वन विभाग ने पत्र भेजा है।
विज्ञापन
प्रभागीय वनाधिकारी संजय अग्रवाल ने बताया कि वन विभाग की अनुमति के बगैर जमीन पर परियोजना संबंधी काम कराने पर केंद्र सरकार ने आपत्ति दर्ज कराई है। निराकरण के संबंध में कई बार पत्र भेजा गया है, लेकिन रुचि न लेने से मसला हल नहीं हो रहा है। पुन: कार्यदाई संस्था को जल्द निराकरण के लिए लिखा गया है। वह और जल निगम अधिकारियों की बैठक के बाद जल्द जमीन का समाधान किया जाएगा।
विज्ञापन
खटान पेयजल परियोजना की कुल लागत 12 अरब 84 करोड़ रुपये है। कार्यदाई संस्था जल निगम अभियंता का दावा है कि इसी माह नवंबर के अंत तक परियोजना पूरी हो जाएगी। इसके तहत 374 गांवों की करीब 10 लाख आबादी को नल के जरिये पानी मिलेगा। अधिशासी अभियंता वकार हुसैन ने बताया कि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूडीपी) का लगभग 95 काम पूरा हो गया है। इसी तरह इंटेकवेल का निर्माण 98 फीसदी पूरा हो गया है।
खटान पेयजल बड़ी परियोजना है। कुछ न कुछ आपत्तियां आती रहती हैं और उनका निराकरण होता रहता है। जो भी आपत्ति दर्ज कराई गई है, उसका भी शीघ्र संबंधित विभाग से समन्वय स्थापित कर समाधान कर लिया जाएगा।
- वकार हुसैन, अधिशासी अभियंता, जल निगम, बांदा।
वन विभाग की कुछ जमीन परियोजना में शामिल कर ली गई। इस पर केंद्र सरकार ने आपत्ति दर्ज कराते हुए नाराजगी जताई है। कार्यदाई संस्था के अधिकारियों को अवगत कराया गया है। परियोजना सीधे आम नागरिक से जुड़ी है, इसलिए जल्द दोनों विभाग मिलकर निराकरण करेंगे। -संजय अग्रवाल, प्रभागीय वनाधिकारी, बांदा।
पंकज शर्मा