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Banda News: 19 चिकित्सकों की जरूरत, नहीं शुरू हुआ मंडलीय अस्पताल
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जिला अस्पताल परिसर में बना नव निर्मित मंडलीय चिकित्सालय भवन।
- फोटो : BANDA
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल मुख्यालय में बना 200 बेड का मंडलीय चिकित्सालय मानव संसाधन (मैनपॉवर) की कमी से अब तक शुरू नहीं हो सका। स्थानीय और महानिदेशक स्तर से भेजे गए प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित है। अस्पताल के संचालन को लगभग 19 चिकित्साधिकारियों की जरूरत है।
मंडलीय चिकित्सालय का निर्माण वर्ष 2011 में शुरू हुआ था। इसकी स्वीकृति बसपा सरकार में मिली थी। 67,55,65000 लागत वाला यह चिकित्सालय लगभग 11 साल में बन सका। कार्यदाई संस्था राजकीय निर्माण निगम अभियंताओं के मुताबिक इसी वर्ष मार्च में अस्पताल प्रशासन को भवन हैंडओवर कर दिया गया है। मामूली खामियां हैं, उसे भी दूर किया जा रहा है। भवन हैंडओवर हुए आठ माह बीत गए, लेकिन मंडलीय चिकित्सालय का संचालन शुरू नहीं हो सका। इसकी वजह मैन पॉवर की कमी बताई जा रही है।
जिला अस्पताल सीएमएस डॉ. एसएन मिश्र ने बताया कि मंडलीय चिकित्सालय शुरू करने के लिए 19 चिकित्साधिकारियों, 90 पैरा मेडिकल स्टाफ और 32 सेवा प्रदाता कर्मियों की जरूरत है। ये पूरा स्टाफ अलग नियुक्त किया जाना है। दो माह पूर्व इसका प्रस्ताव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशक (लखनऊ) को भेजा जा चुका है। महानिदेशक स्तर से भी नियुक्ति संबंधी प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया, लेकिन अब तक नियुक्ति की मंजूरी नहीं मिली।
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सीएमएस डॉ. एसएन मिश्र ने बताया कि नवनिर्मित मंडलीय अस्पताल में मौजूदा में डेंगू वार्ड बनाया गया है। 50 बेड के डेंगू वार्ड में 15 मरीज भर्ती हैं। इसके अलावा तीसरी मंजिल में बने वार्ड में खिड़कियां नहीं हैं। बगैर एसी (एअर कंडीशन) के मरीजों की हालत खराब हो जाएगी। पर्याप्त पानी के इंतजाम के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
ट्रांसफार्मर व जनरेटर है, लेकिन कनेक्शन नहीं हुए। औषधि वितरण व पर्चा काउंटर में रेलिंग नहीं लगी। निरीक्षण में मिली इन्हीं खामियों के चलते आपत्ति दर्ज कराई गई है। कार्यदाई संस्था ने शीघ्र व्यवस्थाएं कराने का आश्वासन दिया है। जब तक व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं होंगी, अस्पताल का संचालन संभव नहीं होगा।
मंडलीय चिकित्सालय का काम 100 फीसदी पूरा हो चुका है। मार्च में भवन को अस्पताल प्रशासन के सुपुर्द कर दिया गया है। थोड़ी-बहुत कमियां हैं, उसे ठीक कराया जा रहा है। सीएमएस की ओर से बताई गई समस्याओं पर भी काम कराया जा रहा है। औषधि वितरण व पर्चा काउंटर में महिला-पुरुष की अलग-अलग लाइन के लिए रेलिंग लगा दी गई हैं। वार्ड में एसी लगाए जा रहे हैं। -रुपेश कुमार, अवर अभियंता
राजकीय निर्माण निगम, बांदा।
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मंडलीय चिकित्सालय का निर्माण वर्ष 2011 में शुरू हुआ था। इसकी स्वीकृति बसपा सरकार में मिली थी। 67,55,65000 लागत वाला यह चिकित्सालय लगभग 11 साल में बन सका। कार्यदाई संस्था राजकीय निर्माण निगम अभियंताओं के मुताबिक इसी वर्ष मार्च में अस्पताल प्रशासन को भवन हैंडओवर कर दिया गया है। मामूली खामियां हैं, उसे भी दूर किया जा रहा है। भवन हैंडओवर हुए आठ माह बीत गए, लेकिन मंडलीय चिकित्सालय का संचालन शुरू नहीं हो सका। इसकी वजह मैन पॉवर की कमी बताई जा रही है।
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जिला अस्पताल सीएमएस डॉ. एसएन मिश्र ने बताया कि मंडलीय चिकित्सालय शुरू करने के लिए 19 चिकित्साधिकारियों, 90 पैरा मेडिकल स्टाफ और 32 सेवा प्रदाता कर्मियों की जरूरत है। ये पूरा स्टाफ अलग नियुक्त किया जाना है। दो माह पूर्व इसका प्रस्ताव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशक (लखनऊ) को भेजा जा चुका है। महानिदेशक स्तर से भी नियुक्ति संबंधी प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया, लेकिन अब तक नियुक्ति की मंजूरी नहीं मिली।
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सीएमएस डॉ. एसएन मिश्र ने बताया कि नवनिर्मित मंडलीय अस्पताल में मौजूदा में डेंगू वार्ड बनाया गया है। 50 बेड के डेंगू वार्ड में 15 मरीज भर्ती हैं। इसके अलावा तीसरी मंजिल में बने वार्ड में खिड़कियां नहीं हैं। बगैर एसी (एअर कंडीशन) के मरीजों की हालत खराब हो जाएगी। पर्याप्त पानी के इंतजाम के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
ट्रांसफार्मर व जनरेटर है, लेकिन कनेक्शन नहीं हुए। औषधि वितरण व पर्चा काउंटर में रेलिंग नहीं लगी। निरीक्षण में मिली इन्हीं खामियों के चलते आपत्ति दर्ज कराई गई है। कार्यदाई संस्था ने शीघ्र व्यवस्थाएं कराने का आश्वासन दिया है। जब तक व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं होंगी, अस्पताल का संचालन संभव नहीं होगा।
मंडलीय चिकित्सालय का काम 100 फीसदी पूरा हो चुका है। मार्च में भवन को अस्पताल प्रशासन के सुपुर्द कर दिया गया है। थोड़ी-बहुत कमियां हैं, उसे ठीक कराया जा रहा है। सीएमएस की ओर से बताई गई समस्याओं पर भी काम कराया जा रहा है। औषधि वितरण व पर्चा काउंटर में महिला-पुरुष की अलग-अलग लाइन के लिए रेलिंग लगा दी गई हैं। वार्ड में एसी लगाए जा रहे हैं। -रुपेश कुमार, अवर अभियंता
राजकीय निर्माण निगम, बांदा।