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मूकबधिर से दुष्कर्म के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज
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बांदा। सरेशाम जबरन सूने खेत में ले जाकर मूकबधिर (गूंगा) दिव्यांग युवक के साथ दुष्कर्म के आरोपी की जमानत अर्जी अदालत ने खारिज कर दी। दुष्कर्म की पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट में भी हुई है। आरोपी छह माह से जेल में है।
घटना शहर कोतवाली क्षेत्र के बोधा पुरवा की है। यहां 20 वर्षीय मंद बुद्धि और मूकबधिर युवक को 29 दिसंबर 2019 की शाम करीब 7 बजे घर के बाहर गांव में था। इसी बीच उसे 25 वर्षीय देवदास उर्फ करिया कुशवाहा जबरन खींचकर गांव के बाहर सुनसान खेत में ले गया और मारपीट करते हुए डरा-धमकाकर उसके साथ दुष्कर्म किया।
मूकबधिर को छोड़कर भाग निकला। पीड़ित युवक की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 377, 323, 506 आईपीसी की रिपोर्ट दर्ज की और युवक का डाक्टरी परीक्षण कराया। मेडिकल रिपोर्ट में भी युवक के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई। पुलिस ने आरोपी देवदास को घटना के तीसरे दिन 31 दिसंबर को गिरफ्तार कर लिया। तब से वह जेल में है।
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आरोपी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत में जमानत अर्जी डाली। शनिवार को जनपद न्यायाधीश की अदालत में इस पर सुनवाई हुई। अभियोजन और बचाव पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस और दलीलों तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जिला जज राधेश्याम यादव ने घटना को गंभीर प्रकृति का अपराध मानते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी। अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता उमाशंकर पाल ने पैरवी की।
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घटना शहर कोतवाली क्षेत्र के बोधा पुरवा की है। यहां 20 वर्षीय मंद बुद्धि और मूकबधिर युवक को 29 दिसंबर 2019 की शाम करीब 7 बजे घर के बाहर गांव में था। इसी बीच उसे 25 वर्षीय देवदास उर्फ करिया कुशवाहा जबरन खींचकर गांव के बाहर सुनसान खेत में ले गया और मारपीट करते हुए डरा-धमकाकर उसके साथ दुष्कर्म किया।
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मूकबधिर को छोड़कर भाग निकला। पीड़ित युवक की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 377, 323, 506 आईपीसी की रिपोर्ट दर्ज की और युवक का डाक्टरी परीक्षण कराया। मेडिकल रिपोर्ट में भी युवक के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई। पुलिस ने आरोपी देवदास को घटना के तीसरे दिन 31 दिसंबर को गिरफ्तार कर लिया। तब से वह जेल में है।
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आरोपी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत में जमानत अर्जी डाली। शनिवार को जनपद न्यायाधीश की अदालत में इस पर सुनवाई हुई। अभियोजन और बचाव पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस और दलीलों तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जिला जज राधेश्याम यादव ने घटना को गंभीर प्रकृति का अपराध मानते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी। अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता उमाशंकर पाल ने पैरवी की।