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विकलांग किसान ने बहाई बंजर भूमि में गंगा
इमरान अली
Updated Sun, 01 May 2016 10:49 PM IST
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किसानों को दिया जा रहा है पानी।
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा। ‘मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनमें जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है’। यह सच कर दिखाया है बेहद पिछड़े क्षेत्र के स्नातक और विकलांग किसान श्रीकांत मिश्र ने। बंजर भूमि में हरियाली ला दी है। साथ ही पड़ोसी गांवों के खेतों को भी हरा-भरा बना रहे हैं। अपनी निजी बोरिंग से मुफ्त पानी देकर श्रीकांत इस क्षेत्र के ‘जल पुरुष’ रूप में शोहरत पा रहे हैं।
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सूखे से जूझ रहे बुंदेलखंड में उम्मीद की मशाल पैलानी तहसील के अमारा गांव में जली है। लगभग 30 वर्षीय श्रीकांत मिश्र वर्ष 2006 में सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए। तब से उनका आधा जिस्म अपंग हो गया। उधर, उनके क्षेत्र में सिंचाई के कोई साधन नहीं हैं। ज्यादातर खेत बंजर हैं। श्रीकांत ने जमा पूंजी से अपने खेत में बोरिंग कराई। हालांकि बोरिंग यहां किसी जुआ ने कम नहीं है। ज्यादातर बोरिंग फेल हो जाती हैं लेकिन श्रीकांत की किस्मत ने साथ दिया।
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बोरिंग सफल हो गई। वह अपने 15 बीघा खेत में हर फसल उगाने के साथ ही बागवानी भी कर रहे हैं। सूखे में इस क्षेत्र के खेतों में किसानों ने बुआई की हिम्मत नहीं जुटाई। इस पर श्रीकांत ने अपने खेतों की सीमा से जुड़े पड़ोहरा और मड़ौली गांवों के खेतों को भी पानी देने की ठान ली। अपनी पूंजी से पाइप खरीदकर दूर-दूर तक खेतों में मुफ्त पानी पहुंचा रहे हैं। उन्हें इस काम में उनके मित्र विनोद सिंह (अमारा) और पंकज सिंह (मड़ौली) ने काफी साथ दिया। अपने खेत में पैदा हो रही सब्जी मेें भी श्रीकांत गांव के गरीबों का हिस्सा लगाते हैं। उन्हें मुफ्त सब्जी बांटते हैं।
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