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भूख प्यास से तड़पकर दम तोड़ रहे बेजुबान

Sat, 23 Apr 2016 10:59 PM IST
चंद्रभान यादव/रशीद सिद्दीकी
चंद्रभान यादव/रशीद सिद्दीकी Updated Sat, 23 Apr 2016 10:59 PM IST
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Are dying of hunger and thirst of struggle helpless
बांदा के बिल्हरका गांव के जंगल में पड़े मवेशियों के अस्थि पंजर। - फोटो : अमर उजाला

बांदा। बुंदेलखंड में पशुओं की भूख मिटाने के नाम पर करोड़ों रुपया खर्च करने का दावा किया जा रहा है। सरकारी रिपोर्ट में चित्रकूटधाम मंडल में 96 भूसा राहत केंद्र खोले गए हैं और 4.60 करोड़ से 23747 क्विंटल भूसा खरीदा गया है लेकिन जमीनी सच्चाई प्रशासनिक दावे से एकदम उलट है। बुंदेलखंड के ज्यादातर ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें भूसे का एक तिनका भी नहीं मिला है। उन्हें भूसा बांटे जाने की भनक भी नहीं है। ऐसे में जानवर भूख और प्यास से तड़पकर दम तोड़ रहे हैं। गांवों से बाहर खेतों में मृत पड़े जानवर और उनके अस्थिपंजर इसका सबूत हैं।

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सरकार की ओर से बुंदेलखंड के पशुपालकों को राहत देने के नाम पर भूसा डिपो खोलने का ऐलान किया गया। इसके तहत चित्रकूटधाम मंडल (बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर और महोबा) में 20 जनवरी के बाद से भूसा राहत कैंप खोलने की प्रक्रिया शुरू हुई। शासन की ओर से महोबा को सर्वाधिक 1.60 करोड़ और बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर को एक-एक करोड़ रुपया जारी कर दिया गया लेकिन सरकारी मशीनरी की ढिलाई से 31 मार्च तक बमुश्किल 40 फीसदी ही पैसा खर्च हो पाया।
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बाकी पैसा यह कहते हुए एडवांस ड्रा कर लिया गया कि सूखा राहत कैंप जून के अंतिम सप्ताह तक चलेंगे। इतना ही नहीं सरकार को भेजी गई रिपोर्ट में 11 अप्रैल तक 96 स्थानों पर 23747.05 क्विंटल भूसा बांटने का दावा किया जा रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि अधिकांश पशुपालकों को पता ही नहीं चला कि सरकार उन्हें मुफ्त भूसा दे रही है।
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जिस किसी भूसे की बात करो, वह चौंक जाता है और सवाल करता है कि कहां, कैसा भूसा। ग्रामीण दलील देते हैं कि खूंटे पर भूख से तड़पते जानवर देखे नहीं जाते। इसलिए मवेशियों को अन्ना छोड़ दिया। यह

मवेशी रोजाना जंगलों और खेतों में दम तोड़ रहे हैं। अब लोगों के दरवाजे पर सिर्फ दुधारू पशु ही दिख रहे हैं। इस संबंध में अफसरों की अलग-अलग राय है। कहां, कितना भूसा बांटना है, यह काम भी राहत पैकेट की तरह लेखपालों के जिम्मे है। बांदा के जिलाधिकारी योगेश कुमार का कहना है कि भूसा वितरण का काम एडीएम देख रहे हैं। किस जगह कितना भूसा बांटा गया है, इस बारे में आज ही एडीएम से रिपोर्ट लेता हूं। पशुओं को भूखे-प्यासे मरने नहीं दिया जाएगा।


चित्रकूटधाम मंडल के पशुपालन विभाग के अपर निदेशक डा. एके सिंह का कहना है कि पूरे मंडल में 23747 क्विंटल से ज्यादा भूसा बांटा गया है। भूसा का वितरण अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के माध्यम से कराया जा रहा है। लेखपालों ने जिस स्थान और जिस पशुपालक के बारे में रिपोर्ट दी है, उसे भूसा उपलब्ध कराया गया है। भूसा वितरण में पशुपालन विभाग का कोई रोल नहीं है। कितना और कहां बांटा गया, यह राजस्व विभाग तय करता है। हमारा काम सिर्फ बीमार पशुओं का इलाज करना है।

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