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अन्ना प्रथा रोकने को खोली गौशाला
ब्यूरो/ अमर उजाला, बांदा
Updated Fri, 16 Jan 2015 11:36 PM IST
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आर्यवर्त संस्कृति संरक्षण संस्थान ने नहरी गांव में
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गौशाला खोली है। इसमें अन्ना मवेशियों को रखा जा रहा है। गौशाला में कैद 60
गायों के लिए भूसा, चारा क्षेत्रीय लोगों के सहयोग से संस्था उपलब्ध करा
रही है।
गौशाला संचालक बृजेश तिवारी ने बताया कि नहरी व आसपास के गांवों की अन्ना गायों को गौशाला में रखा गया है। इसके लिए उन्होंने अपनी एक एकड़ भूमि दान कर निर्माण कराया है।
कहा कि घरों में गौ ग्रास (रोटी) निकालने की परंपरा रही है। इसी रोटी को चारा, भूसा के रूप में परिवर्तित कर दिया जाए तो गायों का संरक्षण और संवर्धन हो जाएगा। कहा कि जो गांव अन्ना प्रथा से त्रस्त हैं, वहां के लोग गौशाला आकर संकल्प पत्र भरें और गायों को गौशाला लाकर छोड़ दें।
प्रति गाय प्रतिदिन एक रुपये लिया जाएगा। प्रत्येक घर से गायों के चारे, भूसे के लिए एक रुपये लिया जाएगा। नहरी, स्योढ़ा सहित महोबा आदि के लोगों ने संकल्प पत्र भरा है।
गौशाला संचालक बृजेश तिवारी ने बताया कि नहरी व आसपास के गांवों की अन्ना गायों को गौशाला में रखा गया है। इसके लिए उन्होंने अपनी एक एकड़ भूमि दान कर निर्माण कराया है।
कहा कि घरों में गौ ग्रास (रोटी) निकालने की परंपरा रही है। इसी रोटी को चारा, भूसा के रूप में परिवर्तित कर दिया जाए तो गायों का संरक्षण और संवर्धन हो जाएगा। कहा कि जो गांव अन्ना प्रथा से त्रस्त हैं, वहां के लोग गौशाला आकर संकल्प पत्र भरें और गायों को गौशाला लाकर छोड़ दें।
प्रति गाय प्रतिदिन एक रुपये लिया जाएगा। प्रत्येक घर से गायों के चारे, भूसे के लिए एक रुपये लिया जाएगा। नहरी, स्योढ़ा सहित महोबा आदि के लोगों ने संकल्प पत्र भरा है।