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छोटी उम्र में अंजलि ने गायन में भरी उड़ान

Sun, 12 Jun 2016 11:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Sun, 12 Jun 2016 11:12 PM IST
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Anjali singing at a young age in the full flight
राज्यपाल सम्मान के साथ बाल गायिका अंजलि वर्मा। - फोटो : अमर उजाला

बांदा। सिर्फ 12 वर्ष की उम्र में अंजलि वर्मा के सुरीले स्वर लोगों पर जादू बनकर छा रहे हैं। सिर्फ दो वर्ष में इस बालिका ने गायन क्षेत्र में जो शोहरत बटोरी वह राजभवन तक जा पहुंची। लखनऊ में प्रदेश के राज्यपाल ने इन सुरीले स्वरों को ‘गंज कार्निवाल उमंग वार्षिक सम्मान’ प्रदान किया है। अंजलि को और भी तमाम पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। बांदा शहर से मात्र आठ किलोमीटर दूर महोखर गांव में परिषदीय विद्यालय के अध्यापक प्रज्ञानंद और गृहणी माया वर्मा की बेटी अंजलि वर्मा को पिछले हफ्ते लखनऊ मेें राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त हुआ है। यहां के जिलाधिकारी योगेश कुमार भी अंजलि के गीतों के मुरीद हैं। वह अपने साथ उसे सम्मान प्राप्त करवाने लखनऊ ले गए थे। इसके पूर्व 5000 रुपये और ट्राफी इनाम दी थी। यहां जीआईसी में नौवीं क्लास में पढ़ रही अंजलि स्थानीय दो साधारण गायन गुरु शफीक खां (मर्दननाका) से गीत के गुर सीख रही है।

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इसके पूर्व उसके गुरु मनमोहन सिंह भी रहे लेकिन अब वह इस दुनिया में नहीं रहे। अंजलि के घर परिवार में कोई गायक नहीं है। वह बताती है कि घर में यूं ही गुनगुनाती थी। उसके स्वर पापा को पसंद थे। तीसरी कक्षा मेें पढ़ने के दौरान सरस्वती शिशु मंदिर तिंदवारी मेें वार्षिकोत्सव मेें उसने एक कव्वाली गाई। वह बेहद हिट हुई। नटराज म्यूजिक चैलेंज में राग भुपाली गाकर पहला स्थान पाया। सुर ताल चैलेंज में भजन गया। ‘अमर उजाला’ द्वारा बांदा में आयोजित किसान मेले के मंच में शानदार गीत गाकर गायन प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल किया। इस वर्ष नटराज चैलेंज प्रतियोगिता में उसे पहला स्थान मिला है। उत्तर प्रदेश नाटक एकेडमी में भी उसका बांदा से चयन हुआ है। हर माह में तीन बार वह लखनऊ गायन की कोचिंग लेने जाती है। अंजलि के गाने की अदा और अंदाज भी निराला है। गीत, गजल, भजन, कव्वाली सभी कुछ सुरीला सुनाती है। खास बात यह है कि शब्दों का उच्चारण बहुत ही साफ सुथरा है। अंजलि की तमन्ना है कि वह पढ़ाई के साथ गायन क्षेत्र में ही और उड़ान भरना चाहती है।

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