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अब आंगनबाड़ी केंद्रों में होंगे अन्न प्राशन

Thu, 16 Jun 2016 11:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Thu, 16 Jun 2016 11:42 PM IST
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Anganwadi centers will now Annprasn
child - फोटो : Getty Images

बांदा। आंगनबाड़ी केंद्रों पर अब गर्भवती महिलाओं की गोद भराई और छह माह के शिशु के अन्नप्राशन की रस्में होंगी। गर्भवती महिलाओं को आंगनबाड़ी केंद्र पर बुलाकर उसको डलिया भेंट की जाएगी। इसमें परंपरा के मुताबिक मौसमी फल, नारियल, अंकुरित अनाज, गुड़, भुना चना आदि भरे होंगे। बच्चों के पोषण स्तर में सुधार के लिए शासन ने बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग में इस योजना की पहल की है। इस कार्यक्रम में खर्च के लिए प्रति गर्भवती आंगनबाड़ी केंद्र को 250 रुपये दिए गए हैं।

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स्निप (आईसीडीएस यानी तंत्र सुदृढ़ीकरण एवं पोषण सुधार परियोजना) के तहत प्रदेश के 41 जिलों का चयन किया गया है। इसमें बुंदेलखंड के छह जिले झांसी, चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर, महोबा और जालौन भी शामिल हैं। इन जिलों में समुदाय आधारित परंपरागत कार्यक्रम गोद भराई और अन्न प्राशन की रस्में आंगनबाड़ी केंद्रों पर होंगी। योजना के तहत आंगनबाड़ी कार्यकत्री सात माह की गर्भवती महिला के माथे पर बिंदी और टीका लगाकर मातृत्व का सम्मान करेंगी। कार्यकत्रियां गर्भवती महिलाओं का कुपोषण दूर करने के लिए उन्हें इन चीजों को दैनिक आहार में शामिल करने को प्रेरित करेंगी।
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इसी दौरान केंद्र में गोद भराई के समय प्रसव के पहले होने वाली तीन जांचों के बारे में महिलाओं को बताया जाएगा। एमसीपी कार्ड का इस्तेमाल महिलाएं स्वास्थ्य केंद्र पर भी कर सकेंगी। उधर, छह माह पूरे करने वाले बच्चों के अन्नप्राशन की रस्म भी आंगनबाड़ी कार्यकत्री कराएंगी। उन्हें खीर बनाकर खिलाई जाएगी। साथ ही प्रधान व गांव के अन्य संपन्न लोगों के सहयोग से उन्हें एक उपहार भी दिया जाएगा। इस आयोजन के लिए 25 जून की तिथि निर्धारित की गई है। डीएम और सीडीओ भी किसी तीन आंगनबाड़ी केंद्रों में इस कार्यक्रम में शरीक होंगे। अन्न प्राशन और गोद भराई के लिए आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के खाते में प्रति महिला ढाई सौ रुपये भेजे जा रहे हैं।
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गोद भराई और अन्नप्राशन कार्यक्रमों की तैयारियां की जा रही हैं। सभी सुपरवाइजरों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और बच्चों की जानकारी प्रारूप दो व तीन के जरिये मांगी गई है। गर्भवती महिलाओं के लिए यह योजना मील का पत्थर साबित होगी। -राम कुमार सिंह, मुख्य विकास अधिकारी, बांदा।

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