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Banda News: चौसड़ में जलनिकासी के लिए सड़क खोदकर बना डाला नाला
Tue, 01 Sep 2026 11:41 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Tue, 01 Sep 2026 11:41 PM IST
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फोटो-26-गांव चौसड़ में सड़क काटकर बनाए गए नाले से गुजरता बाइकसवार।
बांदा/अतर्रा। बारिश से उफनाए नाले और नदियों ने लोगों की राह रोक दी है। सड़कें डूब गई हैं और पानी रपटों के ऊपर से बह रहा है।
अतर्रा तहसील क्षेत्र के गांव चौसड़ में सिस्टम की नाकामी में रास्ता बह गया। यहां जलभराव होने पर मुख्य सड़क काटकर नाला बनाना पड़ा। कल तक जहां सड़क थी, वहां अब बल्ली और पटरे के झूले के सहारे लोग पार हो रहे हैं।
बारिश से सरकारी कार्यालयों में हुआ जलभराव भी संकट बन गया है। इस बीच केन और यमुना का जलस्तर गिरने से कुछ राहत जरूर मिली है। जलभराव से निजात दिलाने के लिए चौसड़ गांव में जिम्मेदारों ने मुख्य संपर्क मार्ग ही खोद डाला। सोमवार को जेसीबी से ओरन-अतर्रा मुख्य संपर्क मार्ग को करीब 12 फीट काटकर नाला बना दिया गया। सड़क कटने से खेतों और घरों का पानी तो निकलने लगा लेकिन अब ग्रामीणों और राहगीरों के सामने आवागमन का संकट खड़ा हो गया है।
मंगलवार को बल्ली और पटरे के सहारे लोग निकलने को मजबूर रहे। बाइक और पैदल निकलने के लिए भी जोखिम उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश से पहले नालियों और नालों की सफाई करा दी जाती तथा जलनिकासी की वैकल्पिक व्यवस्था की जाती तो मुख्य सड़क को काटने की जरूरत नहीं पड़ती। सड़क टूटने से स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को परेशानी हो रही है। एंबुलेंस और अन्य वाहनों के लिए भी रास्ता प्रभावित हुआ है।
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एसडीएम शैलेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि जलभराव की समस्या के चलते मार्ग को काटा गया है। जल्द ही पाइप डालकर सड़क की मरम्मत करा दी जाएगी। सोमवार रात से मंगलवार तक जिले में 47 मिमी (मिलीमीटर) बारिश दर्ज की गई। लगातार बारिश से कई ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी है। हालांकि केन और यमुना नदी का जलस्तर घटा है।
मंगलवार को केन का जलस्तर करीब एक मीटर गिरकर 96.02 मीटर रहा। वहीं यमुना का जलस्तर 93.34 मीटर रहा लेकिन कई रपटे अब भी जलमग्न हैं और रास्तों पर दलदल फैल गया है।
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गजनी-सिमोनी नाले उफनाए, जान जोखिम में
तिंदवारी। लगातार रुक-रुककर हो रही बारिश से गजनी और सिमोनी नाले उफना गए हैं। पानी बढ़ने से आसपास के गांवों में आवागमन प्रभावित हुआ है। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नाले पार कर रहे हैं। गांवों की सड़कें कीचड़ से पट गई हैं। पैदल निकलना भी मुश्किल हो रहा है। किसानों के मुताबिक बारिश धान की फसल के लिए फायदेमंद है। इससे निजी नलकूपों से सिंचाई का खर्च बच रहा है। वहीं तिल, अरहर, मूंग, उड़द, बाजरा और ज्वार की फसलों को नुकसान की आशंका है। (संवाद)
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तहसील और आपूर्ति कार्यालय में भरा पानी
नरैनी। लगातार बारिश से कस्बे में जलभराव की समस्या गंभीर हो गई है। तहसील परिसर और आपूर्ति कार्यालय समेत कई प्रमुख स्थानों पर पानी भर गया। आपूर्ति कार्यालय में घुटनों तक पानी भरने से कामकाज प्रभावित रहा।
एसडीएम अंजली यादव ने जलभराव वाले स्थानों का निरीक्षण किया। शिशु मंदिर वाली गली में नाला चोक मिलने पर नगर पंचायत के बाबू शिवम द्विवेदी को जेसीबी से तत्काल सफाई कराने के निर्देश दिए। इसके बाद नगर पंचायत की टीम जलनिकासी में जुट गई। करतल और बांदा मार्ग पर भी जलभराव है।
सुभाष नगर मोहल्ले में करीब तीन फीट तक पानी भर गया है। आपूर्ति कार्यालय परिसर में पानी भरने के कारण मंगलवार को कार्यालय बंद रहा। राशन संबंधी काम के लिए गांवों से पहुंचे संतराम, आरिफ और नाथूराम ने बताया कि पानी भरने से उनके काम नहीं हो सके और उन्हें लौटना पड़ा। (संवाद)
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चंद्रावल और केन नदी पर बन तीन रपटे अब भी जलमग्न
पैलानी। बारिश के बीच केन और यमुना नदी का जलस्तर घटा है। इसके बावजूद चंद्रावल नदी का पड़ोहरा-नांदादेव, गौरी-अमारा और केन नदी पर बना सिंधनकलां-तुर्री नाला संपर्क मार्ग पर बने रपटे जलमग्न हैं। इन रास्तों पर नावों से आवागमन कराया जा रहा है। पानी घटने के बाद सड़कों पर दलदल फैल गया है।
एसडीएम पैलानी भूपेंद्र सिंह ने बताया कि नाविकों को पर्याप्त संख्या में लाइफ जैकेट दिए गए हैं। पुलिस और लेखपालों को भी तैनात किया गया है। ग्रामीणों ने दलदल वाले रास्तों पर ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराने की मांग की है। (संवाद)
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अतर्रा तहसील क्षेत्र के गांव चौसड़ में सिस्टम की नाकामी में रास्ता बह गया। यहां जलभराव होने पर मुख्य सड़क काटकर नाला बनाना पड़ा। कल तक जहां सड़क थी, वहां अब बल्ली और पटरे के झूले के सहारे लोग पार हो रहे हैं।
बारिश से सरकारी कार्यालयों में हुआ जलभराव भी संकट बन गया है। इस बीच केन और यमुना का जलस्तर गिरने से कुछ राहत जरूर मिली है। जलभराव से निजात दिलाने के लिए चौसड़ गांव में जिम्मेदारों ने मुख्य संपर्क मार्ग ही खोद डाला। सोमवार को जेसीबी से ओरन-अतर्रा मुख्य संपर्क मार्ग को करीब 12 फीट काटकर नाला बना दिया गया। सड़क कटने से खेतों और घरों का पानी तो निकलने लगा लेकिन अब ग्रामीणों और राहगीरों के सामने आवागमन का संकट खड़ा हो गया है।
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मंगलवार को बल्ली और पटरे के सहारे लोग निकलने को मजबूर रहे। बाइक और पैदल निकलने के लिए भी जोखिम उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश से पहले नालियों और नालों की सफाई करा दी जाती तथा जलनिकासी की वैकल्पिक व्यवस्था की जाती तो मुख्य सड़क को काटने की जरूरत नहीं पड़ती। सड़क टूटने से स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को परेशानी हो रही है। एंबुलेंस और अन्य वाहनों के लिए भी रास्ता प्रभावित हुआ है।
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एसडीएम शैलेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि जलभराव की समस्या के चलते मार्ग को काटा गया है। जल्द ही पाइप डालकर सड़क की मरम्मत करा दी जाएगी। सोमवार रात से मंगलवार तक जिले में 47 मिमी (मिलीमीटर) बारिश दर्ज की गई। लगातार बारिश से कई ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी है। हालांकि केन और यमुना नदी का जलस्तर घटा है।
मंगलवार को केन का जलस्तर करीब एक मीटर गिरकर 96.02 मीटर रहा। वहीं यमुना का जलस्तर 93.34 मीटर रहा लेकिन कई रपटे अब भी जलमग्न हैं और रास्तों पर दलदल फैल गया है।
गजनी-सिमोनी नाले उफनाए, जान जोखिम में
तिंदवारी। लगातार रुक-रुककर हो रही बारिश से गजनी और सिमोनी नाले उफना गए हैं। पानी बढ़ने से आसपास के गांवों में आवागमन प्रभावित हुआ है। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नाले पार कर रहे हैं। गांवों की सड़कें कीचड़ से पट गई हैं। पैदल निकलना भी मुश्किल हो रहा है। किसानों के मुताबिक बारिश धान की फसल के लिए फायदेमंद है। इससे निजी नलकूपों से सिंचाई का खर्च बच रहा है। वहीं तिल, अरहर, मूंग, उड़द, बाजरा और ज्वार की फसलों को नुकसान की आशंका है। (संवाद)
तहसील और आपूर्ति कार्यालय में भरा पानी
नरैनी। लगातार बारिश से कस्बे में जलभराव की समस्या गंभीर हो गई है। तहसील परिसर और आपूर्ति कार्यालय समेत कई प्रमुख स्थानों पर पानी भर गया। आपूर्ति कार्यालय में घुटनों तक पानी भरने से कामकाज प्रभावित रहा।
एसडीएम अंजली यादव ने जलभराव वाले स्थानों का निरीक्षण किया। शिशु मंदिर वाली गली में नाला चोक मिलने पर नगर पंचायत के बाबू शिवम द्विवेदी को जेसीबी से तत्काल सफाई कराने के निर्देश दिए। इसके बाद नगर पंचायत की टीम जलनिकासी में जुट गई। करतल और बांदा मार्ग पर भी जलभराव है।
सुभाष नगर मोहल्ले में करीब तीन फीट तक पानी भर गया है। आपूर्ति कार्यालय परिसर में पानी भरने के कारण मंगलवार को कार्यालय बंद रहा। राशन संबंधी काम के लिए गांवों से पहुंचे संतराम, आरिफ और नाथूराम ने बताया कि पानी भरने से उनके काम नहीं हो सके और उन्हें लौटना पड़ा। (संवाद)
चंद्रावल और केन नदी पर बन तीन रपटे अब भी जलमग्न
पैलानी। बारिश के बीच केन और यमुना नदी का जलस्तर घटा है। इसके बावजूद चंद्रावल नदी का पड़ोहरा-नांदादेव, गौरी-अमारा और केन नदी पर बना सिंधनकलां-तुर्री नाला संपर्क मार्ग पर बने रपटे जलमग्न हैं। इन रास्तों पर नावों से आवागमन कराया जा रहा है। पानी घटने के बाद सड़कों पर दलदल फैल गया है।
एसडीएम पैलानी भूपेंद्र सिंह ने बताया कि नाविकों को पर्याप्त संख्या में लाइफ जैकेट दिए गए हैं। पुलिस और लेखपालों को भी तैनात किया गया है। ग्रामीणों ने दलदल वाले रास्तों पर ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराने की मांग की है। (संवाद)

फोटो-26-गांव चौसड़ में सड़क काटकर बनाए गए नाले से गुजरता बाइकसवार।

फोटो-26-गांव चौसड़ में सड़क काटकर बनाए गए नाले से गुजरता बाइकसवार।

फोटो-26-गांव चौसड़ में सड़क काटकर बनाए गए नाले से गुजरता बाइकसवार।

फोटो-26-गांव चौसड़ में सड़क काटकर बनाए गए नाले से गुजरता बाइकसवार।