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रद्दी में बेचीं सरकारी किताबें
Banda
Updated Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
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बांदा। सर्वशिक्षा अभियान के तहत केंद्र और राज्य सरकारों के बजट से स्कूलोें में बच्चों को मुफ्त बांटी जाने वाली सरकारी किताबें कबाड़ियों के हाथ रद्दी के भाव बिक रही हैं। बच्चों के बस्ते कोर्स की इन पुस्तकों से खाली हैं और दूसरी तरफ कबाड़ियों के ठेले इन किताबों से भरे हैं।
सर्वशिक्षा अभियान के तहत सरकार विभिन्न विषयों की कक्षा 1 से 8 तक की पाठ्यपुस्तकें परिषदीय स्कूलों में बच्चों को मुफ्त मुहैया कराती है। इन किताबों को बांटने का जिम्मा विद्यालयों के शिक्षकों का है लेकिन आए दिन यह शिकायतें मिलती रहती हैं कि बच्चों को यह किताबें नहीं मिलीं। या मिलीं भी तो आधी-अधूरी। बच्चों के बस्ते इन किताबों से खाली रहने की पोल कबाड़ी खोल रहे हैं। उन्हें लुकेछिपे यह किताबें रद्दी के भाव बेची जा रही हैं। बृहस्पतिवार को बांदा शहर में एक कबाड़ी की चार पहिया ठेलिया इन्हीं किताबों से भरी थी। इनमें कक्षा 8 की मंजरी, कृषि विज्ञान, एलेमेंट्री और अर्थमैटिक्स आदि की किताबें शामिल थीं। हरेक किताब में प्रदेश सरकार का मोनोग्राम और कोड नंबर छपा था। उत्तर पुस्तिकाओं के भी कई बंडल थे। कबाड़ी ने बताया कि उसने यह कापी-किताबें रद्दी के भाव छह रुपए किलो की दर से खरीदी हैं। उसे कटरा मोहल्ले में स्थित एक स्कूल से यह रद्दी मिली है। अनपढ़ कबाड़ी को यह नहीं पता कि इनका बेचना और खरीदना जुर्म है।
दूसरी ओर नगर शिक्षा अधिकारी सुनील द्विवेदी ने बताया कि सर्वशिक्षा अभियान के तहत नगर क्षेत्र की सभी पुस्तकें स्कूलों में बच्चों को बांटी जा चुकी हैं। तीन साल पहले भी कबाड़ी के यहां यह किताबें मिली थीं। तब वह बड़ोखर ब्लाक की पाई गई थीं। इसी तरह इस बार भी किसी ने कबाड़ी को बेच दी होंगी। फिर भी वह इसका पता लगाकर कार्रवाई करेंगे।
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सर्वशिक्षा अभियान के तहत सरकार विभिन्न विषयों की कक्षा 1 से 8 तक की पाठ्यपुस्तकें परिषदीय स्कूलों में बच्चों को मुफ्त मुहैया कराती है। इन किताबों को बांटने का जिम्मा विद्यालयों के शिक्षकों का है लेकिन आए दिन यह शिकायतें मिलती रहती हैं कि बच्चों को यह किताबें नहीं मिलीं। या मिलीं भी तो आधी-अधूरी। बच्चों के बस्ते इन किताबों से खाली रहने की पोल कबाड़ी खोल रहे हैं। उन्हें लुकेछिपे यह किताबें रद्दी के भाव बेची जा रही हैं। बृहस्पतिवार को बांदा शहर में एक कबाड़ी की चार पहिया ठेलिया इन्हीं किताबों से भरी थी। इनमें कक्षा 8 की मंजरी, कृषि विज्ञान, एलेमेंट्री और अर्थमैटिक्स आदि की किताबें शामिल थीं। हरेक किताब में प्रदेश सरकार का मोनोग्राम और कोड नंबर छपा था। उत्तर पुस्तिकाओं के भी कई बंडल थे। कबाड़ी ने बताया कि उसने यह कापी-किताबें रद्दी के भाव छह रुपए किलो की दर से खरीदी हैं। उसे कटरा मोहल्ले में स्थित एक स्कूल से यह रद्दी मिली है। अनपढ़ कबाड़ी को यह नहीं पता कि इनका बेचना और खरीदना जुर्म है।
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दूसरी ओर नगर शिक्षा अधिकारी सुनील द्विवेदी ने बताया कि सर्वशिक्षा अभियान के तहत नगर क्षेत्र की सभी पुस्तकें स्कूलों में बच्चों को बांटी जा चुकी हैं। तीन साल पहले भी कबाड़ी के यहां यह किताबें मिली थीं। तब वह बड़ोखर ब्लाक की पाई गई थीं। इसी तरह इस बार भी किसी ने कबाड़ी को बेच दी होंगी। फिर भी वह इसका पता लगाकर कार्रवाई करेंगे।
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