{"_id":"75739","slug":"Banda-75739-41","type":"story","status":"publish","title_hn":"केंद्र पर किसानों का गुस्सा फूटा, नारेबाजी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
केंद्र पर किसानों का गुस्सा फूटा, नारेबाजी
Banda
Updated Mon, 07 May 2012 12:00 PM IST
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बांदा। प्रशासन की सख्ती के बावजूद गेहूं खरीद केंद्रों में किसानों की मुश्किल कम नहीं हो रही। मुख्यालय स्थित मंडी समिति खरीद केंद्र में किसान पांच दिन से गेहूं बिकने का इंतजार कर रहे हैं। इससे आक्रोशित किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। अव्यवस्था के विरोध में रविवार को उन्होंने जमकर नारेबाजी की। उन्होंने केंद्र प्रभारी पर उगाही का आरोप भी लगाया। उधर, ओरन खरीद केंद्र में भी किसान तीन दिन से बारी का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर केंद्र प्रभारी का कहना है कि गेहूं का उठान न होने से खरीद रोकनी पड़ती है।
जिलाधिकारी शीतल वर्मा व क्षेत्रीय खाद्य विपणन अधिकारी राममूर्ति पांडेय ने सभी खरीद केंद्र प्रभारियों को किसानों का गेहूं उसी दिन खरीदने और सुविधा के मुताबिक एक की जगह तीन तराजू लगाने के आदेश दे रखे हैं। गेहूं रखने को जगह न होेने की समस्या से बचने के लिए यह भी कहा गया है कि प्रतिदिन खरीदा गया गेहूं एफसीआई के अतर्रा व बांदा गोदाम पहुंचा दिया जाए। अधिकारियों के आदेशों को धता बताते हुए खरीद केंद्र प्रभारी मनमानी से बाज नहीं आ रहे। मंडी परिषद स्थित विपणन शाखा के खरीद केंद्र में रविवार को किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। नारेबाजी करते हुए आक्रोश जताया। गेहूं बेचने आए किसान रमन त्रिपाठी (गोखरही), शिवमोहन (बरगहनी), उदयभान (मटौंध), उत्तम सिंह (जौरही), दिनेश कुमार (पैलानी), आनंद (महोखर), बउवा सिंह व राम सिंह (फतपुरवा) ने बताया कि वह पांच दिन सेे खरीद केंद्र में डेरा डाले हैं। बताया कि 2 मई से खरीद ठप है। केंद्र प्रभारी खरीद के बदले सुविधा शुल्क की मांग करता है। रविवार को केंद्र प्रभारी नदारद थे। पल्लेदारों का कहना था कि भंडारण क्षमता खत्म होने से खरीद ठप कर दी गई है। उधर, क्षेत्रीय खाद्य विपणन अधिकारी राममूर्ति पांडेय व मंडी सचिव का कहना है कि भंडारण की कोई कमी नहीं है। केंद्र प्रभारी विनोद कुमार कुशवाहा परेशान कर रहा है। धान खरीद के समय भी गड़बड़ी करने पर उसके खिलाफ पत्र लिखा गया था। अब वह जिलाधिकारी व क्षेत्रीय खाद्य नियंत्रक को केंद्र प्रभारी की कारगुजारी से अवगत कराएंगे।
ओरन प्रतिनिधि के मुताबिक केंद्र पर मारामारी मची है। किसानों को अपनी बारी के लिए तीन दिन इंतजार करना पड़ता है। किसान शिवप्रसाद यादव (उतरवां) ने बताया कि तीन दिन इंतजार के बाद आज उसकी बारी आई है। खरीद केंद्र में पानी आदि की कोई सुविधा नहीं है। मात्र एक कांटे में खरीद की जाती है। खरीद केंद्र प्रभारी केशव ने बताया कि उनके यहां जगह की कमी है। गेहूं की उठान न होने पर खरीद रोकनी पड़ती है।
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जिलाधिकारी शीतल वर्मा व क्षेत्रीय खाद्य विपणन अधिकारी राममूर्ति पांडेय ने सभी खरीद केंद्र प्रभारियों को किसानों का गेहूं उसी दिन खरीदने और सुविधा के मुताबिक एक की जगह तीन तराजू लगाने के आदेश दे रखे हैं। गेहूं रखने को जगह न होेने की समस्या से बचने के लिए यह भी कहा गया है कि प्रतिदिन खरीदा गया गेहूं एफसीआई के अतर्रा व बांदा गोदाम पहुंचा दिया जाए। अधिकारियों के आदेशों को धता बताते हुए खरीद केंद्र प्रभारी मनमानी से बाज नहीं आ रहे। मंडी परिषद स्थित विपणन शाखा के खरीद केंद्र में रविवार को किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। नारेबाजी करते हुए आक्रोश जताया। गेहूं बेचने आए किसान रमन त्रिपाठी (गोखरही), शिवमोहन (बरगहनी), उदयभान (मटौंध), उत्तम सिंह (जौरही), दिनेश कुमार (पैलानी), आनंद (महोखर), बउवा सिंह व राम सिंह (फतपुरवा) ने बताया कि वह पांच दिन सेे खरीद केंद्र में डेरा डाले हैं। बताया कि 2 मई से खरीद ठप है। केंद्र प्रभारी खरीद के बदले सुविधा शुल्क की मांग करता है। रविवार को केंद्र प्रभारी नदारद थे। पल्लेदारों का कहना था कि भंडारण क्षमता खत्म होने से खरीद ठप कर दी गई है। उधर, क्षेत्रीय खाद्य विपणन अधिकारी राममूर्ति पांडेय व मंडी सचिव का कहना है कि भंडारण की कोई कमी नहीं है। केंद्र प्रभारी विनोद कुमार कुशवाहा परेशान कर रहा है। धान खरीद के समय भी गड़बड़ी करने पर उसके खिलाफ पत्र लिखा गया था। अब वह जिलाधिकारी व क्षेत्रीय खाद्य नियंत्रक को केंद्र प्रभारी की कारगुजारी से अवगत कराएंगे।
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ओरन प्रतिनिधि के मुताबिक केंद्र पर मारामारी मची है। किसानों को अपनी बारी के लिए तीन दिन इंतजार करना पड़ता है। किसान शिवप्रसाद यादव (उतरवां) ने बताया कि तीन दिन इंतजार के बाद आज उसकी बारी आई है। खरीद केंद्र में पानी आदि की कोई सुविधा नहीं है। मात्र एक कांटे में खरीद की जाती है। खरीद केंद्र प्रभारी केशव ने बताया कि उनके यहां जगह की कमी है। गेहूं की उठान न होने पर खरीद रोकनी पड़ती है।
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