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‘किसान आत्महत्याओं पर चुप्पी शर्मनाक’

Wed, 24 Sep 2014 05:32 AM IST
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Banda Updated Wed, 24 Sep 2014 05:32 AM IST
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बांदा। सुप्रीम कोर्ट कमिश्नर कार्यालय में राष्ट्रीय सलाहकार डॉ.सज्जाद हसन (आईएएस) ने बुंदेलखंड में किसानों की लगातार आत्महत्याओें पर गहरी चिंता जताते हुए इसे शर्मनाक बताया है। कहा है कि सरकार और समाज को ऐसा सिस्टम विकसित करना होगा जिससे ये रोकी जा सकें। इसके लिए एक्शन प्लान भी जरूरी है।
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राष्ट्रीय सलाहकार मंगलवार को यहां मंडपम सभागार में आयोजित ‘जन सुनवाई’ कार्यक्रम संबोधित कर रहे थे। इसका आयोजन विद्याधाम समिति, अतर्रा (बांदा) और एक्शन एड (लखनऊ) ने संयुक्त रूप से किया था। सूखा और अतिवृष्टि से बुंदेलखंड में किसानों की आत्महत्याओें की तस्वीर उभारी गई। डॉ.सज्जाद ने कहा कि सरकार को ऐसी रणनीति बनानी चाहिए की अगले दो वर्षों मेें आत्महत्याओं पर पूरी तरह काबू पाया जा सके। आत्महत्या करने वालों के आश्रितों का तुरंत मदद और लाभ मिलना चाहिए।
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जन सुनवाई में ग्रामीण क्षेत्रों से आए नुमाइंदों ने तथ्यों के साथ किसानोें की बदहाली बयां की। चित्रकूट के चुन्नू (मानिकपुर), बांदा के शिवचरण (पचनेही), प्रहलाद (तेंदुरा), वृंदा यादव (रहूसत), महोबा के भईयालाल (श्रीनगर), हमीरपुर के गिरजा शंकर (पचखुरी) आदि किसानों के बारे मेें बताया कि फसलें नष्ट हो जाने पर कर्ज से परेशान इन किसानों ने आत्महत्या कर ली। इन्हें कोई सहायता नहीं मिली। बताया कि पूरे बुंदेलखंड में कुछ सालों में 194 किसान आत्महत्याएं कर चुके हैं।एक्शन एड एसोसिएशन के राजन सिंह ने किसान आयोग बनाए जाने की वकालत की ताकि किसान अपनी समस्याओें को प्राथमिकता के आधार पर रख सके। उन्होंने कहा कि आत्महत्या के लिए जिम्मेदार अफसरों और विभागों पर आपराधिक मुकदमा चलाया जाना चाहिए। अतिथि के रूप में जन सुनवाई में उपस्थित पूर्व विधायक प्रो.चंद्र प्रकाश शर्मा, डीएवी प्रवक्ता डॉ.अब्दुर्रशीद सिद्दीकी और डॉ. जनार्दन त्रिपाठी ने कहा कि किसानों की आत्महत्याएं रोकने के लिए उन्हें कर्ज लेते समय वित्तीय जागरूकता पैदा की जानी चाहिए। उनकी काउंसिलिंग भी हो।
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जन सुनवाई का संचालन विद्याधाम समिति सचिव राजाभइया ने की। परियोजना निदेशक सहित अशोक त्रिपाठी जीतू और वासुदेव तथा ओम तिवारी, सुरेश रैकवार इत्यादि शामिल रहे। जन सुनवाई में विद्याधाम सहित आपदा निवारक मंच (बांदा), चिंगारी संगठन (नरैनी), बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच व पहुुच विकास मंच (जौलान), अरुणोदय संस्थान (महोबा), प्रगति माध्यम समिति (चित्रकूट), उत्थान संस्थान (बांदा), समर्थ फाउंडेशन (हमीरपुर), सांई ज्योति व बुंदेलखंड सेवा संस्थान (ललितपुर), एक्शन एड (लखनऊ) शामिल रहे।
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