फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   राजेंद्र की बेबाक टिप्पणी से घबराते थे हिंदूवादी

राजेंद्र की बेबाक टिप्पणी से घबराते थे हिंदूवादी

Thu, 31 Oct 2013 05:42 AM IST
Banda
Banda Updated Thu, 31 Oct 2013 05:42 AM IST
विज्ञापन
बांदा। आधुनिक हिंदी कवि और वरिष्ठ कथाकार राजेंद्र यादव के निधन पर कवियों और साहित्यकारों ने शोक व्यक्त किया है। जनवादी लेखक संघ और केदार शोध पीठ न्यास तथा प्रगतिशील लेखक संघ ने श्रद्धांजलि दी। कहा कि उनकी बेबाक टिप्पणियों से हिंदूवादी लोग घबराते थे।
विज्ञापन

प्रो. रामगोपाल गुप्त ने राजेंद्र के निधन को हिंदी साहित्य और प्रगतिशील सोच की अपूर्णीय क्षति बताया। योगेश श्रीवास्तव ने कहा कि उनकी प्रगतिशील बेजोड़ थी। मयंक खरे ने उन्हें पारदर्शी मूल्यों का पक्षधर कहा। जयकांत शर्मा ने उन्हें दबे-कुचले लेखन को हंस के माध्यम से सामने लाने वाला बताया। चंद्रपाल कश्यप ने साहित्यिक और वैचारिक मूल्य वाला बताया। रामचंद्र सरस ने कहा कि वह हमेशा याद किए जाएंगे। नरेंद्र पुंडरीक ने कहा कि राजेंद्र यादव ने लोगों को तमाम खतरों से चेताया। उनकी बेबाक और प्रखर टिप्पणी से हिंदूवादी घबराते थे। न्यास अध्यक्ष महेश अग्रवाल ने सभी का आभार जताया।
विज्ञापन

उधर, जनवादी लेखक संघ की शोक सभा में राज्य प्रभारी और डीसीडीएफ अध्यक्ष सुधीर सिंह ने कहा कि राजेंद्र की उपस्थिति कहानी विधा का पर्याय बन गई थी। उन्होंने हिंदी कहानी को आधुनिक भाव-बोध से लैस करके लेखकीय हस्तक्षेप की साहसपूर्ण कला को विकसित किया। कवि केशव तिवारी ने कहा कि राजेंद्र जनवादी लेखक संघ की स्थापना से ही उसके राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आजीवन रहे। उन्होंने नई कहानी का भाषित विधान रचा। गोपाल गोयल ने उनके उपन्यास ‘सारा आकाश’ को हिंदी का श्रेष्ठ उपन्यास बताया। सचिव उमाशंकर परमार ने भी श्रद्धांजलि दी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed