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अतिक्रमण की गिरफ्त में तालाब
Banda
Updated Mon, 27 May 2013 05:30 AM IST
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मटौंध। लंबे समय से खुदाई न होने और अतिक्रमण के चलते कस्बे के ऐतिहासिक तालाबोें का अस्तित्व खतरे में है। धीरे-धीरे इनका रकबा सिमटता जा रहा है।
ऐतिहासिक भुजा तालाब का रकबा 120 बीघा है। पहले इसमें कभी पानी नहीं सूखता था। अतिक्रमण के चलते इसके भीटों पर बड़ी संख्या में मकान बन गए हैं। मकानों के सामने कूड़ा कचरा से पुराई कर अवैध कब्जा जारी है। नवा तालाब का रकबा 50 बीघे है। इसमें भी दो दर्जन से अधिक मकान बन चुके हैं। तमाम लोगों ने कटीली बाड़ लगाकर कब्जा कर रखा है।
40 बीघा रकबे का नैनी तालाब भी अतिक्रमण की चपेट में है। शुकुल तालाब का रकबा 100 बीघा और लहुरवा तालाब का रकबा 40 बीघा है। कई दशकों से खुदाई न होने से इनका दो तिहाई हिस्सा मलबे से पट गया है।
राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित हरेरा तालाब नगर पंचायत कार्यालय से मात्र 100 मीटर दूर है। गंदगी से पटे तालाब का सुंदरीकरण नहीं कराया गया। नगर पंचायत ने इसी तालाब में सुलभ काम्प्लेक्स और कांजी हाउस बना रखा है। कस्बे का कचरा भी तालाब में डाला जाता है। 8 बीघा रकबा वाले पंधारिया तालाब की पूरी तरह पुराई कर अतिक्रमणकारियों ने मकान बना लिए। अब इसका नामोनिशान नहीं बचा।
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ऐतिहासिक भुजा तालाब का रकबा 120 बीघा है। पहले इसमें कभी पानी नहीं सूखता था। अतिक्रमण के चलते इसके भीटों पर बड़ी संख्या में मकान बन गए हैं। मकानों के सामने कूड़ा कचरा से पुराई कर अवैध कब्जा जारी है। नवा तालाब का रकबा 50 बीघे है। इसमें भी दो दर्जन से अधिक मकान बन चुके हैं। तमाम लोगों ने कटीली बाड़ लगाकर कब्जा कर रखा है।
40 बीघा रकबे का नैनी तालाब भी अतिक्रमण की चपेट में है। शुकुल तालाब का रकबा 100 बीघा और लहुरवा तालाब का रकबा 40 बीघा है। कई दशकों से खुदाई न होने से इनका दो तिहाई हिस्सा मलबे से पट गया है।
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राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित हरेरा तालाब नगर पंचायत कार्यालय से मात्र 100 मीटर दूर है। गंदगी से पटे तालाब का सुंदरीकरण नहीं कराया गया। नगर पंचायत ने इसी तालाब में सुलभ काम्प्लेक्स और कांजी हाउस बना रखा है। कस्बे का कचरा भी तालाब में डाला जाता है। 8 बीघा रकबा वाले पंधारिया तालाब की पूरी तरह पुराई कर अतिक्रमणकारियों ने मकान बना लिए। अब इसका नामोनिशान नहीं बचा।
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