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पार्टियों द्वारा सिंबल घोषणा से चुनाव हुआ दिलचस्प
Updated Sat, 14 Oct 2017 12:31 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। लोकसभा चुनाव-2019 से पहले स्थानीय निकाय चुनाव की समर बुंदेलखंड में काफी दिलचस्प होगी। शायद यह पहला मौका है जब नगर पालिका और नगर पंचायत की सीट हासिल करने के लिए देश के बड़े राजनीतिक दल पूरी गंभीरता से मंथन और तैयारियों में जुटे हैं। खासकर सत्तारूढ़ दल भाजपा के लिए यह चुनाव और अहम है। बुंदेलखंड की सभी चारों लोकसभा और विधान सभा की सभी 19 सीटों पर काबिज भाजपा बुंदेलखंड की सभी 18 नगर पालिका भी अपनी झोली में डालने को आतुर है।
बुंदेलखंड में निकाय चुनावों का इतिहास गवाह है कि इसमें राजनीतिक दलों की अपेक्षा प्रत्याशी की दमदारी और लोकप्रियता ज्यादा मायने रखती है। इसीलिए पिछले निकाय चुनाव में पार्टियों का सिंबल या समर्थन कुछ खास गुल नहीं खिला सका। मतदाताओं ने प्रत्याशी को परखा और अपने शहर की कमान सौंप दी। कई बार बड़े राजनीतिक दलों के दिग्गज इसमें पराजित होते रहे हैं। मौजूदा निकाय चुनाव की खासियत यह है कि हरेक बड़ा राजनीतिक दल इसे पूरी गंभीरता से ले रहा है।
भाजपा, कांग्रेस, सपा और बसपा जैसे प्रमुख दलों ने काफी पहले ही एलान कर दिया है कि वह अपने सिंबल पर निकाय चुनाव लड़ेंगी। इन पार्टियों ने प्रत्याशियों की तलाश भी शुरू कर दी है। हालांकि बुंदेली मतदाता अभी भी यही सोंच रखता है कि इस चुनाव में पार्टी से ज्यादा प्रत्याशी पसंदीदा हो। निकाय चुनाव की तस्वीर 25 अक्तूबर को अधिसूचना जारी होने के बाद और ज्यादा साफ हो जाएगी। नगर निगमों और नगर पालिका परिषदों के घोषित आरक्षण में अभी 20 अक्तूबर तक आपत्तियां ली जा रही हैं। ऐसे में कुछ एक सीटों पर बदलाव भी संभावित है।
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-भाजपा के लिए बुंदेलखंड में निकाय चुनाव चुनौती
-लोकसभा की सभी 4 और विधान सभा की सभी 19 सीटों पर है कब्जा
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बांदा। लोकसभा चुनाव-2019 से पहले स्थानीय निकाय चुनाव की समर बुंदेलखंड में काफी दिलचस्प होगी। शायद यह पहला मौका है जब नगर पालिका और नगर पंचायत की सीट हासिल करने के लिए देश के बड़े राजनीतिक दल पूरी गंभीरता से मंथन और तैयारियों में जुटे हैं। खासकर सत्तारूढ़ दल भाजपा के लिए यह चुनाव और अहम है। बुंदेलखंड की सभी चारों लोकसभा और विधान सभा की सभी 19 सीटों पर काबिज भाजपा बुंदेलखंड की सभी 18 नगर पालिका भी अपनी झोली में डालने को आतुर है।
बुंदेलखंड में निकाय चुनावों का इतिहास गवाह है कि इसमें राजनीतिक दलों की अपेक्षा प्रत्याशी की दमदारी और लोकप्रियता ज्यादा मायने रखती है। इसीलिए पिछले निकाय चुनाव में पार्टियों का सिंबल या समर्थन कुछ खास गुल नहीं खिला सका। मतदाताओं ने प्रत्याशी को परखा और अपने शहर की कमान सौंप दी। कई बार बड़े राजनीतिक दलों के दिग्गज इसमें पराजित होते रहे हैं। मौजूदा निकाय चुनाव की खासियत यह है कि हरेक बड़ा राजनीतिक दल इसे पूरी गंभीरता से ले रहा है।
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भाजपा, कांग्रेस, सपा और बसपा जैसे प्रमुख दलों ने काफी पहले ही एलान कर दिया है कि वह अपने सिंबल पर निकाय चुनाव लड़ेंगी। इन पार्टियों ने प्रत्याशियों की तलाश भी शुरू कर दी है। हालांकि बुंदेली मतदाता अभी भी यही सोंच रखता है कि इस चुनाव में पार्टी से ज्यादा प्रत्याशी पसंदीदा हो। निकाय चुनाव की तस्वीर 25 अक्तूबर को अधिसूचना जारी होने के बाद और ज्यादा साफ हो जाएगी। नगर निगमों और नगर पालिका परिषदों के घोषित आरक्षण में अभी 20 अक्तूबर तक आपत्तियां ली जा रही हैं। ऐसे में कुछ एक सीटों पर बदलाव भी संभावित है।
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-भाजपा के लिए बुंदेलखंड में निकाय चुनाव चुनौती
-लोकसभा की सभी 4 और विधान सभा की सभी 19 सीटों पर है कब्जा