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Banda News: 28 में 24 खराब, चार वेंटिलेटर ही दे रहे मरीजों को सांस
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बांदा। कोरोना काल में जिला पुरुष अस्पताल को वर्ष 2020-21 में मिले 28 वेंटिलेटरों में 24 खराब हैं। इनकी मरम्मत के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। महज चार वेंटिलेटर ट्राॅमा सेंटर इमरजेंसी में लगाए गए हैं। इनसे मरीजों को ऑक्सीजन दी जा रही है।
जिला अस्पताल में इलाज की व्यवस्था बेपटरी है। गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन देने के लिए यहां सिर्फ चार वेंटिलेटर की व्यवस्था है। कोरोना काल में जिला पुरुष अस्पताल को 28 वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए थे। इनके जरिए कोरोना की चपेट में आए मरीजों को ऑक्सीजन दी जाती थी। कोरोना काल खत्म होने के बाद जिला अस्पताल के जिम्मेदार बेपरवाह हो गए और वेंटिलेटरों के रखरखाव के बारे में किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। इस कारण ज्यादातर वेंटिलेटर खराब हो गए।
वर्तमान में गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन देने के लिए ट्रामा सेंटर में लगाए गए चार वेंटिलेटर को ही इधर-उधर वार्डों में लगाया जाता है। मालूम हो कि जिला अस्पताल की इमरजेंसी ट्राॅमा सेंटर में संचालित है। ट्रामा सेंटर के अलावा वेंटिलेटरों का अन्य किसी वार्ड में इंतजाम नहीं है। हो भी कैसे, क्योंकि 24 वेंटिलेटर खराब हैं और मरम्मत का इंतजार कर रहे हैं।
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कंपनी सर्वे कर गई है, बजट का इंतजार
खराब पडे़ 24 वेंटिलेटरों की मरम्मत के लिए संबंधित कंपनी ने सर्वे किया है। बजट के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। बजट आने पर ही वेंटिलेटरों की मरम्मत कर उन्हें चालू कराया जाएगा। उनके पास स्टाफ की कमी भी है। -डॉ. एसडी त्रिपाठी, सीएसएम, जिला अस्पताल।
केस-1 : एक सप्ताह पूर्व बिसंडा थाना क्षेत्र के गड़ाव गांव निवासी मुकुंदी (60) पत्नी भेाला को जिला अस्पताल में सांस लेने में परेशानी होने पर भर्ती कराया गया था। फौरी तौर पर उपचार के बाद ऑक्सीजन दिया गया। बाद में मेडिकल काॅलेज के लिए रेफर कर दिया गया।
-केस-2 :एक सप्ताह पूर्व इंगुवामऊ गांव निवासी रीता देवी (24) और नरैनी क्षेत्र के पचोखर गांव निवासी उमा (22) को श्वांस रोग से पीड़ित होने पर जिला अस्पताल में भर्ती किया गया था। वेंटिलेटर के जरिए ऑक्सीजन दिया गया था, लेकिन बाद में मेडिकल काॅलेज के लिए रेफर किया गया।
कोई स्पेशल वार्ड नहीं
सां के रोगियों को या फिर अन्य गंभीर मरीज को ऑक्सीजन देने के लिए कोई स्पेशल वेंटिलेटर वार्ड जिला अस्पताल में नहीं है। ट्राॅमा सेंटर में लगे चार वेंटिलेटरों के जरिए ही गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन दी जाती है। कुछ घंटे तक ऑक्सीजन देने के बाद दूसरा मरीज आने पर पहले मरीज को रेफर कर दिया जाता है। तीमारदार अपने मरीज को लेकर मेडिकल कॉलेज या फिर प्राइवेट अस्पताल जाने को मजबूर होते हैं।
ओपीडी में 1200 और इमरजेंसी में आते 300 मरीज
जिला पुरुष अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 1200 से अधिक मरीज अपना रजिस्ट्रेशन कराकर डॉक्टर से इलाज कराते हैं।। सर्दी बढ़ने के साथ ही सांस के रोगी भी अस्पताल पहुंच रहे हैं। ट्राॅमा सेंटर में संचालित इमरजेंसी सेवा में प्रतिदिन 300 से 400 मरीज उपचार कराते हैं।
2021 में आए थे वेंटिलेटर
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. एसडी त्रिपाठी का कहना है कि कोरोना काल के दौरान वर्ष 2021 में वेंटिलेटर जिला अस्पताल को दिए गए थे। विधायक निधि, सांसद निधि और प्रधानमंत्री केयर फंड समेत अन्य संस्थाओं का सहयोग भी इन वेंटिलेटरों में शामिल रहा। वर्ष 2022 में ज्यादातर वेंटिलेटर खराब हो गए। 28 में से 24 वेंटिलेटरों की मरम्मत के लिए कंपनी के सदस्यों ने सर्वे किया है, जल्द ही इनकी मरम्मत कराई जाएगी। अब सिर्फ चार वेंटिलेटर ही ट्राॅमा सेंटर में संचालित हैं।
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जिला अस्पताल में इलाज की व्यवस्था बेपटरी है। गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन देने के लिए यहां सिर्फ चार वेंटिलेटर की व्यवस्था है। कोरोना काल में जिला पुरुष अस्पताल को 28 वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए थे। इनके जरिए कोरोना की चपेट में आए मरीजों को ऑक्सीजन दी जाती थी। कोरोना काल खत्म होने के बाद जिला अस्पताल के जिम्मेदार बेपरवाह हो गए और वेंटिलेटरों के रखरखाव के बारे में किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। इस कारण ज्यादातर वेंटिलेटर खराब हो गए।
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वर्तमान में गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन देने के लिए ट्रामा सेंटर में लगाए गए चार वेंटिलेटर को ही इधर-उधर वार्डों में लगाया जाता है। मालूम हो कि जिला अस्पताल की इमरजेंसी ट्राॅमा सेंटर में संचालित है। ट्रामा सेंटर के अलावा वेंटिलेटरों का अन्य किसी वार्ड में इंतजाम नहीं है। हो भी कैसे, क्योंकि 24 वेंटिलेटर खराब हैं और मरम्मत का इंतजार कर रहे हैं।
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कंपनी सर्वे कर गई है, बजट का इंतजार
खराब पडे़ 24 वेंटिलेटरों की मरम्मत के लिए संबंधित कंपनी ने सर्वे किया है। बजट के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। बजट आने पर ही वेंटिलेटरों की मरम्मत कर उन्हें चालू कराया जाएगा। उनके पास स्टाफ की कमी भी है। -डॉ. एसडी त्रिपाठी, सीएसएम, जिला अस्पताल।
केस-1 : एक सप्ताह पूर्व बिसंडा थाना क्षेत्र के गड़ाव गांव निवासी मुकुंदी (60) पत्नी भेाला को जिला अस्पताल में सांस लेने में परेशानी होने पर भर्ती कराया गया था। फौरी तौर पर उपचार के बाद ऑक्सीजन दिया गया। बाद में मेडिकल काॅलेज के लिए रेफर कर दिया गया।
-केस-2 :एक सप्ताह पूर्व इंगुवामऊ गांव निवासी रीता देवी (24) और नरैनी क्षेत्र के पचोखर गांव निवासी उमा (22) को श्वांस रोग से पीड़ित होने पर जिला अस्पताल में भर्ती किया गया था। वेंटिलेटर के जरिए ऑक्सीजन दिया गया था, लेकिन बाद में मेडिकल काॅलेज के लिए रेफर किया गया।
कोई स्पेशल वार्ड नहीं
सां के रोगियों को या फिर अन्य गंभीर मरीज को ऑक्सीजन देने के लिए कोई स्पेशल वेंटिलेटर वार्ड जिला अस्पताल में नहीं है। ट्राॅमा सेंटर में लगे चार वेंटिलेटरों के जरिए ही गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन दी जाती है। कुछ घंटे तक ऑक्सीजन देने के बाद दूसरा मरीज आने पर पहले मरीज को रेफर कर दिया जाता है। तीमारदार अपने मरीज को लेकर मेडिकल कॉलेज या फिर प्राइवेट अस्पताल जाने को मजबूर होते हैं।
ओपीडी में 1200 और इमरजेंसी में आते 300 मरीज
जिला पुरुष अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 1200 से अधिक मरीज अपना रजिस्ट्रेशन कराकर डॉक्टर से इलाज कराते हैं।। सर्दी बढ़ने के साथ ही सांस के रोगी भी अस्पताल पहुंच रहे हैं। ट्राॅमा सेंटर में संचालित इमरजेंसी सेवा में प्रतिदिन 300 से 400 मरीज उपचार कराते हैं।
2021 में आए थे वेंटिलेटर
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. एसडी त्रिपाठी का कहना है कि कोरोना काल के दौरान वर्ष 2021 में वेंटिलेटर जिला अस्पताल को दिए गए थे। विधायक निधि, सांसद निधि और प्रधानमंत्री केयर फंड समेत अन्य संस्थाओं का सहयोग भी इन वेंटिलेटरों में शामिल रहा। वर्ष 2022 में ज्यादातर वेंटिलेटर खराब हो गए। 28 में से 24 वेंटिलेटरों की मरम्मत के लिए कंपनी के सदस्यों ने सर्वे किया है, जल्द ही इनकी मरम्मत कराई जाएगी। अब सिर्फ चार वेंटिलेटर ही ट्राॅमा सेंटर में संचालित हैं।