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पानी के लिए बंदी कर सकते हैं विद्रोह
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बांदा। मंडल मुख्यालय के साथ ही जेल में भी पेयजल संकट गंभीर हो गया है। पानी को लेकर जेल में बंदियों का विद्रोह और शांतिभंग के आसार नजर आने लगे हैं। जेल अधिकारियों ने इसे भांपते हुए जिला प्रशासन और जल संस्थान को पत्र भेजकर हालात से आगाह कराया है। जेल में बंदी और परिसर में रहने वाले जेलकर्मी करीब एक माह से पानी के लिए जूझ रहे हैं।
जेल में इन दिनों 800 से अधिक सजायाफ्ता व विचाराधीन बंदी हैं। जेल अधिकारियों के अनुसार प्रति बंदी को नहाने और पीने के लिए औसतन रोजाना 20 लीटर पानी की जरूरत होती है, यानी प्रतिदिन 16 हजार लीटर पानी चाहिए। जल संस्थान की पाइप लाइन और जेल में स्थित ट्यूबवेल से पेयजल आपूर्ति होती है, लेकिन इन दिनों दोनों ही अपनी क्षमता खो बैठे हैं। भूजल स्तर नीचे खिसक जाने से नलकूप ने पानी देना बंद कर दिया है।
जल संस्थान की पाइप लाइन में भी पर्याप्त पानी नहीं आ रहा। जेलकर्मी तो किसी तरह हैंडपंप से काम चला रहे हैं, लेकिन जेल के बंदियों में पानी की हायतौबा है। समाधान न होने से आक्रोश पनप रहा है। ये कभी भी भड़क सकते हैं। कारागार अधीक्षक आरके सिंह ने डीएम और जल संस्थान को पत्र भेजकर कहा है कि पेयजल समस्या का समाधान जल्द नहीं हुआ तो जेल में शांतिभंग होने का अंदेशा है।
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हैंडपंप पर कब्जा, मुलाकाती प्यासे
बांदा। जेल के बाहर मुलाकाती कक्ष के पास लगे सरकारी हैंडपंप पर जेल अधिकारियों ने कब्जा कर लिया है। हैंडपंप के हत्थे को हटवाकर मोटर और पाइप लाइन के जरिये पानी कालोनियों में भेजा जा रहा है। बंदियों से मिलने आने वाले सैकड़ों मुलाकातियों को रोजाना शिद्दत की गर्मी में प्यासा भटकना पड़ रहा है। जेल अधिकारियों के रहमोकरम पर परिसर के बाहर खुली दुकानों में दो से पांच रुपये पाउच पानी बिक रहा है।
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जेल में इन दिनों 800 से अधिक सजायाफ्ता व विचाराधीन बंदी हैं। जेल अधिकारियों के अनुसार प्रति बंदी को नहाने और पीने के लिए औसतन रोजाना 20 लीटर पानी की जरूरत होती है, यानी प्रतिदिन 16 हजार लीटर पानी चाहिए। जल संस्थान की पाइप लाइन और जेल में स्थित ट्यूबवेल से पेयजल आपूर्ति होती है, लेकिन इन दिनों दोनों ही अपनी क्षमता खो बैठे हैं। भूजल स्तर नीचे खिसक जाने से नलकूप ने पानी देना बंद कर दिया है।
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जल संस्थान की पाइप लाइन में भी पर्याप्त पानी नहीं आ रहा। जेलकर्मी तो किसी तरह हैंडपंप से काम चला रहे हैं, लेकिन जेल के बंदियों में पानी की हायतौबा है। समाधान न होने से आक्रोश पनप रहा है। ये कभी भी भड़क सकते हैं। कारागार अधीक्षक आरके सिंह ने डीएम और जल संस्थान को पत्र भेजकर कहा है कि पेयजल समस्या का समाधान जल्द नहीं हुआ तो जेल में शांतिभंग होने का अंदेशा है।
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हैंडपंप पर कब्जा, मुलाकाती प्यासे
बांदा। जेल के बाहर मुलाकाती कक्ष के पास लगे सरकारी हैंडपंप पर जेल अधिकारियों ने कब्जा कर लिया है। हैंडपंप के हत्थे को हटवाकर मोटर और पाइप लाइन के जरिये पानी कालोनियों में भेजा जा रहा है। बंदियों से मिलने आने वाले सैकड़ों मुलाकातियों को रोजाना शिद्दत की गर्मी में प्यासा भटकना पड़ रहा है। जेल अधिकारियों के रहमोकरम पर परिसर के बाहर खुली दुकानों में दो से पांच रुपये पाउच पानी बिक रहा है।