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एक्सप्रेसवे के पेड़ों का यूपीडा के पास नहीं ब्योरा
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बांदा। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे निर्माण में काटे जाने वाले पेड़ों के सवाल पर उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) का कहना है कि उसके पास इसकी कोई गणना या सूचना नहीं है। कार्य क्षेत्र में आने वाले पेड़ों को काटने का अधिकार संबंधित किसान का है। उधर, एक्सप्रेसवे के लिए खरीदी जा रही रही भूमि की रफ्तार अभी भी धीमी है। अब तक मात्र 72 फीसदी भूमि खरीदी गई है, जबकि अप्रैल में 90 फीसदी जमीन खरीद लेने का लक्ष्य था।
जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत समाजसेवी कुलदीप शुक्ला ने यूपीडा से सूचना मांगी थी कि बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे में किन-किन प्रजातियों के कुल कितने हरे वृद्ध काटे जाएंगे? इनकी कीमत क्या होगी? बेचेगा कौन? इस पर यूपीडा ने उपरोक्त जवाब दिया है। उधर, एक अन्य मांगी गई जानकारी में यूपीडा के तहसीलदार विनय कुमार मिश्र ने बताया है कि 20 मई 2019 तक बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के लिए 72.07 प्रतिशत भूमि खरीदी गई है। यह भी बताया है कि निर्माण कार्य अभी प्रारंभ नहीं हुआ।
गौरतलब है कि केेंद्र व प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का जो कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। उसके तहत बीते अप्रैल तक 90 फीसदी जमीन खरीदने का लक्ष्य निर्धारित था। यह लक्ष्य अभी किसी भी जिले में पूरा नहीं हुआ है। एक्सप्रेसवे बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, जालौन, औरैया और इटावा से गुजरेगा। इसके लिए इन सभी जिलों में कुल 3330.6536 हेक्टेयर भूमि ली जा रही है।
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जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत समाजसेवी कुलदीप शुक्ला ने यूपीडा से सूचना मांगी थी कि बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे में किन-किन प्रजातियों के कुल कितने हरे वृद्ध काटे जाएंगे? इनकी कीमत क्या होगी? बेचेगा कौन? इस पर यूपीडा ने उपरोक्त जवाब दिया है। उधर, एक अन्य मांगी गई जानकारी में यूपीडा के तहसीलदार विनय कुमार मिश्र ने बताया है कि 20 मई 2019 तक बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के लिए 72.07 प्रतिशत भूमि खरीदी गई है। यह भी बताया है कि निर्माण कार्य अभी प्रारंभ नहीं हुआ।
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गौरतलब है कि केेंद्र व प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का जो कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। उसके तहत बीते अप्रैल तक 90 फीसदी जमीन खरीदने का लक्ष्य निर्धारित था। यह लक्ष्य अभी किसी भी जिले में पूरा नहीं हुआ है। एक्सप्रेसवे बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, जालौन, औरैया और इटावा से गुजरेगा। इसके लिए इन सभी जिलों में कुल 3330.6536 हेक्टेयर भूमि ली जा रही है।
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