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पट्टा रजिस्ट्री न कराने पर दो खदानों के 14 करोड़ जब्त
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बांदा। निर्धारित अवधि में बालू खदान के पट्टे की रजिस्ट्री/भूलेख न करा पाने पर दो खदानों की जमा की गई 14 करोड़ से ज्यादा धनराशि जब्त कर ली गई है। ये खदानें पैलानी तहसील और सदर तहसील की हैं।
डीएम अमित सिंह बंसल ने बताया कि पैलानी तहसील में सांड़ी खादर (गाटा संख्या-60, रकबा 18 हेक्टेयर) का सहमति पत्र जारी हुआ था। इसके बाद 31 जनवरी 2020 को पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त हुई। उसके बाद भी खनन पट्टे की रजिस्ट्री नहीं कराई गई।
बताया कि यह खदान एसजी प्रोजेक्ट्स लिमिटेड, निदेशक नेहा सिंह पत्नी अजय सिंह (कोलकाता, पश्चिम बंगाल) के नाम है। निर्धारित अवधि में रजिस्ट्री न करा पाने पर इस खदान के लिए जमा की गई धनराशि 5 करोड़ 43 लाख 60 हजार रुपये सरकार के पक्ष में जब्त कर लिए हैं। डीएम ने 17 जून को जारी सहमति पत्र निरस्त कर दिया है।
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इसी तरह सदर तहसील की मरौली गांव में स्थित खदान (गाटा संख्या- 333/7 का भाग व 421 व 426/30, कुल रकबा- 23 हेक्टेयर) का ठेका आवेदन मेसर्स केएंडएस माइंस की पार्टनर कत्यैना शर्मा पुत्री स्व. आरके शर्मा (ग्रेटर कैलाश, नई दिल्ली) ने लिया था।
इन्होंने भी 28 फरवरी को पर्यावरण स्वच्छता प्रमाणपत्र प्राप्त होने के बाद निर्धारित अवधि में खनन पट्टा भूलेख/रजिस्ट्री नहीं कराई। इस पर इनके पक्ष में जारी सहमति पत्र 17 जून को निरस्त करते हुए जमा धनराशि 8 करोड़ 62 लाख 50 हजार रुपये राज्य सरकार के पक्ष में जब्त कर ली गई है।
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डीएम अमित सिंह बंसल ने बताया कि पैलानी तहसील में सांड़ी खादर (गाटा संख्या-60, रकबा 18 हेक्टेयर) का सहमति पत्र जारी हुआ था। इसके बाद 31 जनवरी 2020 को पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त हुई। उसके बाद भी खनन पट्टे की रजिस्ट्री नहीं कराई गई।
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बताया कि यह खदान एसजी प्रोजेक्ट्स लिमिटेड, निदेशक नेहा सिंह पत्नी अजय सिंह (कोलकाता, पश्चिम बंगाल) के नाम है। निर्धारित अवधि में रजिस्ट्री न करा पाने पर इस खदान के लिए जमा की गई धनराशि 5 करोड़ 43 लाख 60 हजार रुपये सरकार के पक्ष में जब्त कर लिए हैं। डीएम ने 17 जून को जारी सहमति पत्र निरस्त कर दिया है।
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इसी तरह सदर तहसील की मरौली गांव में स्थित खदान (गाटा संख्या- 333/7 का भाग व 421 व 426/30, कुल रकबा- 23 हेक्टेयर) का ठेका आवेदन मेसर्स केएंडएस माइंस की पार्टनर कत्यैना शर्मा पुत्री स्व. आरके शर्मा (ग्रेटर कैलाश, नई दिल्ली) ने लिया था।
इन्होंने भी 28 फरवरी को पर्यावरण स्वच्छता प्रमाणपत्र प्राप्त होने के बाद निर्धारित अवधि में खनन पट्टा भूलेख/रजिस्ट्री नहीं कराई। इस पर इनके पक्ष में जारी सहमति पत्र 17 जून को निरस्त करते हुए जमा धनराशि 8 करोड़ 62 लाख 50 हजार रुपये राज्य सरकार के पक्ष में जब्त कर ली गई है।