{"_id":"62852f4aabaa461763438215","slug":"13-blocks-semi-critical-in-the-mandal-due-to-groundwater-exploitation-banda-news-knp697526617","type":"story","status":"publish","title_hn":"भूजल दोहन से मंडल में 13 ब्लॉक सेमी क्रिटिकल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भूजल दोहन से मंडल में 13 ब्लॉक सेमी क्रिटिकल
विज्ञापन
बांदा। देश में सबसे ज्यादा तपने वाले बुंदेलखंड में अधिक भूजल दोहन पानी संकट मंडरा रहा है। चित्रकूटधाम मंडल में भूजल की उपलब्धता में तेजी से कमी आ रही है। चारों जिलों के कुल 24 ब्लॉकों में 13 ब्लॉक सेमी क्रिटिकल श्रेणी में पहुंच गए हैं। सबसे बुरी हालत महोबा और चित्रकूट जिलों की है। महोबा जनपद के दो ब्लॉक जैतपुर व पनवाड़ी अति दोहन क्षेत्र (डार्क जोन) और चित्रकूट का कर्वी ब्लॉक क्रिटिकल श्रेणी में है। यही हाल रहा तो और भी ब्लॉक डार्क जोन में पहुंच जाएंगे।
बांदा जनपद में कुल आठ ब्लॉक हैं। इसका क्षेत्रफल 4,40,460 हेक्टेयर है। भूजल स्तर बढ़ाने की कवायदों में यहां हर वर्ष 63,068.34 हेक्टेयर मीटर पानी रिचार्ज होने और 41,010.61 हेक्टेयर मीटर दोहन का दावा किया गया है। भूजल उपलब्धता 21,563.31 हेक्टेयर मीटर बताई गई है। इसमें घरेलू उपयोग में हो रहे भूजल दोहन का आंकड़ा शामिल नहीं है। इसी तरह चित्रकूट में 3,00,665 हेक्टेयर में 6174.29 हेक्टेयर मीटर पानी उपलब्ध है। वहीं, रिचार्ज 37,637.50 और दोहन 31,111.37 हेक्टेयर मीटर है। हमीरपुर में 3,81,540 हेक्टेयर है। रिचार्ज 49,274 हेक्टेयर मीटर होता है। दोहन 33,554.56 हेक्टेयर मीटर है। भूजल उपलब्धता 15,590.73 हेक्टेयर मीटर दर्शाया गया है। महोबा जनपद में 2,29,341 हेक्टेयर में 20,083.16 हेक्टेयर मीटर भूजल रिचार्ज होना बताया गया है। जबकि भूजल दोहन 18,791.58 और उपलब्धता 1993.42 हेक्टेयर मीटर है।
मंडल में भूजल दोहन से ब्लॉकों की स्थिति
बांदा : कुल आठ ब्लॉक हैं। भूजल दोहन अधिक होने से बबेरू, जसपुरा, नरैनी और तिंदवारी ब्लॉक सेमी क्रिटिकल श्रेणी में हैं।
चित्रकूट : कुल पांच ब्लॉक हैं। कर्वी ब्लॉक क्रिटिकल श्रेणी में है। मऊ, पहाड़ी व रामनगर ब्लॉक सेमी क्रिटिकल श्रेणी में आ गए हैं।
हमीरपुर : कुल सात ब्लॉक हैं। गोहांड, राठ, सरीला और सुमेरपुर सेमी क्रिटिकल श्रेणी में हैं।
महोबा : कुल चार ब्लॉक हैं। जैतपुर व पनवाड़ी ब्लॉक अति दोहन (डार्क जोन) श्रेणी में हैं। चरखारी और कबरई ब्लॉक सेमी क्रिटिकल श्रेणी में शामिल हैं।
वर्जन
गर्मी में भूजल स्तर काफी नीचे चला जाता है। भूजल स्तर बढ़ाने के लिए वाटर रिचार्ज के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। सरकारी भवनों की छतों पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने पर जोर दिया जा रहा है। कई भवनों में सिस्टम लगे हैं। तालाबों और कुओं को संवारने के साथ खेतों में मेड़बंदी पर भी जोर है। - एमए जैदी, अधिशासी अभियंता, भूगर्भ जल विभाग, बांदा।
विज्ञापन
विज्ञापन
बांदा जनपद में कुल आठ ब्लॉक हैं। इसका क्षेत्रफल 4,40,460 हेक्टेयर है। भूजल स्तर बढ़ाने की कवायदों में यहां हर वर्ष 63,068.34 हेक्टेयर मीटर पानी रिचार्ज होने और 41,010.61 हेक्टेयर मीटर दोहन का दावा किया गया है। भूजल उपलब्धता 21,563.31 हेक्टेयर मीटर बताई गई है। इसमें घरेलू उपयोग में हो रहे भूजल दोहन का आंकड़ा शामिल नहीं है। इसी तरह चित्रकूट में 3,00,665 हेक्टेयर में 6174.29 हेक्टेयर मीटर पानी उपलब्ध है। वहीं, रिचार्ज 37,637.50 और दोहन 31,111.37 हेक्टेयर मीटर है। हमीरपुर में 3,81,540 हेक्टेयर है। रिचार्ज 49,274 हेक्टेयर मीटर होता है। दोहन 33,554.56 हेक्टेयर मीटर है। भूजल उपलब्धता 15,590.73 हेक्टेयर मीटर दर्शाया गया है। महोबा जनपद में 2,29,341 हेक्टेयर में 20,083.16 हेक्टेयर मीटर भूजल रिचार्ज होना बताया गया है। जबकि भूजल दोहन 18,791.58 और उपलब्धता 1993.42 हेक्टेयर मीटर है।
विज्ञापन
मंडल में भूजल दोहन से ब्लॉकों की स्थिति
बांदा : कुल आठ ब्लॉक हैं। भूजल दोहन अधिक होने से बबेरू, जसपुरा, नरैनी और तिंदवारी ब्लॉक सेमी क्रिटिकल श्रेणी में हैं।
चित्रकूट : कुल पांच ब्लॉक हैं। कर्वी ब्लॉक क्रिटिकल श्रेणी में है। मऊ, पहाड़ी व रामनगर ब्लॉक सेमी क्रिटिकल श्रेणी में आ गए हैं।
हमीरपुर : कुल सात ब्लॉक हैं। गोहांड, राठ, सरीला और सुमेरपुर सेमी क्रिटिकल श्रेणी में हैं।
महोबा : कुल चार ब्लॉक हैं। जैतपुर व पनवाड़ी ब्लॉक अति दोहन (डार्क जोन) श्रेणी में हैं। चरखारी और कबरई ब्लॉक सेमी क्रिटिकल श्रेणी में शामिल हैं।
वर्जन
गर्मी में भूजल स्तर काफी नीचे चला जाता है। भूजल स्तर बढ़ाने के लिए वाटर रिचार्ज के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। सरकारी भवनों की छतों पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने पर जोर दिया जा रहा है। कई भवनों में सिस्टम लगे हैं। तालाबों और कुओं को संवारने के साथ खेतों में मेड़बंदी पर भी जोर है। - एमए जैदी, अधिशासी अभियंता, भूगर्भ जल विभाग, बांदा।
विज्ञापन