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टैक्स के 12 करोड़ रुपये दाब गए बालू ठेकेदार
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
Updated Sun, 18 Nov 2018 11:24 PM IST
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बांदा में नदी घाटों में चल रहा बालू का खनन।
- फोटो : अमर उजाला
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बालू खदानों का ठेका लेने वाली फर्में और ठेकेदार सिर्फ पर्यावरण को ही नुकसान नहीं पहुंचा रहे, बल्कि करोड़ों रुपये के राजस्व की भी चपत लगा रहे हैं। खदानें लेकर जमा की गई रायल्टी की पहली किस्त के 40 करोड़ 90 लाख 80 हजार रुपये की 18 फीसदी जीएसटी, दो फीसदी आयकर और 10 फीसदी रूरल डेवलपमेंट की रकम लगभग 12 करोड़ रुपये नहीं जमा की गई। यह स्थिति अप्रैल तक की थी। इसका खुलासा जिला खनिज अधिकारी द्वारा वाणिज्य कर के डिप्टी कमिश्नर को भेजे पत्र में हुआ।
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बांदा जिले की 10 खदानें ई-टेंडर के जरिये ठेके पर पांच साल के लिए दी गई हैं। 10 में से 9 खदानें बाहरी फर्मों ने ली हैं। सभी ने मार्च तक अपनी खदानों की रायल्टी की पहली किस्त 40 करोड़ 90 लाख 80 हजार रुपये खनिज विभाग के खजाने में जमा की थी। पिछले दिनों डिप्टी कमिश्नर वाणिज्य कर, बांदा संभाग ने खनिज अधिकारी से यह जानकारी मांगी थी कि रायल्टी जमा करने वाले ठेकेदारों ने जीएसटी जमा की या नहीं। खनिज अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने 24 मार्च को डिप्टी कमिश्नर वाणिज्य कर को भेजे पत्र में सभी 10 खदानों द्वारा जमा की गई रायल्टी की रकम का ब्योरा दिया है। इसमें बताया है कि किसी भी फर्म ने रायल्टी पर जीएसटी जमा नहीं की है।
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जमा रायल्टी पर 18 फीसदी की दर से जीएसटी की कुल रकम 7 करोड़ 36 लाख 34 हजार 400 रुपये अदा होनी चाहिए। दो फीसदी आयकर की रकम 81 लाख 81 हजार 600 रुपये जमा होना था। इसके अलावा बालू के ट्रकों आदि से टूटफूट रही सड़कों आदि की भरपाई के लिए 10 फीसदी की दर से रूरल डेवलपमेंट शुल्क 4 करोड़ 9 लाख 8 हजार रुपये जमा होने चाहिए थे। इस प्रकार कुल टैक्स 12 करोड़ रुपये से अधिक है। पहली किस्त के साथ बालू ठेकेदारों ने इसे पिछले वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक जमा नहीं किया था। उधर, ताजा स्थिति की जानकारी और पक्ष जानने के लिए जिला खनिज अधिकारी से कई बार फोन पर संपर्क किए जाने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। खनिज प्रभारी एडीएम का भी फोन रिसीव नहीं हुआ।
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जमा रायल्टी, जिस पर नहीं दिया टैक्स
1. अतीक उल्ला (हथौरा) सिंधनकलां 6,56,47,050
2. आशीष इंटरप्राइजेज (झांसी) दुरेड़ी 5,78,40,000
3. पीके ट्रेडर्स (बांदा) रिसौरा 5,51,70,000
4. जय अंबे कांस्ट्रक्शन (मुरैना) सादीमदनपुर 4,63,14,000
5. इंदौर प्रापर्टी प्रा.लि. (इंदौर) कोलावल रायपुर 4,31,00,000
6. रंजीत सिंह (झांसी) सादीमदनपुर 3,80,46,000
7. स्टारनेट मार्केटिंग (कोलकाता) कोलावलरायपुर 3,76,00,000
8. डिजियाना माइनिंग (इंदौर) भदावल 2,85,02,950
9. डिजियाना माइनिंग (इंदौर) लोहरा 1,92,10,000
10. इंदौर प्रापर्टी (इंदौर) बदौसा 1,76,50,000
एक करोड़ की टैक्स चोरी पर जेल का प्रावधान
आयकर विभाग के वरिष्ठ अधिवक्ता बीएम गुप्ता का कहना है कि चित्रकूटधाम मंडल और खासकर बांदा में खनिज संपदा की लूट मची है। इसमें सत्ता पक्ष भी शामिल है। उन्होंने कहा कि नीलामी में बालू की दरें निर्धारित सरकारी रायल्टी से छह गुना अधिक ली गई है। ठेकेदारों से कोई टैक्स जमा नहीं कराया गया। खनिज अधिकारी ने मार्च में वाणिज्यकर विभाग को लिखित रूप से यह जानकारी दी है।
अधिकांश ठेकेदार अब घाटा बताकर सिक्योरिटी निकालकर भागने की फिराक में हैं। खनिज अधिकारी की मिलीभगत से राजस्व को हानि पहुंचा रहे हैं। आयकर अधिवक्ता ने कहा कि जीएसटी में प्रावधान है कि एक करोड़ से अधिक से कर अपवंचन (टैक्स चोरी) की स्थिति में व्यापारी को जेल भेजा जाए। सीजीएसटी और एसजीएसटी विभाग ठेकेदारों के भागने की प्रतीक्षा कर रहा है, ताकि उनसे वसूली न की जा सके। अधिकांश ठेकेदार बाहर के हैं, जिन्होंने फर्जी दस्तावेज से ठेके लिए हैं। मलाई खाकर भाग सकते हैं।