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चित्रकूटधाम मंडल में 11 पाइप पेयजल योजनाएं अधूरी

Fri, 23 Feb 2018 11:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो , बांदा
अमर उजाला ब्यूरो , बांदा Updated Fri, 23 Feb 2018 11:29 PM IST
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11 piped drinking water schemes in Chitrakootham mandal incomplete
water problem - फोटो : Bureau

बुंदेलखंड की पेयजल समस्या पर प्रदेश सरकार के मंत्रियों का समूह रविवार (25 फरवरी) को उरई में मंथन करेगा। चित्रकूटधाम और झांसी मंडल के अफसर पेयजल योजनाओं की फाइलें अपडेट और दुरुस्त करने में जुटे हैं। चित्रकूटधाम मंडल में पाइप लाइन से गांवों और बस्तियों को पेयजल आपूर्ति करने के लिए 25 योजनाएं स्वीकृत हुई थीं। इनमें अभी 11 अधूरी हैं। शासन ने इन योजनाओं के लिए 15 अरब 72 करोड़ 76 लाख रुपये स्वीकृत किए थे। इस पर 9 अरब 11 करोड़ 24 लाख रुपये मिले हैं। जल निगम और जल संस्थान 8 अरब 26 करोड़ 53 लाख खर्च कर दिए हैं। अधूरी योजनाओं को पूरा करने के लिए 6 अरब 60 करोड़ 92 लाख रुपये की दरकार है। सबसे ज्यादा 4-4 परियोजनाएं बांदा और हमीरपुर में अधूरी हैं।

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गर्मी के दस्तक देते ही हर साल शासन और प्रशासन स्तर पर बुंदेलखंड की सुध ली जाने लगती है। यह वैसी ही कहावत है कि ‘प्यास लगने पर कुआं खोदना’। 25 फरवरी को उरई के विकास भवन में प्रदेश के ग्राम विकास और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री महेंद्र सिंह सहित कई मंत्रियों का समूह बुंदेलखंड के दोनों मंडलों की पेयजल योजनाओं की समीक्षा करेंगे। इसमें बुंदेलखंड के सभी सांसद, विधायक भी शामिल होंगे। जल निगम, जल संस्थान, केन कैनाल, सिंचाई प्रखंड, लघु डाल नहर, लघु सिंचाई, नलकूप खंड, विद्युत वितरण खंड और जिला पंचायत राज विभागों के अधिकारी तैयारियों में जुट गए हैं। मंत्रियों का समूह राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम की भी समीक्षा करेगा।
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उधर, चित्रकूटधाम मंडल में पाइप के जरिये गांव और बस्तियों में पानी पहुंचाने के लिए हाल के वर्षों में 20 योजनाएं मंजूर हुई थीं। पिछले वित्तीय वर्ष में इनके लिए 15 अरब 72 करोड़ 76 लाख स्वीकृत हुए थे। शासन ने 9 अरब 11 करोड़ 24 लाख अवमुक्त भी कर दिए। जल निगम ने पिछले वर्ष तक 8 अरब 26 करोड़ 53 लाख रुपये खर्च किए थे। साथ ही शेष 6 अरब 60 करोड़ 92 लाख की पिछले वर्ष दरकार की थी। फिलहाल योजनाओं से गांवों की प्यास बुझाने का काम वास्तविक तौर पर शुरू नहीं हो पाया है।
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चारों जिलों ने खर्च कर दिए 8.26 अरब
बांदा। मंडल की 20 पाइप पेयजल योजनाओं में हमीरपुर की 7, महोबा की 6, बांदा की 5 और चित्रकूट की दो योजनाएं शामिल हैं। जल निगम के आंकड़ों के मुताबिक बांदा में चार, चित्रकूट में एक, महोबा में दो और हमीरपुर में चार योजनाएं अभी चालू नहीं हो पाईं। ये निर्माणाधीन हैं। बांदा के लिए 34.77 करोड़, चित्रकूट के लिए 2 अरब 52 करोड़ 73 लाख, महोबा के लिए 12 अरब 72 करोड़ 14 लाख और हमीरपुर के लिए 12 करोड़ 52 लाख स्वीकृत हुए।


4940 हैंडपंप रिबोर योग्य, 2493 अस्थाई खराब
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में पाइप पेयजल योजनाओं के अलावा हैंडपंपों से भी शहर और गांवों में प्यास बुझाई जा रही है। जल निगम के आंकड़ों के मुताबिक मंडल के चारों जिलों में 88,875 हैंडपंप हैं। पिछली मई में मुख्यमंत्री की बांदा में हुई समीक्षा बैठक में बताया गया था कि 82,152 हैंडपंप चालू हैं। 4940 हैंडपंप रिबोर योग्य हैं। 2493 हैंडपंपों को अस्थाई खराब बताया गया था। इसके अलावा टैंकरों की उपलब्धता में बताया गया था कि जल निगम के पास 13, जल संस्थान के पास 128 और ग्राम पंचायतों के पास 909 टैंकर हैं।

 

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