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शौचालय निर्माण में 24.79 लाख का घोटाला
Updated Sun, 05 Nov 2017 12:18 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बनवाए जा रहे शौचालयों में पांच गांवों के प्रधान, सचिव और खंड प्रेरक ने 24.79 लाख रुपये का गबन कर लिया। जांच में इसका खुलासा होने पर जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) ने दो ग्राम प्रधानों सहित तीन सचिव और एक खंड प्रेरक को नोटिस देकर तीन दिन के अंदर जवाब मांगा है। संतोषजनक उत्तर न मिलने पर गबन की रिपोर्ट दर्ज कराने की चेतावनी दी है।
डीएम के निर्देश पर डीपीआरओ ने महुआ ब्लाक में नंदना व अर्जुनाह ग्राम पंचायत और बबेरू ब्लाक में अधांव और जसपुरा ब्लाक के डांड़ामऊ व पिपरोदर गांवों में बनवाए गए शौचालयों का निरीक्षण किया। नंदना में 55 शौचालय पूरे मिले, लेकिन लाभार्थियों की ऑनलाइन फीडिंग नहीं कराई गई और न ही अगली किस्त मांगी गई। अर्जुनाह गांव में 20 शौचालयों के लिए 2.40 लाख रुपये 9 जून को दिए गए। लेकिन एक भी शौचालय नहीं बना। जबकि खाते से 1,81,922 रुपये निकाले जा चुके हैं। इस पर ग्राम पंचायत सचिव जीत कुमार, खंड प्रेरक श्रवण कुमार शुक्ला और अर्जुनाह ग्राम प्रधान शिव प्रसाद को डीपीआरओ ने नोटिस जारी करते हुए तीन दिन में स्पष्टीकरण न मिलने पर गबन की रिपोर्ट दर्ज कराने की चेतावनी दी है।
बबेरू ब्लाक की ग्राम पंचायत अधांव में 20 शौचालयों के लिए के लिए 3 लाख रुपये भेजे गए। इसमें 4-4 हजार की लागत से शौचालयों के साथ पानी की टंकी भी बननी थी। लेकिन सचिव श्रीकांत गुप्ता ने शौचालय बनवाए बिना ही खाते से 2.97 लाख रुपये निकाल लिए। एक सप्ताह में संतोषजनक जवाब न देने पर सचिव के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील 1999) के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई और गबन की गई धनराशि की रिपोर्ट थाने में लिखाकर वेतन से वसूली की चेतावनी दी गई है।
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जसपुरा ब्लाक के डांड़ामऊ ग्राम पंचायत में पिछले साल 30 शौचालयों के लिए 3.60 लाख तथा इस साल 92 शौचालयों के लिए 11.4 लाख रुपये व 125 शौचालयों में टंकी आदि बनवाने के लिए 5 लाख रुपये दिए गए। कुल 247 शौचालयों के लिए 19.64 लाख मिले। डीपीआरओ की जांच में महज 55 शौचालय अधूरे मिले। निर्माण मानक के विपरीत पाए गए। डांड़ामऊ में 5.24 लाख रुपये का दुरुपयोग मिला।
ग्राम प्रधान सीता व सचिव विचित्र वीर को गबन के आरोप की नोटिस दी गई है। इसी ब्लाक के पिपरोदर गांव में वर्ष 2015-16 में 100 शौचालयों के लिए 12 लाख, वर्ष 2016-17 में 45 शौचालयों के लिए 5.40 लाख और इस साल 35 शौचालयों के लिए 4.20 लाख तथा 50 शौचालयों में टंकी आदि के लिए दो लाख रुपये दिए गए। कुल 230 शौचालयों शौचालयों के लिए पिपरोदर को 23.60 लाख भेजे गए। इनमें महज 98 शौचालय बने मिले। ये भी मानक व डिजाइन के मुताबिक नहीं हैं। सचिव विचित्रवीर व ग्राम प्रधान रमजान खां पर 8.23 लाख रुपये के गबन की नोटिस दी गई है।
‘शौचालयों की धनराशि में लाखों रुपये के दुरुपयोग की रिपोर्ट उप निदेशक व जिलाधिकारी को भेजी है। खंड विकास अधिकारी जसपुरा, महुआ व बबेरू को नोटिस तामील कराने को कहा गया है। निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलता तो एफआईआर दर्ज कराकर प्रधान व सचिवों से रिकवरी की जाएगी।’
केके सिंह चौहान, जिला पंचायत राज अधिकारी, बांदा
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बांदा। स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बनवाए जा रहे शौचालयों में पांच गांवों के प्रधान, सचिव और खंड प्रेरक ने 24.79 लाख रुपये का गबन कर लिया। जांच में इसका खुलासा होने पर जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) ने दो ग्राम प्रधानों सहित तीन सचिव और एक खंड प्रेरक को नोटिस देकर तीन दिन के अंदर जवाब मांगा है। संतोषजनक उत्तर न मिलने पर गबन की रिपोर्ट दर्ज कराने की चेतावनी दी है।
डीएम के निर्देश पर डीपीआरओ ने महुआ ब्लाक में नंदना व अर्जुनाह ग्राम पंचायत और बबेरू ब्लाक में अधांव और जसपुरा ब्लाक के डांड़ामऊ व पिपरोदर गांवों में बनवाए गए शौचालयों का निरीक्षण किया। नंदना में 55 शौचालय पूरे मिले, लेकिन लाभार्थियों की ऑनलाइन फीडिंग नहीं कराई गई और न ही अगली किस्त मांगी गई। अर्जुनाह गांव में 20 शौचालयों के लिए 2.40 लाख रुपये 9 जून को दिए गए। लेकिन एक भी शौचालय नहीं बना। जबकि खाते से 1,81,922 रुपये निकाले जा चुके हैं। इस पर ग्राम पंचायत सचिव जीत कुमार, खंड प्रेरक श्रवण कुमार शुक्ला और अर्जुनाह ग्राम प्रधान शिव प्रसाद को डीपीआरओ ने नोटिस जारी करते हुए तीन दिन में स्पष्टीकरण न मिलने पर गबन की रिपोर्ट दर्ज कराने की चेतावनी दी है।
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बबेरू ब्लाक की ग्राम पंचायत अधांव में 20 शौचालयों के लिए के लिए 3 लाख रुपये भेजे गए। इसमें 4-4 हजार की लागत से शौचालयों के साथ पानी की टंकी भी बननी थी। लेकिन सचिव श्रीकांत गुप्ता ने शौचालय बनवाए बिना ही खाते से 2.97 लाख रुपये निकाल लिए। एक सप्ताह में संतोषजनक जवाब न देने पर सचिव के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील 1999) के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई और गबन की गई धनराशि की रिपोर्ट थाने में लिखाकर वेतन से वसूली की चेतावनी दी गई है।
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जसपुरा ब्लाक के डांड़ामऊ ग्राम पंचायत में पिछले साल 30 शौचालयों के लिए 3.60 लाख तथा इस साल 92 शौचालयों के लिए 11.4 लाख रुपये व 125 शौचालयों में टंकी आदि बनवाने के लिए 5 लाख रुपये दिए गए। कुल 247 शौचालयों के लिए 19.64 लाख मिले। डीपीआरओ की जांच में महज 55 शौचालय अधूरे मिले। निर्माण मानक के विपरीत पाए गए। डांड़ामऊ में 5.24 लाख रुपये का दुरुपयोग मिला।
ग्राम प्रधान सीता व सचिव विचित्र वीर को गबन के आरोप की नोटिस दी गई है। इसी ब्लाक के पिपरोदर गांव में वर्ष 2015-16 में 100 शौचालयों के लिए 12 लाख, वर्ष 2016-17 में 45 शौचालयों के लिए 5.40 लाख और इस साल 35 शौचालयों के लिए 4.20 लाख तथा 50 शौचालयों में टंकी आदि के लिए दो लाख रुपये दिए गए। कुल 230 शौचालयों शौचालयों के लिए पिपरोदर को 23.60 लाख भेजे गए। इनमें महज 98 शौचालय बने मिले। ये भी मानक व डिजाइन के मुताबिक नहीं हैं। सचिव विचित्रवीर व ग्राम प्रधान रमजान खां पर 8.23 लाख रुपये के गबन की नोटिस दी गई है।
‘शौचालयों की धनराशि में लाखों रुपये के दुरुपयोग की रिपोर्ट उप निदेशक व जिलाधिकारी को भेजी है। खंड विकास अधिकारी जसपुरा, महुआ व बबेरू को नोटिस तामील कराने को कहा गया है। निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलता तो एफआईआर दर्ज कराकर प्रधान व सचिवों से रिकवरी की जाएगी।’
केके सिंह चौहान, जिला पंचायत राज अधिकारी, बांदा