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पानी के अवैध कारोबार से घट रहा जलस्तर
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बलरामपुर में बेंचा जा रहा आरओ प्लांट का पानी।
- फोटो : BALRAMPUR
बलरामपुर। पानी के अवैध कारोबार से लगातार जलस्तर घट रहा है। पहले जहां लोगों को बोरिंग करने पर 40 फीट पर ही पानी मिल जाता था वहीं अब 60 फीट के नीचे ही पानी मिल पाता है। आरओ प्लांट के नाम शहर व ग्रामीण क्षेत्र में धड़ल्ले से जल दोहन किया जा रहा है। संबंधित विभाग इस पर शिकंजा कसने में नाकाम है। जिले में 100 से अधिक आरओ प्लांट लगे हुए हैं। इनमें से अधिकांश के पास लाइसेंस नहीं है। अधिकांश प्लांट लैब टेस्ट कराए बिना ही संचालित हो रहे हैं। तत्वविहीन पानी के सेवन से लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
आरओ प्लांट का कारोबार कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने का सबसे सटीक तरीका बनता जा रहा है। जिले में 100 से अधिक आरओ प्लांट संचालित हैं। स्टेनलेस स्टील के 500 लीटर का आरओ प्लांट लगाने में करीब तीन से चार लाख रुपये लागत आती है जबकि एफआरपी प्लांट में महज डेढ़ लाख रुपये खर्च आता है। लागत कम एवं मुनाफा अधिक कमाने के चक्कर में संचालक प्लास्टिक के प्लांट लगाकर लोगों को बीमारियां बांट रहे हैैं।
20 लीटर पानी के वसूलते हैं 20 से 30 रुपये
जिले में कुटीर उद्योग की तरह पनप रहे मिनर वाटर प्लांट के कारोबारी 20 लीटर पानी के लिए उपभोक्ताओं से 20 से 30 रुपये वसूल रहे हैं। होम डिलेवरी की सुविधा मिलने के कारण स्कूल, कार्यालय, दुकान व घरों में आरओ का डिब्बा रखा मिल जाता है। आसानी से एवं कम दाम पर मिलने के कारण शुद्ध पानी जानकर लोग इसे भरपूर मात्रा में प्रयोग करते हैं। प्लांट संचालक मिनरल वाटर के नाम पर आरओ प्लांट का पानी पिला रहे हैं।
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इन विभागों से लेना पड़ता है अनापत्ति प्रमाण पत्र
1. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
2. व्यापार कर
3. खाद्य सुरक्षा विभाग
4. वाटर फिलिंग एंड पैकेजिंग विभाग
अवैध कारोबारियों पर कसा जाए शिकंजा
उपभोक्ता अविनाश कुमार, राज त्रिपाठी, अरुण चौहान व पंकज पांडेय आदि का कहना है कि आधुनिक युग में डॉक्टर से लेकर विशेषज्ञ तक शुद्ध पानी पीने की सलाह दे रहे हैं। शुद्ध पानी मानकर ही हम लोग 20 से 30 रुपये खर्च करके मिनरल वाटर का पानी लेते हैं। पानी जांचने की मशीन उपलब्ध न होने के कारण उसके गुणवत्ता की जानकारी नहीं हो पाती है। जिम्मेदार अफसरों को आरओ प्लांट संचालकों के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाना चाहिए। पानी की नियमित जांच होनी चाहिए। उपभोक्ताओं के सेहत के साथ खिलवाड़ करने का हक किसी के पास नहीं है।
कम टीडीएस का पानी है खतरनाक
पीने के पानी का टीडीएस संतुलन होना ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। 70 से 80 टीडीएस का पानी सेहत के लिए फायदेमंद माना गया है। अक्सर यह देखा जा रहा है कि शहर में शुद्ध पानी के नाम पर बिकने वाले मिनरल वाटर का टीडीएस 20 से 30 ही रहता है। इस टीडीएस का पानी सेहत के लिए हानिकारक है।- डॉ. गिरधर चौहान, फिजिशियन संयुक्त चिकित्सालय बलरामपुर।
जिले में संचालित सभी आरओ प्लांट की जांच जल्द ही अभियान चलाकर कराई जाएगी। बिना लैब टेस्ट कराए प्लांट चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आरओ प्लांट के कारोबारियों को संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना भी अनिवार्य है।- अरुण कुमार शुक्ला, एडीएम बलरामपुर
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आरओ प्लांट का कारोबार कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने का सबसे सटीक तरीका बनता जा रहा है। जिले में 100 से अधिक आरओ प्लांट संचालित हैं। स्टेनलेस स्टील के 500 लीटर का आरओ प्लांट लगाने में करीब तीन से चार लाख रुपये लागत आती है जबकि एफआरपी प्लांट में महज डेढ़ लाख रुपये खर्च आता है। लागत कम एवं मुनाफा अधिक कमाने के चक्कर में संचालक प्लास्टिक के प्लांट लगाकर लोगों को बीमारियां बांट रहे हैैं।
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20 लीटर पानी के वसूलते हैं 20 से 30 रुपये
जिले में कुटीर उद्योग की तरह पनप रहे मिनर वाटर प्लांट के कारोबारी 20 लीटर पानी के लिए उपभोक्ताओं से 20 से 30 रुपये वसूल रहे हैं। होम डिलेवरी की सुविधा मिलने के कारण स्कूल, कार्यालय, दुकान व घरों में आरओ का डिब्बा रखा मिल जाता है। आसानी से एवं कम दाम पर मिलने के कारण शुद्ध पानी जानकर लोग इसे भरपूर मात्रा में प्रयोग करते हैं। प्लांट संचालक मिनरल वाटर के नाम पर आरओ प्लांट का पानी पिला रहे हैं।
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इन विभागों से लेना पड़ता है अनापत्ति प्रमाण पत्र
1. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
2. व्यापार कर
3. खाद्य सुरक्षा विभाग
4. वाटर फिलिंग एंड पैकेजिंग विभाग
अवैध कारोबारियों पर कसा जाए शिकंजा
उपभोक्ता अविनाश कुमार, राज त्रिपाठी, अरुण चौहान व पंकज पांडेय आदि का कहना है कि आधुनिक युग में डॉक्टर से लेकर विशेषज्ञ तक शुद्ध पानी पीने की सलाह दे रहे हैं। शुद्ध पानी मानकर ही हम लोग 20 से 30 रुपये खर्च करके मिनरल वाटर का पानी लेते हैं। पानी जांचने की मशीन उपलब्ध न होने के कारण उसके गुणवत्ता की जानकारी नहीं हो पाती है। जिम्मेदार अफसरों को आरओ प्लांट संचालकों के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाना चाहिए। पानी की नियमित जांच होनी चाहिए। उपभोक्ताओं के सेहत के साथ खिलवाड़ करने का हक किसी के पास नहीं है।
कम टीडीएस का पानी है खतरनाक
पीने के पानी का टीडीएस संतुलन होना ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। 70 से 80 टीडीएस का पानी सेहत के लिए फायदेमंद माना गया है। अक्सर यह देखा जा रहा है कि शहर में शुद्ध पानी के नाम पर बिकने वाले मिनरल वाटर का टीडीएस 20 से 30 ही रहता है। इस टीडीएस का पानी सेहत के लिए हानिकारक है।- डॉ. गिरधर चौहान, फिजिशियन संयुक्त चिकित्सालय बलरामपुर।
जिले में संचालित सभी आरओ प्लांट की जांच जल्द ही अभियान चलाकर कराई जाएगी। बिना लैब टेस्ट कराए प्लांट चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आरओ प्लांट के कारोबारियों को संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना भी अनिवार्य है।- अरुण कुमार शुक्ला, एडीएम बलरामपुर