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Balrampur News: आबादी में न हो दंगल, जंगल में बनेंगे पक्के 90 वाटर होल

Wed, 10 May 2023 11:30 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर Updated Wed, 10 May 2023 11:30 PM IST
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There should be no riots in the population, 90 water holes will be built in the forest
बलरामपुर। नेपाल की सीमा स्थित सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग से सटे करीब 100 गांवों के लिए राहत भरी खबर है। वन विभाग ने जंगल में बने कच्चे 90 वाटर होल को नए सिरे से पक्का बनाने की तैयारी की है। कच्चा वाटर होल होने के कारण उसमें पानी का ठहराव नहीं हो पाता है। ऐसे में वन्य जीवों को पानी की तलाश में भटकना पड़ता है। पक्का वाटर होल बन जाने से इसमें टैंकर के माध्यम से पानी की उपलब्धता कराई जाएगी।
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पिछले तीन माह के भीतर तेंदुआ ललिया, हरैया, गैसड़ी व महाराजगंज तराई तक पहुंच गया। तीन माह के भीतर दस से अधिक लोगों को तेंदुए ने हमला कर घायल कर दिया है। विशेषज्ञों ने जब इस पर मंथन किया तो पता चला कि जंगल के भीतर अभी तक जो भी वाटर होल हैं, वे सब कच्चे हैं। कई सूख चुके हैं। उसमें पानी नहीं है। ऐसे में पानी की तलाश में तेंदुए बाहर निकलकर आबादी में पहुंच जा रहे हैं।
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वन विभाग ने सत्यापन कराया तो 90 कच्चे वाटर होल मिले। इसमें से अधिकतर में पानी नहीं है। इसे देखते हुए वाटर होल को पक्का बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। एक वाटर होल पर करीब तीप लाख रुपये का खर्च आएगा। पहले चरण में दस वाटर होल को पक्का बनाया जाएगा। इसमें टैंकर के माध्यम से पानी भरा जाएगा ताकि गर्मी के मौसम में वन्य जीवों को जंगल से बाहर न निकलना पड़े।
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सोहेलवा जंगल एक नजर में
भारत-नेपाल सीमा पर 452 वर्ग किलोमीटर में फैला सोहेलवा जंगल वन्यजीवों को केंद्र है। बीते साल ट्रैकिंग कैमरे से तीन टाइगर भी दिखे हैं। इसे टाइगर रिजर्व घोषित करने की कवायद चल रही है। वैसे सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग में तेंदुए की संख्या लगातार बढ़ रही है। कैमरे की निगरानी में 60 से अधिक तेंदुआ, 153 हिरण, 1047 चीतल, 1160 जंगली सूकर, नौ फिशिंग कैट, 819 नीलगाय, 17 घुरल, 103 सांभर, 2413 लंगूर, 3385 बंदर व 61 लकड़बग्घा सहित कई अन्य प्रजाति के वन्यजीवों का प्रवास यहां पर पाया गया। इसके अतिरिक्त दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों का कलरव भी गूंजता रहता है। गिद्धों का भी यहां पर वास है।



सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग में पक्का वाटर होल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए प्रस्ताव भेजा गया है। जैसे ही स्वीकृति मिलती है उसपर काम शुरू कर दिया जाएगा। वैसे कच्चे वाटर होल में पानी भरवाने का काम किया जा रहा है, ताकि वन्य जीव आबादी में न आएं।
- डॉ. एम सेम्मारन, डीएफओ
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