{"_id":"6950171cb8d6f98f110d63af","slug":"the-tulshipur-rampur-range-echoed-with-the-clamor-of-foreign-guests-balrampur-news-c-99-1-brp1010-139686-2025-12-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Balrampur News: विदेशी मेहमानों के कलरव से गूंज उठा तुलसीपुर-रामपुर रेंज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Balrampur News: विदेशी मेहमानों के कलरव से गूंज उठा तुलसीपुर-रामपुर रेंज
विज्ञापन
बलरामपुर के भगवानपुर जलाशय में कलरव करते पक्षी ।-संवाद
जरवा। दूर-दराज देशों से आए देशी-विदेशी पक्षियों के कलरव ने सोहेलवा वन क्षेत्र की तुलसीपुर और रामपुर रेंज की वादियों को सुरों से भर दिया है। भगवानपुर, बघेलखंड, मजगवा और चित्तौड़गढ़ जलाशय के आसपास परिंदों की मृदुल चहचहाहट और अटखेलियां लोगों के मन को लुभा रही हैं।
साइबेरिया, अफगानिस्तान समेत अन्य देशों से आए रंग-बिरंगे विदेशी पक्षी कोमल स्वरों और सामूहिक कलरव से यहां के ईको-पर्यटन को नई पहचान दे रहे हैं। आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ नेपाल से आने वाले पर्यटक भी इन परिंदों की दुनिया में खोते नजर आते हैं। शरद ऋतु की शुरुआत होते ही साइबेरिया में पड़ने वाली भीषण बर्फबारी वहां भोजन का संकट खड़ा कर देती है।
नवंबर आते-आते ये प्रवासी पक्षी झुंडों में हजारों किलोमीटर की उड़ान भरकर सोहेलवा की हरियाली में आ पहुंचते हैं। यहां की झीलें, जलाशय और सुरक्षित वन क्षेत्र उन्हें न केवल भोजन देते हैं, बल्कि सुरक्षा और शांति भी प्रदान करते हैं। चार महीने बाद, बसंत के आगमन पर मार्च में, यही परिंदे फिर अपने मूल ठिकानों की ओर लौट जाते हैं। (संवाद)
विज्ञापन
नवंबर से मार्च तक रहते हैं पक्षी
नवंबर से मार्च तक यह समय पक्षी विहार और ईको-पर्यटन के लिए किसी उत्सव से कम नहीं होता। पर्यटकों की बढ़ती आमद से क्षेत्र की रौनक बढ़ती है और वन विभाग को भी संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक संबल मिलता है। इन दिनों यहां दुर्लभ जाति और प्रजातियों के पक्षी पण्कौआ, पिहो, जांघिल, ड्बारु, नीलसर, लालसर, सीकपर, पिंटेल, सलही, बारंकटा, बगुला, मैना, तोता, सारस, मोर सहित कई सुरीले पक्षी जंगल की हवाओं को संगीत से भर देते हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए दूरबीन, स्पॉटिंग स्कोप और वैनाकुलर की व्यवस्था की गई है, ताकि लोग पक्षियों को दूर से ही निहारें और उनके प्राकृतिक जीवन में कोई बाधा न पहुंचे।
अफगानिस्तान का हाईबैक्टेल, मनमोहक मेहमान
अफगानिस्तान से आया हाईबैक्टेल इन दिनों पर्यटकों का खास आकर्षण बना हुआ है। कई विदेशी पक्षी यहां प्रवास के दौरान प्रजनन भी करते हैं, जो सोहेलवा की सुरक्षित जैव-विविधता का प्रमाण है। पक्षियों के साथ-साथ वन क्षेत्र में पाए जाने वाले दुर्लभ सर्प और अन्य वन्यजीव भी पर्यटकों को रोमांच और जिज्ञासा से भर रहे हैं।
शिकारियों से सुरक्षा में मुस्तैद वन अमला
विदेशी पक्षियों को बहेलियों और शिकारियोंसे बचाने के लिए वन विभाग पूरी तरह सतर्क है। जिला वन्यजीव सुरक्षा अधिकारी अमरजीत प्रसाद और रामपुर रेंजर प्रभात वर्मा के अनुसार, परिंदों का यह कलरव क्षेत्र के लिए गर्व और आकर्षण का विषय है। जरवा ईको-पर्यटन स्थल और चित्तौड़गढ़ बांध पर आने वाले पर्यटक इस अद्भुत नजारे से अभिभूत हो रहे हैं। वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए उप रेंजर राधेश्याम, वीर बहादुर, वन दरोगा अखिलेश गुप्ता, मोहिनी वर्मा, वन रक्षक वागेशनंदन, चंद्रभान, केके श्रीवास्तव सहित पूरा वन अमला पुलिस के सहयोग से निरंतर गश्त कर रहा है।
विज्ञापन
साइबेरिया, अफगानिस्तान समेत अन्य देशों से आए रंग-बिरंगे विदेशी पक्षी कोमल स्वरों और सामूहिक कलरव से यहां के ईको-पर्यटन को नई पहचान दे रहे हैं। आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ नेपाल से आने वाले पर्यटक भी इन परिंदों की दुनिया में खोते नजर आते हैं। शरद ऋतु की शुरुआत होते ही साइबेरिया में पड़ने वाली भीषण बर्फबारी वहां भोजन का संकट खड़ा कर देती है।
विज्ञापन
नवंबर आते-आते ये प्रवासी पक्षी झुंडों में हजारों किलोमीटर की उड़ान भरकर सोहेलवा की हरियाली में आ पहुंचते हैं। यहां की झीलें, जलाशय और सुरक्षित वन क्षेत्र उन्हें न केवल भोजन देते हैं, बल्कि सुरक्षा और शांति भी प्रदान करते हैं। चार महीने बाद, बसंत के आगमन पर मार्च में, यही परिंदे फिर अपने मूल ठिकानों की ओर लौट जाते हैं। (संवाद)
विज्ञापन
नवंबर से मार्च तक रहते हैं पक्षी
नवंबर से मार्च तक यह समय पक्षी विहार और ईको-पर्यटन के लिए किसी उत्सव से कम नहीं होता। पर्यटकों की बढ़ती आमद से क्षेत्र की रौनक बढ़ती है और वन विभाग को भी संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक संबल मिलता है। इन दिनों यहां दुर्लभ जाति और प्रजातियों के पक्षी पण्कौआ, पिहो, जांघिल, ड्बारु, नीलसर, लालसर, सीकपर, पिंटेल, सलही, बारंकटा, बगुला, मैना, तोता, सारस, मोर सहित कई सुरीले पक्षी जंगल की हवाओं को संगीत से भर देते हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए दूरबीन, स्पॉटिंग स्कोप और वैनाकुलर की व्यवस्था की गई है, ताकि लोग पक्षियों को दूर से ही निहारें और उनके प्राकृतिक जीवन में कोई बाधा न पहुंचे।
अफगानिस्तान का हाईबैक्टेल, मनमोहक मेहमान
अफगानिस्तान से आया हाईबैक्टेल इन दिनों पर्यटकों का खास आकर्षण बना हुआ है। कई विदेशी पक्षी यहां प्रवास के दौरान प्रजनन भी करते हैं, जो सोहेलवा की सुरक्षित जैव-विविधता का प्रमाण है। पक्षियों के साथ-साथ वन क्षेत्र में पाए जाने वाले दुर्लभ सर्प और अन्य वन्यजीव भी पर्यटकों को रोमांच और जिज्ञासा से भर रहे हैं।
शिकारियों से सुरक्षा में मुस्तैद वन अमला
विदेशी पक्षियों को बहेलियों और शिकारियोंसे बचाने के लिए वन विभाग पूरी तरह सतर्क है। जिला वन्यजीव सुरक्षा अधिकारी अमरजीत प्रसाद और रामपुर रेंजर प्रभात वर्मा के अनुसार, परिंदों का यह कलरव क्षेत्र के लिए गर्व और आकर्षण का विषय है। जरवा ईको-पर्यटन स्थल और चित्तौड़गढ़ बांध पर आने वाले पर्यटक इस अद्भुत नजारे से अभिभूत हो रहे हैं। वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए उप रेंजर राधेश्याम, वीर बहादुर, वन दरोगा अखिलेश गुप्ता, मोहिनी वर्मा, वन रक्षक वागेशनंदन, चंद्रभान, केके श्रीवास्तव सहित पूरा वन अमला पुलिस के सहयोग से निरंतर गश्त कर रहा है।