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Balrampur News: तकियवा गांव की सरहद तक पहुंचती राप्ती की धारा
Tue, 22 Apr 2025 11:36 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Tue, 22 Apr 2025 11:36 PM IST
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बलरामपुर के तकियवा गांव में भरा बाढ़ का पानी। (फाइल फोटो)
गैड़ास बुजुर्ग (बलरामपुर)। बलरामपुर जिले के उतरौला तहसील अंतर्गत तकियवा गांव में राप्ती नदी का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। बाढ़ के समय नदी की तेज धारा अब गांव की सरहद तक पहुंच जाती है। कटान की रफ्तार इतनी तेज है कि गांव के 20 किसानों की कुल 112 बीघे उपजाऊ जमीन नदी में समा चुकी है, वहीं गांव के 110 घरों में रह रहे करीब 550 लोग बेघर होने के डर से दिन-रात दहशत में जी रहे हैं।
बरसात शुरू होने में अब सिर्फ 58 दिन शेष हैं, लेकिन बाढ़ खंड विभाग द्वारा अब तक कटानरोधी कार्य शुरू नहीं किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इंतजाम नहीं किए गए, तो राप्ती की धारा गांव को पूरी तरह लील सकती है। तकियवा गांव हर साल राप्ती नदी की बाढ़ और कटान की चपेट में आता है। तकियवा गांव अब वाकई संकट की कगार पर है। प्रशासन को यदि अब भी चेत नहीं आया, तो बरसात शुरू होने पर यहां विस्थापन और आपदा की स्थिति बन सकती है। समय रहते बाढ़ और कटान रोकने की दिशा में प्रभावी कार्यवाही की जरूरत है, वरना राप्ती नदी यह गांव इतिहास बना देगी।
नदी के तेज धारा डराती है
गांव के निवासी मुंशी बताते हैं कि बाढ़ के समय नदी की तेज धारा की आवाज ही लोगों को डरा देती है। ग्रामीणों की खरीफ की फसल हर वर्ष बर्बाद हो जाती है, जिससे अधिकांश लोग अब केवल रबी की फसल पर निर्भर हैं। कई किसान तो अब खेती छोड़कर दूसरे शहरों में मजदूरी करने को मजबूर हो चुके हैं। बाढ़ और कटान के चलते गांव की अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर पड़ा है।
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कटान से प्रभावित किसान और उनकी बर्बाद भूमि
किसान का नाम
बर्बाद भूमि (बीघे में)
तौफीक
10 बीघे
मुंशी
10 बीघे
रामचरन
5 बीघे
जाकिर अली
15 बीघे
खातिर अली
5 बीघे
दुखी यादव
10 बीघे
मिश्रीलाल
10 बीघे
शाहमोहम्मद
10 बीघे
आश्वासन मिला
ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से प्रशासन से कटानरोधी कार्य कराने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला है। इस साल स्थिति और ज्यादा गंभीर होती जा रही है, मगर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
प्रस्ताव हो रहा है तैयार
तकियवा गांव के पास कटानरोधी कार्य के लिए बाढ़ खंड विभाग को प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दे दिया गया है। जैसे ही शासन से बजट स्वीकृत होगा, कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
राजेंद्र बहादुर, एसडीएम उतरौला
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बरसात शुरू होने में अब सिर्फ 58 दिन शेष हैं, लेकिन बाढ़ खंड विभाग द्वारा अब तक कटानरोधी कार्य शुरू नहीं किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इंतजाम नहीं किए गए, तो राप्ती की धारा गांव को पूरी तरह लील सकती है। तकियवा गांव हर साल राप्ती नदी की बाढ़ और कटान की चपेट में आता है। तकियवा गांव अब वाकई संकट की कगार पर है। प्रशासन को यदि अब भी चेत नहीं आया, तो बरसात शुरू होने पर यहां विस्थापन और आपदा की स्थिति बन सकती है। समय रहते बाढ़ और कटान रोकने की दिशा में प्रभावी कार्यवाही की जरूरत है, वरना राप्ती नदी यह गांव इतिहास बना देगी।
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नदी के तेज धारा डराती है
गांव के निवासी मुंशी बताते हैं कि बाढ़ के समय नदी की तेज धारा की आवाज ही लोगों को डरा देती है। ग्रामीणों की खरीफ की फसल हर वर्ष बर्बाद हो जाती है, जिससे अधिकांश लोग अब केवल रबी की फसल पर निर्भर हैं। कई किसान तो अब खेती छोड़कर दूसरे शहरों में मजदूरी करने को मजबूर हो चुके हैं। बाढ़ और कटान के चलते गांव की अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर पड़ा है।
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कटान से प्रभावित किसान और उनकी बर्बाद भूमि
किसान का नाम
बर्बाद भूमि (बीघे में)
तौफीक
10 बीघे
मुंशी
10 बीघे
रामचरन
5 बीघे
जाकिर अली
15 बीघे
खातिर अली
5 बीघे
दुखी यादव
10 बीघे
मिश्रीलाल
10 बीघे
शाहमोहम्मद
10 बीघे
आश्वासन मिला
ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से प्रशासन से कटानरोधी कार्य कराने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला है। इस साल स्थिति और ज्यादा गंभीर होती जा रही है, मगर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
प्रस्ताव हो रहा है तैयार
तकियवा गांव के पास कटानरोधी कार्य के लिए बाढ़ खंड विभाग को प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दे दिया गया है। जैसे ही शासन से बजट स्वीकृत होगा, कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
राजेंद्र बहादुर, एसडीएम उतरौला