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Balrampur News: टेरर फंडिंग मामले में सस्पियर का राज और गहराया
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बलरामपुर। साइबर ठगी से टेरर फंडिंग तक पहुंचे बिहार निवासी सस्पियर के नेटवर्क की जांच में अब नए खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों को लखनऊ और बाराबंकी में भी गिरोह का जुड़ाव मिला है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार नेटवर्क का एक अहम हिस्सा बाराबंकी में सक्रिय था। यहां सस्पियर के एजेंट गरीब और बेरोजगार लोगों के बैंक खाते खरीदने और फर्जी केवाईसी कराने का काम करते थे। इन खातों से ठगी का पैसा सीधे डिजिटल वॉलेट व क्रिप्टो करेंसी में बदलकर पाकिस्तान के संदिग्ध खातों में भेजा जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि राजधानी लखनऊ में गिरोह का एक तकनीकी अड्डा था, जहां से फिशिंग लिंक, फर्जी एप और डार्क वेब एक्सेस का इस्तेमाल कर देशभर में ठगी की जाती थी।
अब तक की जांच में कई संदिग्ध आईपी एड्रेस पकड़े गए हैं, जिनमें खाड़ी देशों और पाकिस्तान के पते भी शामिल हैं। पुलिस को यहां से क्रिप्टो हार्ड वॉलेट, 9 मोबाइल फोन और 20 से ज्यादा फर्जी पासबुक मिले हैं। पुलिस जांच टीम सभी तकनीकी डिवाइस की फोरेंसिक जांच कर फंडिंग के विदेशी स्रोतों का पूरा नक्शा तैयार करने में जुटी है। एएसपी विशाल पांडेय ने बताया कि मामले में अभी जांच हो रही है, पूछताछ लगातार संदिग्धों से की जा रही है। पूर्व में ही पांच आरोपी गिरफ्तार हुए हैं, अभी किसी अन्य को आरोपी नहीं बनाया गया है।
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अब तक की कार्रवाई
-- 05 मुख्य आरोपी गिरफ्तार
-- कई संदिग्धों से पूछताछ जारी
-- 16 बैंक खातों पर लेन-देन रोक
-- 05 संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शन की पुष्टि
-- पाकिस्तान और खाड़ी देशों से जुड़े आईपी एड्रेस की पहचान
अब तक उजागर नेटवर्क का खाका
-- गरीबों के खाते 2–3 हजार में खरीदे जाते
-- फर्जी केवाईसी और मोबाइल नंबर से एक्टिवेशन
-- देशभर से ठगी का पैसा खातों में जमा
-- क्रिप्टोकरेंसी व डिजिटल हवाला के जरिये पाकिस्तान भेजा जाता
-- टेरर फंडिंग में इस्तेमाल की आशंका
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पुलिस सूत्रों के अनुसार नेटवर्क का एक अहम हिस्सा बाराबंकी में सक्रिय था। यहां सस्पियर के एजेंट गरीब और बेरोजगार लोगों के बैंक खाते खरीदने और फर्जी केवाईसी कराने का काम करते थे। इन खातों से ठगी का पैसा सीधे डिजिटल वॉलेट व क्रिप्टो करेंसी में बदलकर पाकिस्तान के संदिग्ध खातों में भेजा जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि राजधानी लखनऊ में गिरोह का एक तकनीकी अड्डा था, जहां से फिशिंग लिंक, फर्जी एप और डार्क वेब एक्सेस का इस्तेमाल कर देशभर में ठगी की जाती थी।
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अब तक की जांच में कई संदिग्ध आईपी एड्रेस पकड़े गए हैं, जिनमें खाड़ी देशों और पाकिस्तान के पते भी शामिल हैं। पुलिस को यहां से क्रिप्टो हार्ड वॉलेट, 9 मोबाइल फोन और 20 से ज्यादा फर्जी पासबुक मिले हैं। पुलिस जांच टीम सभी तकनीकी डिवाइस की फोरेंसिक जांच कर फंडिंग के विदेशी स्रोतों का पूरा नक्शा तैयार करने में जुटी है। एएसपी विशाल पांडेय ने बताया कि मामले में अभी जांच हो रही है, पूछताछ लगातार संदिग्धों से की जा रही है। पूर्व में ही पांच आरोपी गिरफ्तार हुए हैं, अभी किसी अन्य को आरोपी नहीं बनाया गया है।
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अब तक की कार्रवाई
अब तक उजागर नेटवर्क का खाका