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Balrampur News: डेढ़ माह से खाक छान रही टीमें, हाथ नहीं आ रहा तेंदुआ

Wed, 20 Dec 2023 11:42 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर Updated Wed, 20 Dec 2023 11:42 PM IST
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Teams have been searching for ashes for one and a half month, leopard is not coming in hand
बलरामपुर। सोहेलवा क्षेत्र में बीते डेढ़ माह से अधिक समय से व्याप्त तेंदुए का आतंक खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। आदमखोर बन चुके तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग के साथ ही दिल्ली व कोलकाता से आई विशेषज्ञों की टीमें जंगलों की खाक छानने के बाद भी उसे पकड़ने में सफल नहीं हो पा रही हैं। बुधवार को तेंदुआ वन क्षेत्र से जुड़े किसी गांव में दिखाई नहीं पड़ा। दूसरी तरफ कोलकाता से थर्मल ड्रोन से लैस हो कर आई टीम भी सिर्फ तेंदुए का लोकेशन ट्रैक करने तक सीमित बनी है।
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तेंदुए की दहशत से धर्मपुर, बेलवा व लालनगर सिपाहिया सहित करीब आधा दर्जन से अधिक गांवों में लोगों का जीना दुश्वार बना है। तेंदुए के भय से अधिकांश अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजना तक बंद कर दिया है। बीते मंगलवार को तेंदुए ने गणेशपुर हरिहरपुर गांव में हमला किया था। पुराने अनुभव बताते हैं कि तेंदुआ जिन गांवों में शिकार करता है वहां पुन: लौटकर जरूर आता है। इसके चलते ही बुधवार को विशेषज्ञों की टीम गांव क्षेत्र में ड्रोन के साथ ही जंगल वैन से तेंदुए की निगरानी में जुटी रही।
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इसके साथ ही जंगल के भीतर भी तेंदुए की तलाश के लिए जालीदार ट्रैक्टर से काबिंग शुरू कराई गई है। इसके बावजूद चालाक तेंदुआ निगरानी टीमों को गच्चा देने में सफल बना है। डीएफओ डा. एम. सेम्मारन का कहना है कि लगातार निगरानी के चलते फिलहाल तेंदुआ के खुलेआम चहल-कदमी करने पर काफी हद तक रोक लग गई है। अब उसे घेर कर पकड़ने के लिए निगरानी में जुटी सभी टीमों के साथ समन्वय कर नए सिरे से रणनीति भी बनाई गई है। भरोसा दिलाया कि जल्द ही इसके सुखद परिणाम दिखेंगे।
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महराजगंज तराई, हरैया सतघरवा व पचपेड़वा क्षेत्र में तेंदुआ अब तक छह बच्चों की जान ले चुका है। इसके चलते ही इलाके में व्याप्त दहशत के कारण अभिभावकों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजना तक बंद कर दिया है। ऐसे में बीते एक पखवारे से स्कूल न जाने के कारण बच्चों की पढ़ाई लिखाई भी बाधित हो रही है। इसके चलते ही प्राथमिक विद्यालय दुंदरा, महादेव गोसाई व लालनगर सिपहिया सहित अन्य स्कूलों में पढ़ने आने वाले बच्चों की संख्या काफी कम हो गई है। अभिभावक राम समुझ, कल्लू, मेहताब, राजेंद्र व इलियास आदि का कहना है कि तेंदुए दिन दहाड़े बच्चों को अपना शिकार बना रहा है। ऐसे में बच्चों को अकेले स्कूल भेजना खतरे से खाली नहीं है।
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