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Balrampur News: कटा हाथ देख सिसक रहा सुमेंद्र, एफआईआर दर्ज करने में कतरा रही पुलिस

Fri, 27 Feb 2026 10:44 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 27 Feb 2026 10:44 PM IST
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Sumendra was sobbing seeing the severed hand, while the police were hesitant to file an FIR.
केजीएमयू में भर्ती घायल बच्चा।-स्रोत: परिजन
जरवा। वनटांगिया ग्राम मूतेहरा सोनगढ़ा का आठ वर्षीय सुमेंद्र अभी ठीक से जिंदगी का अर्थ भी नहीं समझ पाया था कि बिजली विभाग की लापरवाही से बचपन की खुशिया ही छीन लीं। गांव में झूलते हाईटेंशन तार की चपेट में आने से वह बुरी तरह झुलस गया। हालत गंभीर होने पर लखनऊ में ऑपरेशन के बाद हाथ काटना पड़ा। इसके बावजूद गैसड़ी पुलिस आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने से कतरा रही है। ऐसा तब है जब मासूम मुख्यमंत्री के गोद लिए गांव का निवासी है। पुलिस की ज्यादती से आजिज परिजन अब सीएम से मिलकर पूरी कहानी बयां करेंगे।
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पिता ने बताया कि ऑपरेशन के बाद होश में आने पर सुमेंद्र गुमसुम है। अपने हाथ की ओर देखते ही चीख उठता है। दाहिने कंधे के नीचे खाली जगह देखकर वह सहम जाता है। वार्ड में मौजूद परिजन उसे ढांढ़स बंधा रहे हैं, लेकिन मासूम बार-बार पूछ रहा है कि मेरा हाथ कहां गया? उसकी आंखों में दर्द, डर और भविष्य की अनिश्चितता साफ झलक रही है।
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पिता पिंगला थारू और भतीजा अंशु राणा अस्पताल में सुमेंद्र के साथ हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर है, फिर भी बेटे की जिंदगी बचाने के लिए हर कोशिश की गई। खून की कमी के कारण ऑपरेशन तीन दिन टलता रहा। तब खंड शिक्षा अधिकारी रामराज थारू, बीएड के छात्र पंकज, शनि, सचिन व एजुकेट गर्ल संस्था के जिला समन्वयक वेद प्रकाश ने आगे बढ़कर रक्तदान किया। कुल छह यूनिट रक्त की व्यवस्था हुई, जिसमें दो यूनिट सुमेंद्र को चढ़ाया जा चुका है।
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चिकित्सकों ने बताया कि अभी खून चढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए रक्तदान से मिले रक्त को सुरक्षित रखा गया है। सुमेंद्र के पूर्ण स्वस्थ होने की दुआ पूरा वार्ड कर रहा है। उसकी मासूमियत और स्थिति देखकर हर किसी की आंखें भर आ रही हैं। बस गैसड़ी पुलिस ही निष्ठुर बनी है, एक एफआईआर दर्ज करने में पुलिस हांफ रही है। प्रभारी निरीक्षक दुर्विजय की जुबान जांच होने से ज्यादा नहीं चल पा रही है। इसके आगे बस चुप्पी है।
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हादसा हुआ तो भी दाैड़ा रही पुलिस
परिवार का आरोप है कि बिजली विभाग की लापरवाही से हादसा हुआ। गांव में लंबे समय से तार झूल रहा था, जिसकी शिकायत भी की गई थी। कमिश्नर के हस्तक्षेप के बाद मुआवजे के लिए विभागीय रिपोर्ट तो भेजी गई, लेकिन पुलिस ने अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की। चाचा दुर्गेश का कहना है कि प्रभारी निरीक्षक से लगातार गुहार के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही। ऐसे में मुआवजे की कार्यवाही प्रभावित हो सकती है। इसकी जिम्मेदार पुलिस ही होगी। हमारी विडंबना है कि मुख्यमंत्री के गोद लिए गांव में भी पुलिस ज्यादती से बाज नहीं आ रही।
मासूम के हक के लिए उठाएंगे आवाज
मासूम सुमेंद्र के मामले में न्याय होना चाहिए। यदि एफआईआर दर्ज करने और मुआवजा देने में देरी हुई तो कोर्ट का सहारा लेंगे। फिलहाल अधिकारियों को मानवीय संवेदना के आधार पर कार्रवाई कर मासूम को न्याय के लिए काम करना चाहिए।

महेंद्र तिवारी, अधिवक्ता हाईकोर्ट
एफआईआर न होने पर मुआवजा और कानूनी राह में आएगी बाधा
हादसे की एफआईआर दर्ज न होने से भविष्य में उपभोक्ता फोरम या न्यायालय में वाद दायर करने में बाधा आ सकती है। फिलहाल पावर कॉरपोरेशन अपने नियमों के तहत मुआवजा तय करेगा, लेकिन यदि परिवार संतुष्ट नहीं हुआ तो कानूनी लड़ाई का विकल्प रहेगा। ऐसे में एफआईआर महत्वपूर्ण साक्ष्य मानी जाती है। मासूम सुमेंद्र का बचपन अब कृत्रिम हाथ, लंबा इलाज और मानसिक पुनर्वास की चुनौती से भरा है। बच्चे के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठाए ही जाने चाहिए।
रामबहादुर, सेवानिवृत्त आईएएस
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