{"_id":"658dbd89e472adf38b076769","slug":"road-being-built-with-japanese-technology-after-spending-rs-5-crore-balrampur-news-c-99-1-brp1003-5677-2023-12-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Balrampur News: पांच करोड़ खर्च कर बन रही जापानी तकनीक से सड़क","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Balrampur News: पांच करोड़ खर्च कर बन रही जापानी तकनीक से सड़क
Thu, 28 Dec 2023 11:55 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Thu, 28 Dec 2023 11:55 PM IST
विज्ञापन
बलरामपुर। जिले में प्रयोग के तौर पर 5.7 किमी लंबी सड़क का निर्माण जापान की फुल डेफ्थ रिक्लेमेशन (एफडीआर) तकनीक से हो रहा है। रेहरा बाजार से बाबागंज मार्ग तक बनने वाली इस सड़क के निर्माण पर पांच करोड़ रुपये का खर्च आएगा। सड़क निर्माण की नई तकनीक कारगर साबित होने पर जिले के सभी नौ ब्लॉक में इसी तकनीक से प्रधानमंत्री योजना के तहत बनने वाली सड़कों का निर्माण कार्य होगा।
ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की तरफ से इस सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। इस तकनीक में सड़क बनाने के लिए पुराना मलबा ही इस्तेमाल किया गया है। इससे निर्माण की लागत कम हो जाती है। इस तकनीक में पहले पुरानी गिट्टी को मशीन के जरिये सीमेंट और केमिकल में मिश्रित कर सड़क का आधार तैयार किया गया। फिर इसका पेस्ट लगा कर सड़क की सतह बनाने के बाद इसके ऊपर इमल्सन का छिड़काव कर सिंथेटिक कपड़े या प्लास्टिक को बिछाया गया।
सबसे अंत में इसके ऊपर डामर व गिट्टी का लेपन होगा। इस नई पद्धति से बनने वाली सड़क की आयु सीमा अन्य सड़कों की अपेक्षा पांच से सात साल अधिक रहेगी। रेहरा बाजार-बाबागंज मार्ग पर पायलट प्रोजेक्ट के तहत बन रही नई सड़क के निर्माण कार्य का जायजा सीडीओ ने मौके पर जाकर लिया। उन्होंने संचालित कार्य की गुणवत्ता पर भी संतोष जताते हुए पूरा कार्य तय समयावधि में पूरा किए जाने का निर्देश दिया।
विज्ञापन
- इस तकनीक से सड़क निर्माण के लिए जिले में तैनात ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अभियंताओं को विशेष तौर पर प्रशिक्षण दिया गया है। यूपीआरआरडीए की तरफ से इस तकनीक के बारे में जानकारी देने व प्रशिक्षित करने के लिए लखनऊ में विशेष कार्यशाला का आयोजन भी हो चुका है।
ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंता कमल किशोर ने बताया कि जिले में पहली बार एफडीआर पद्धति से इस सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। इस तकनीक से बनी सड़क के बेहतर साबित होने पर अगले साल से जिले के सभी नौ ब्लॉक क्षेत्रों में प्रधानमंत्री योजना के तहत बनने वाली सड़कों में इसी तकनीक का इस्तेमाल होगा।
विज्ञापन
ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की तरफ से इस सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। इस तकनीक में सड़क बनाने के लिए पुराना मलबा ही इस्तेमाल किया गया है। इससे निर्माण की लागत कम हो जाती है। इस तकनीक में पहले पुरानी गिट्टी को मशीन के जरिये सीमेंट और केमिकल में मिश्रित कर सड़क का आधार तैयार किया गया। फिर इसका पेस्ट लगा कर सड़क की सतह बनाने के बाद इसके ऊपर इमल्सन का छिड़काव कर सिंथेटिक कपड़े या प्लास्टिक को बिछाया गया।
विज्ञापन
सबसे अंत में इसके ऊपर डामर व गिट्टी का लेपन होगा। इस नई पद्धति से बनने वाली सड़क की आयु सीमा अन्य सड़कों की अपेक्षा पांच से सात साल अधिक रहेगी। रेहरा बाजार-बाबागंज मार्ग पर पायलट प्रोजेक्ट के तहत बन रही नई सड़क के निर्माण कार्य का जायजा सीडीओ ने मौके पर जाकर लिया। उन्होंने संचालित कार्य की गुणवत्ता पर भी संतोष जताते हुए पूरा कार्य तय समयावधि में पूरा किए जाने का निर्देश दिया।
विज्ञापन
- इस तकनीक से सड़क निर्माण के लिए जिले में तैनात ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अभियंताओं को विशेष तौर पर प्रशिक्षण दिया गया है। यूपीआरआरडीए की तरफ से इस तकनीक के बारे में जानकारी देने व प्रशिक्षित करने के लिए लखनऊ में विशेष कार्यशाला का आयोजन भी हो चुका है।
ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंता कमल किशोर ने बताया कि जिले में पहली बार एफडीआर पद्धति से इस सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। इस तकनीक से बनी सड़क के बेहतर साबित होने पर अगले साल से जिले के सभी नौ ब्लॉक क्षेत्रों में प्रधानमंत्री योजना के तहत बनने वाली सड़कों में इसी तकनीक का इस्तेमाल होगा।