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Balrampur News: सुरक्षित भूमि के घपले में फंसा सेवानिवृत्त लेखपाल
Sat, 02 Dec 2023 11:52 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sat, 02 Dec 2023 11:52 PM IST
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गोंडा। सक्षम अधिकारी के आदेश के बिना और कृषि पट्टा आवंटन पत्रावली की ही खतौनी में नाम दर्ज करने के मामले में एक सेवानिवृत्त लेखपाल फंस गया है। देवीपाटन मंडल के अपर आयुक्त ने भूमि पर काबिज खातेदारों की अपील निरस्त कर तत्कालीन लेखपाल के विरुद्ध केस दर्ज कराने का आदेश उपजिलाधिकारी को दिया है।
सदर तहसील के ग्राम त्रिभवन नगर ग्रिंट निवासी अर्जुन और उनके भाई राम लखन के नाम गांव की तीन बीघा सरकारी भूमि कृषि पट्टा आवंटन के आधार पर वर्ष 1410 से 1415 व 1416 से 1421 फसली में असंक्रमणीय भूमिधर के रूप में अभिलेखों में दर्ज किए गए। इसके बाद वर्ष 1422 से 1427 फसली में उन्हें संक्रमणीय भूमिधर के रूप में दर्ज करते हुए खरीद-फरोख्त का अधिकार दे दिया गया। खातेदार अर्जुन की मृत्यु हुई तो 23 जनवरी 2018 के आदेश के अनुपालन में उसके वारिसान दो बेटों राम गोपाल, चेतराम और पत्नी फूलकला का नाम खतौनी में दर्ज हो गया। राम गोपाल व चेतराम ने 28 जनवरी 2019 को हरीराम के पक्ष में बैनामा भी कर दिया।
शिकायतकर्ता रामशब्द ने इस मामले की शिकायत उपजिलाधिकारी से की तो उन्होंने क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक व लेखपाल से रिपोर्ट मांगी। राजस्व निरीक्षक और लेखपाल की आख्या के आधार पर तत्कालीन उपजिलाधिकारी ने 30 मई 2019 को राम गोपाल, चेतराम और फूलकला का नाम निरस्त करते हुए दोनों भूखंडों को गांव सभा के खाते में दर्ज करने का आदेश दे दिया। इस पर राम गोपाल और चेतराम ने अधिवक्ता के जरिये आयुक्त के न्यायालय में दो अपील दाखिल कर एसडीएम के आदेश को निरस्त करने की मांग की।
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दोनों अपीलों की सुनवाई के दौरान अपर आयुक्त के आदेश पर 20 नवंबर 2023 को प्रेषित अपनी रिपोर्ट में उपजिलाधिकारी सदर सुशील कुमार ने कहा कि तत्कालीन लेखपाल शिवनंदन लाल श्रीवास्तव ने बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश और आर-6 पर अंकना और बिना किसी आधार के ग्राम त्रिभवन नगर ग्रिंट की षटवार्षिक खतौनी वर्ष 1410 से 1415 फसली में अर्जुन पुत्र देवी का नाम अंकित कर नया खाता बनाया। साथ ही भ्रमित करने और वास्तविक तथ्यों को छिपाने के उद्देश्य से उसके मुख्य पृष्ठ पर लेखपाल जोगी प्रसाद के नाम की स्लिप चस्पा कराई गई। तहसील के अभिलेखागार में मौजूद कृषि आवंटन पत्रावली और पट्टा रजिस्टर में भी अर्जुन पुत्र देवी के नाम कृषि आवंटन होना नहीं पाया गया।
सुनवाई के दौरान अपर आयुक्त राम प्रकाश ने एसडीएम की रिपोर्ट, मुकदमे के तथ्य और साक्ष्य को देखते हुए दोनों अपीलों को निरस्त कर दिया। साथ ही तत्कालीन लेखपाल शिवनंदन लाल श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त) के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराकर कार्रवाई का आदेश उपजिलाधिकारी को दिया है। अपर आयुक्त के आदेश से जिले के राजस्व कर्मियों में हड़कंप मचा है।
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सदर तहसील के ग्राम त्रिभवन नगर ग्रिंट निवासी अर्जुन और उनके भाई राम लखन के नाम गांव की तीन बीघा सरकारी भूमि कृषि पट्टा आवंटन के आधार पर वर्ष 1410 से 1415 व 1416 से 1421 फसली में असंक्रमणीय भूमिधर के रूप में अभिलेखों में दर्ज किए गए। इसके बाद वर्ष 1422 से 1427 फसली में उन्हें संक्रमणीय भूमिधर के रूप में दर्ज करते हुए खरीद-फरोख्त का अधिकार दे दिया गया। खातेदार अर्जुन की मृत्यु हुई तो 23 जनवरी 2018 के आदेश के अनुपालन में उसके वारिसान दो बेटों राम गोपाल, चेतराम और पत्नी फूलकला का नाम खतौनी में दर्ज हो गया। राम गोपाल व चेतराम ने 28 जनवरी 2019 को हरीराम के पक्ष में बैनामा भी कर दिया।
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शिकायतकर्ता रामशब्द ने इस मामले की शिकायत उपजिलाधिकारी से की तो उन्होंने क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक व लेखपाल से रिपोर्ट मांगी। राजस्व निरीक्षक और लेखपाल की आख्या के आधार पर तत्कालीन उपजिलाधिकारी ने 30 मई 2019 को राम गोपाल, चेतराम और फूलकला का नाम निरस्त करते हुए दोनों भूखंडों को गांव सभा के खाते में दर्ज करने का आदेश दे दिया। इस पर राम गोपाल और चेतराम ने अधिवक्ता के जरिये आयुक्त के न्यायालय में दो अपील दाखिल कर एसडीएम के आदेश को निरस्त करने की मांग की।
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दोनों अपीलों की सुनवाई के दौरान अपर आयुक्त के आदेश पर 20 नवंबर 2023 को प्रेषित अपनी रिपोर्ट में उपजिलाधिकारी सदर सुशील कुमार ने कहा कि तत्कालीन लेखपाल शिवनंदन लाल श्रीवास्तव ने बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश और आर-6 पर अंकना और बिना किसी आधार के ग्राम त्रिभवन नगर ग्रिंट की षटवार्षिक खतौनी वर्ष 1410 से 1415 फसली में अर्जुन पुत्र देवी का नाम अंकित कर नया खाता बनाया। साथ ही भ्रमित करने और वास्तविक तथ्यों को छिपाने के उद्देश्य से उसके मुख्य पृष्ठ पर लेखपाल जोगी प्रसाद के नाम की स्लिप चस्पा कराई गई। तहसील के अभिलेखागार में मौजूद कृषि आवंटन पत्रावली और पट्टा रजिस्टर में भी अर्जुन पुत्र देवी के नाम कृषि आवंटन होना नहीं पाया गया।
सुनवाई के दौरान अपर आयुक्त राम प्रकाश ने एसडीएम की रिपोर्ट, मुकदमे के तथ्य और साक्ष्य को देखते हुए दोनों अपीलों को निरस्त कर दिया। साथ ही तत्कालीन लेखपाल शिवनंदन लाल श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त) के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराकर कार्रवाई का आदेश उपजिलाधिकारी को दिया है। अपर आयुक्त के आदेश से जिले के राजस्व कर्मियों में हड़कंप मचा है।