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Balrampur News: अंगूठा लगवाकर राशन हड़पा, कोटे से 198 क्विंटल खाद्यान्न गायब
Sun, 25 Oct 2026 11:27 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sun, 25 Oct 2026 11:27 PM IST
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जांच करते अधिकारी
सादुल्लाहनगर। गरीबों को मिलने वाले सरकारी राशन के वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितता का मामला सामने आया है। रेहरा बाजार विकासखंड की ग्राम पंचायत जिगनी के उचित दर विक्रेता प्रदीप कुमार पर कार्डधारकों का ई-पॉस मशीन पर अंगूठा लगवाने के बाद भी राशन न देने और निर्धारित मात्रा से कम खाद्यान्न देने का खुलासा हुआ है।
पूर्ति विभाग की जांच में 68.42 क्विंटल गेहूं और 130 क्विंटल चावल का हिसाब नहीं मिला। कुल 198.42 क्विंटल खाद्यान्न की कमी बताई गई है। जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन की अनुमति के बाद 23 अक्तूबर को कोटेदार के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। इससे पहले 13 अक्तूबर को ही उसका अनुबंध निलंबित कर दिया गया था।
पूर्ति निरीक्षक मनमथ नाथ गुप्ता ने बताया कि जिगनी निवासी रहमुल्ला ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की थी कि कोटेदार ने दो महीने का खाद्यान्न अंगूठा लगवाने के बाद भी नहीं दिया। ग्राम प्रधान शेर अली ने भी कुछ कार्डधारकों को राशन न देने और एक से दो किलोग्राम तक कटौती करने की शिकायत की थी।
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इसकी जांच के लिए पूर्ति निरीक्षक एक अक्तूबर को गांव पहुंचे। मौके पर अंत्योदय और पात्र गृहस्थी योजना के 87 कार्डधारकों या उनके परिजनों से पूछताछ कर लिखित बयान दर्ज किए गए। जांच में सामने आया कि अगस्त 2026 में अधिकांश कार्डधारकों का ई-पॉस मशीन पर अंगूठा लगवाने के बावजूद खाद्यान्न नहीं दिया गया। कुछ कार्डधारकों को निर्धारित मात्रा से कम राशन देने की बात भी सामने आई। कई लोगों को तत्काल खाद्यान्न देने के बजाय पर्ची थमाकर बाद में राशन देने की बात कही गई।
तीन किलो चीनी के बजाय दो किलो देने का मामला
-- जांच में अंत्योदय कार्डधारकों को निर्धारित तीन किलोग्राम के बजाय दो किलोग्राम चीनी देने और इसके लिए 50 रुपये लेने की अनियमितता भी सामने आई। दुकान के सामने साइन बोर्ड, स्टॉक बोर्ड, रेट बोर्ड, टोल फ्री नंबर और लाभार्थियों की सूची समेत जरूरी सूचनाएं भी प्रदर्शित नहीं मिलीं। कार्डधारकों के साथ अच्छा व्यवहार न करने की बात भी जांच में सामने आई। जांच के दौरान कोटेदार दुकान पर मौजूद नहीं मिला। पूर्ति निरीक्षक ने उसके मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन मोबाइल स्विच ऑफ मिला। कोटेदार के पिता और परिवार के अन्य सदस्यों ने बताया कि वह किसी काम से बाहर गया है और गोदाम की चाबी भी उसी के पास है। इस वजह से मौके पर स्टॉक का भौतिक सत्यापन नहीं हो सका।
निलंबन के बाद भी नहीं मिला खाद्यान्न का हिसाब
-- अनियमितताएं सामने आने के बाद 13 अक्तूबर को कोटेदार का अनुबंध निलंबित कर दिया गया। जिगनी की दुकान को ग्राम पंचायत मनुवाग के कोटेदार बलवीर की दुकान से संबद्ध किया गया, ताकि कार्डधारकों को राशन मिल सके। निलंबित कोटेदार को बचा हुआ खाद्यान्न और ई-पॉस मशीन, चार्जर, ई-वेटिंग स्केल तथा आइरिस स्कैनर सहित उपकरण संबद्ध विक्रेता को सौंपने के निर्देश दिए गए। 13 अक्तूबर को बलवीर को केवल 22.50 क्विंटल गेहूं और छह क्विंटल चावल ही प्राप्त कराया गया। 16 और 17 अक्तूबर को संपर्क किए जाने पर प्रदीप कुमार ने लिखित बयान दिया कि उसके पास इसके अतिरिक्त कोई खाद्यान्न उपलब्ध नहीं है। पूर्ति निरीक्षक और क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी ने सितंबर के अवशेष और अक्तूबर में प्राप्त खाद्यान्न के ई-चालानों का मिलान किया। जांच रिपोर्ट में 68.42 क्विंटल गेहूं और 130 क्विंटल चावल की कमी सामने आई। विभाग ने इसे कालाबाजारी कर निजी लाभ लेने का मामला मानते हुए कार्रवाई की संस्तुति की।
कराई जा रही विवेचना
-- खाद्यान्न वितरण में अनियमितता की शिकायत के बाद रिपोर्ट दर्ज कर लिया गया है। विवेचना कराई जा रही है। जो भी तथ्य सामने आएंगे उसी के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. जितेंद्र कुमार, क्षेत्राधिकारी उतरौला
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पूर्ति विभाग की जांच में 68.42 क्विंटल गेहूं और 130 क्विंटल चावल का हिसाब नहीं मिला। कुल 198.42 क्विंटल खाद्यान्न की कमी बताई गई है। जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन की अनुमति के बाद 23 अक्तूबर को कोटेदार के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। इससे पहले 13 अक्तूबर को ही उसका अनुबंध निलंबित कर दिया गया था।
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पूर्ति निरीक्षक मनमथ नाथ गुप्ता ने बताया कि जिगनी निवासी रहमुल्ला ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की थी कि कोटेदार ने दो महीने का खाद्यान्न अंगूठा लगवाने के बाद भी नहीं दिया। ग्राम प्रधान शेर अली ने भी कुछ कार्डधारकों को राशन न देने और एक से दो किलोग्राम तक कटौती करने की शिकायत की थी।
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इसकी जांच के लिए पूर्ति निरीक्षक एक अक्तूबर को गांव पहुंचे। मौके पर अंत्योदय और पात्र गृहस्थी योजना के 87 कार्डधारकों या उनके परिजनों से पूछताछ कर लिखित बयान दर्ज किए गए। जांच में सामने आया कि अगस्त 2026 में अधिकांश कार्डधारकों का ई-पॉस मशीन पर अंगूठा लगवाने के बावजूद खाद्यान्न नहीं दिया गया। कुछ कार्डधारकों को निर्धारित मात्रा से कम राशन देने की बात भी सामने आई। कई लोगों को तत्काल खाद्यान्न देने के बजाय पर्ची थमाकर बाद में राशन देने की बात कही गई।
तीन किलो चीनी के बजाय दो किलो देने का मामला
निलंबन के बाद भी नहीं मिला खाद्यान्न का हिसाब
कराई जा रही विवेचना
डॉ. जितेंद्र कुमार, क्षेत्राधिकारी उतरौला