{"_id":"6a68f65e27f0ddbb3d0960b8","slug":"python-camped-under-the-bridge-for-a-year-rescued-balrampur-news-c-99-1-slko1029-152327-2026-07-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Balrampur News: साल भर से पुल के नीचे डेरा जमाए अजगर का रेस्क्यू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Balrampur News: साल भर से पुल के नीचे डेरा जमाए अजगर का रेस्क्यू
Wed, 29 Jul 2026 12:05 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Wed, 29 Jul 2026 12:05 AM IST
विज्ञापन
फोटो-2-बलरामपुर के चित्तौड़गढ़ जलाशय के पास अजगर को छोड़ती टीम।-स्रोत : विभाग
जरवा। सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग की रामपुर रेंज के ग्राम प्रतापपुर लुधौरी में मंगलवार को वन विभाग ने करीब एक वर्ष से पुल के नीचे डेरा जमाए विशाल अजगर का सफल रेस्क्यू किया। लगभग 16 फीट लंबे और करीब 60 किलोग्राम वजनी इस अजगर ने मंगलवार सुबह एक सियार को अपना शिकार बना लिया था। इसकी जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ दिया।
रेस्क्यू के बाद गांव के लोगों ने राहत महसूस की। गांव के खुर्रम के ईंट भट्ठे के निकट स्थित पुल के नीचे यह अजगर पिछले करीब एक वर्ष से डेरा जमाए था। ग्रामीणों का कहना है कि पुल के पास बने एक छोटे गड्ढे में वर्षभर पानी भरा रहता था। इसी वजह से अजगर ने वहीं अपना ठिकाना बना लिया था। पहले भी वन विभाग ने दो-तीन बार उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन हर बार वह हाथ नहीं आया। मंगलवार सुबह करीब छह बजे ग्रामीणों ने पुल के नीचे से सियार की चीखने की आवाज सुनी। मौके पर पहुंचे लोगों ने देखा कि अजगर सियार को जकड़कर निगल रहा है।
सूचना पर वन विभाग के कर्मी मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों के सहयोग से करीब चार घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद अजगर को सुरक्षित बाहर निकाल कर कैंपर वाहन से रामपुर रेंज कार्यालय लाया गया। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद अजगर को चित्तौड़गढ़ जलाशय के निकट वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया।
विज्ञापन
निगला सियार उगला, हो चुकी थी मौत
रेंजर भोला सिंह ने बताया कि अजगर अधिक वजन होने के कारण लंबी दूरी तक नहीं जा पाता था, इसलिए उसने पानी वाले स्थान को ही अपना स्थायी ठिकाना बना लिया था। उन्होंने बताया कि पकड़े जाने के दौरान अजगर ने निगला हुआ सियार बाहर उगल दिया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। ग्रामीण अनवारुल हसन, कल्लू, ओमप्रकाश, रामनरेश, सहजराम और ननके ने बताया कि अब गांव के लोगों ने राहत महसूस की है।
विज्ञापन
रेस्क्यू के बाद गांव के लोगों ने राहत महसूस की। गांव के खुर्रम के ईंट भट्ठे के निकट स्थित पुल के नीचे यह अजगर पिछले करीब एक वर्ष से डेरा जमाए था। ग्रामीणों का कहना है कि पुल के पास बने एक छोटे गड्ढे में वर्षभर पानी भरा रहता था। इसी वजह से अजगर ने वहीं अपना ठिकाना बना लिया था। पहले भी वन विभाग ने दो-तीन बार उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन हर बार वह हाथ नहीं आया। मंगलवार सुबह करीब छह बजे ग्रामीणों ने पुल के नीचे से सियार की चीखने की आवाज सुनी। मौके पर पहुंचे लोगों ने देखा कि अजगर सियार को जकड़कर निगल रहा है।
विज्ञापन
सूचना पर वन विभाग के कर्मी मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों के सहयोग से करीब चार घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद अजगर को सुरक्षित बाहर निकाल कर कैंपर वाहन से रामपुर रेंज कार्यालय लाया गया। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद अजगर को चित्तौड़गढ़ जलाशय के निकट वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया।
विज्ञापन
निगला सियार उगला, हो चुकी थी मौत
रेंजर भोला सिंह ने बताया कि अजगर अधिक वजन होने के कारण लंबी दूरी तक नहीं जा पाता था, इसलिए उसने पानी वाले स्थान को ही अपना स्थायी ठिकाना बना लिया था। उन्होंने बताया कि पकड़े जाने के दौरान अजगर ने निगला हुआ सियार बाहर उगल दिया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। ग्रामीण अनवारुल हसन, कल्लू, ओमप्रकाश, रामनरेश, सहजराम और ननके ने बताया कि अब गांव के लोगों ने राहत महसूस की है।